
Ranchi : केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने स्वीकार किया है कि अभी अधिसंख्य डॉक्टर जेनेरिक दवाई नहीं लिख रहे है. हालांकि उन्होंने डॉक्टरों से समाज के प्रति संवेदनशील होने का आह्वान करते हुए कहा कि वे जेनेरिक दवा ही लिखें. उन्होंने कहा कि जेनेरिक दवा लिखने को लेकर डॉक्टरों को निर्देश दिया गया है. इसे सख्ती से अनुपालन कराया जाएगा. गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने 25 मई को धनबाद के बलियापुर से कई योजनाओं का शिलान्यास किया. इसी कड़ी में उन्होंने स्वास्थ्य सेवा को सुदृढ़ करने के मकसद से देवघर में एम्स का शिलान्यास किया. साथ ही 250 प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र की शुरूआत के लिए एमओयू भी किए गए. मकसद था कि लोगों को कम कीमत पर जेनेरिक दवाएं उपल्बध हो सकें.
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कमीशन के चक्कर में लिखते है ब्रांडेड कंपनी की महंगी दवा
ये तो जग जाहिर है कि धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर वही दवा लिखते हैं जिसमें उन्हें ज्यादा कमीशन मिलता है. इसका उदाहरण है डॉक्टरों के इर्द-गिर्द घूमते एमआर जो, उन्हें अपनी दवाइयों की विशेषता, गुणवत्ता और कमीशन का पाठ पढ़ाते है. लिहाजा पैसे के लालच में डॉक्टर गरीबों की जेब की फिक्र न कर अपनी जेब भरने की सोचते हैं. ऐसे में डॉक्टर जेनरिक दवा लिखने के बजाय ब्रांडेड कंपनी की महंगी दवा लिखते हैं.
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अपने विवेक से ईलाज करते है डॉक्टर
वहीं रिम्स के प्रभारी निदेशक डॉ आरके श्रीवास्तव ने जेनरिक दवा के संबंध में कहा कि डॉक्टर अपने विवेक से मरीज का इलाज करते है. डॉक्टरों के ऊपर मैं दवा लिखने का दबाव नहीं बना सकता हूं. उन्होंने कहा कि मरीजों को उपलब्ध और सस्ती दवा लिखी जानी चाहिए, ताकि कम खर्च में मरीजों का इलाज हो सके.
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