
New Delhi : आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य के दर्जे की मांग पर टीडीपी और बी जेपी आमने – सामने हैं. इसी मुद्दे पर टीडीपी की ओर से चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार रात प्रेस कांफ्रेंस करके एनडीए से अलग होने का ऐलान कर दिया. इसके बाद गुरूवार को आंध्र कैबिनेट से बीजेपी के दो मंत्रियों ने भी इस्तीफा दे दिया. आंध्र को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाने की मांग काफी पहले से चल रही थी. हालांकि इस संदर्भ में चंद्रबाबू ने कहा भी है कि मैंने 29 बार दिल्ली जाकर पीएम से मुलाकात भी की, लेकिन सरकार की ओर से कोई पहल नहीं हुई.
New Delhi : आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य के दर्जे की मांग पर टीडीपी और बी जेपी आमने – सामने हैं. इसी मुद्दे पर टीडीपी की ओर से चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार रात प्रेस कांफ्रेंस करके एनडीए से अलग होने का ऐलान कर दिया. इसके बाद गुरूवार को आंध्र कैबिनेट से बीजेपी के दो मंत्रियों ने भी इस्तीफा दे दिया. आंध्र को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाने की मांग काफी पहले से चल रही थी. हालांकि इस संदर्भ में चंद्रबाबू ने कहा भी है कि मैंने 29 बार दिल्ली जाकर पीएम से मुलाकात भी की, लेकिन सरकार की ओर से कोई पहल नहीं हुई.
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नीतीश कुमार ने बनाया था चुनावी एजेंडा
अब खबर है कि आंध्र के बाद बिहार में भी विशेष राज्य के मांग का मुद्दा गरमाने लगा है. नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू की ओर से भी यह मांग उठने लगी है. चूंकि पहले भी कई बार बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिये जाने की मांग केंद्र सरकार से की गई है. लेकिन आंध्र को नकारे जाने के बाद अब जेडीयू के पूर्व राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन वर्मा ने इस मांग को दोहराया है. एक न्यूज चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक, पवन वर्मा ने कहा है कि बिहार को विशष राज्य का दर्जा आखिर केंद्र सरकार क्यों नहीं दे रही है. साथ ही उन्होंने कहा कि इस बात को काफी पहले से नीतीश कुमार मांग उठाते आ रहे हैं. अब इस बात पर सभी ओर से यह सवाल उठने लगे हैं कि जिस तरह से विशेष राज्य के दर्जे को लेकर टीजीपी ने एनडीए से नाता तोड़ लिया. तो क्या कुछ ऐसा ही बिहार की राजनीति में भी देखने को मिल सकता है या फिर जो बीजेपी-जेडीयू के रिश्ते एक बार फिर से खटास आ सकती है.
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गौरतलब है कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिये जाने की मांग नीतीश कुमार काफी समय से उठाते रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने चुनाव प्रचार में भी इसे एक मुख्य एजेंडा बनाया था. उस वक्त नीतीश कुमार महागठबंधन में थे और जोर – शोर से इस मांग को उठा रहे थे. लेकिन अब उनकी पार्टी जेडीयू एनडीए में शामिल हैं और सत्ता पर काबिज हैं. इसलिए यह मांग थोड़ी धीमी पड़ गयी है. लेकिन इस बार विशेष दर्जे की मांग को लेकर फिर से दोहराने वाले पवन वर्मा का पार्टी में कोई खास महत्व नहीं है, क्योंकि नीतीश कुमार की बीजेपी से नजदीकियां बढ़ने के बाद पवन वर्मा ने बागी तेवर अपनाये हैं. वहीं खबर यह भी है कि अब जेडीयू पवन वर्मा को दोबारा राज्यसभा नहीं भेजेगी. लेकिन पवन वर्मा के मांग ने बिहार में सरकार को घेरने का विपक्ष को एक बड़ा मुद्दा दे दिया है.
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