
New Delhi : देश में विपक्ष की ओर से मोदी सरकार के खिलाफ बन रहे माहौल और दलितों के आंदोलन को लेकर सरकार पर उठ रहे सवालों से केंद्र सरकार और बीजेपी बेचैन है. वहीं उन्नाव और कठुआ की घटनाओं के बाद सरकार पर सवालों की बौछार शुरू हो गई है, जिससे केंद्र सरकार दबाव में आती दिख रही है. परिणामस्वरूप नरेंद्र मोदी सरकार शनिवार को दो महत्वपूर्ण अध्यादेश लाने पर फैसला ले सकती है. पहले ऑर्डिनेंस से पॉस्को एक्ट में बदलाव कर सकती है तो दूसरे ऑर्डिनेंस से एससी/एसटी कानून को दोबारा पुराने स्वरूप में ला सकती है. दोनों एक्ट में बदलाव की मांग केंद्र के खिलाफ दलितों के आंदोलन और हालिया दिनों उन्नाव और कठुआ में हुई रेप की हृदय विदारक घटनाओं के बाद उठी है. कयास लगाया जा रहा है कि शनिवार को पीएम नरेन्द्र मोदी विदेश दौरे से लौटने के तुरंत बाद कैबिनेट मीटिंग में भाग लेंगे, जिसमें अध्यादेश के मुद्दे पर चर्चा हो सकती है और संभवत: फैसला भी लिया जा सकता है. सूत्रों के मुताबिक खबर ये भी मिल रही है कि सरकार दोनों ऑर्डिनेंस के साथ तैयार है. पॉस्को एक्ट में बदलाव के अलावा सरकार एससी/एसटी एक्ट में बदलाव से संबंधित ऑर्डिनेंस को भी शनिवार को ही मंजूरी दे सकती है.
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विपक्ष के साथ अपनों की नाराजगी भी झेल रही मोदी सरकार
गौरतलब है कि हालिया घटनाक्रम में उन्नाव और कठुआ में हुए रेप व एससी-एसटी एक्ट में कोर्ट के फैसले के बाद सरकार को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा था. रेप की घटना के बाद इसके लिए मौजूदा कानून को और कड़ा करने की मांग उठी. वहीं महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने भी इस मांग का समर्थन किया. खबर है कि रेप के खिलाफ उठ रही आवाज और पूरे देश मे तीव्र आंदोलनों को देखते हुए सरकार ने ऑर्डिनेंस लाने का विचार किया है. प्रस्तावित बदलाव के अनुसार, अब कोई भी नाबालिग के साथ रेप करता है तो उसे फांसी की सजा दी जा सकती है. नाबालिग की उम्र 12 साल से कम होनी चाहिए. हालांकि इसमें और भी जो बदलाव सुझाए गए हैं, उनका खुलासा नहीं हो सका है.
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