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झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन का हाल-अंतिम: जिन्होंने ने की करोड़ों की वित्तीय गड़बड़ी, वही बैठे हैं जांच कराने वाली कुर्सी पर

आज जेएससीए की वित्तीय जानकारी शेयर करता हूं. झारखंड अलग राज्य बनने के बाद क्रिकेट संघ का गठन एवं पदाधिकारी बने रहने की लालसा अपने-आप में सवाल खड़ा करता है. क्या यह लड़ाई खेल को ऊंचाई देने के लिए है या खेलों के विकास के लिए मिलने वाले अपार धन की लालच और शोहरत के लिए. नीचे के तथ्य एेसे हैं, जो यह बताते हैं कि जेएससीए में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी की गयी है. जिसकी जांच कभी हुई ही नहीं. जांच का आदेश भी दिया गया. लेकिन जिन पर गड़बड़ी करने का आरोप है, वहीं जांच करने वाली कुर्सी पर बैठे हैं. इसलिए जांच नहीं हो रही.

सुनील सिंह

आज जेएससीए की वित्तीय जानकारी शेयर करता हूं. झारखंड अलग राज्य बनने के बाद क्रिकेट संघ का गठन एवं पदाधिकारी बने रहने की लालसा अपने-आप में सवाल खड़ा करता है. क्या यह लड़ाई खेल को ऊंचाई देने के लिए है या खेलों के विकास के लिए मिलने वाले अपार धन की लालच और शोहरत के लिए. नीचे के तथ्य एेसे हैं, जो यह बताते हैं कि जेएससीए में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी की गयी है. जिसकी जांच कभी हुई ही नहीं. जांच का आदेश भी दिया गया. लेकिन जिन पर गड़बड़ी करने का आरोप है, वहीं जांच करने वाली कुर्सी पर बैठे हैं. इसलिए जांच नहीं हो रही.

इन तथ्यों पर गौर करने से गड़बड़िया साफ नजर आती हैंः-

– जेएससीए बनने के बाद अब तक करीब 700 करोड़ रुपया ग्रांट के रुप में बीसीसीआई से मिला. वर्ष 2010 से 2015 तक 196.23 करोड़ रुपए मिले हैं. यह स्टेडियम निर्माण के लिए मिलने वाली राशि से अलग है. बीसीसीआई के तत्कालीन सचिव ने सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा में यही लिखा है.

– अब तक जेएससीए स्टेडियम में हुए एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच से प्राप्त आमदनी का ब्योरा देखने से पता चलता है कि मैच से कमाई कम होती गयी.

India vs England 19th January 2013—9.18 करोड़

India vs Australia 23rd October 2013— 4.45 करोड़

India vs Sri Lanka 16th November 2014—-2.89 करोड़

India vs Sri Lanka ODI&T20——-4.08 करोड़  

 

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– एच.ई.सी. को लीज एग्रीमेंट के तहत 5% नेट टिकट बिक्री का देना है. जिसका ब्योरा टिकट वाइज मांगने पर आज तक नहीं मिला. यह राशि सिर्फ अंतरराष्ट्रीय मैच के लिए है. जो राशि एच.ई.सी.को अब तक दी गई है, उसमें वर्ष 2012-13 में 25.57 लाख, वर्ष 2013-14 में 12.46 लाख और वर्ष 2014-15 में 15 लाख रुपया शामिल है.

– स्टेडियम के उदघाटन समारोह में होने वाला खर्च सिर्फ एक दिन 18 जनवरी 2013 का 65.48 लाख था. उस दिन फुड पर 77.58 लाख खर्च किया गया. इस तरह कुल खर्च 1.42 करोड़ हो जाता है. टेंडर किये बिना ही शकाहारी भोजन 1800 रुपये प्रति प्लेट की दर से खरीदा गया.

– Domestic cricket Tournament  का खर्च मात्र सालभर में एक से सवा करोड़ का होता है. अकाउंट 31 मार्च तक का होता है. लेकिन उस समय तक क्लीयर नहीं किया जाता. खर्च आगे Carry forward होता रहता है. 2014-15 में 8 जिला संघों के नाम एडवांस 26 लाख लिया गया, वहीं वर्ष 2015-16 में 6 जिला संघ के नाम 15 लाख रुपया एडवांस लिया गया. व्यक्तिगत सदस्यों एवं पदाधिकारियों को एडवांस के रुप में 9.35 लाख खर्च दिखाया गया. जबकि इस दौरान 17.68 लाख रुपया मिसलेनियस खर्च किया गया.

 

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– सत्र 2015-16 में आइपीएल मैच में सिर्फ टेंट का खर्च 20.29 लाख रुपया किया गया. टी-20 में 14.07 लाख रुपया खर्च किया गया. इसके बावजूद वर्मा टेंट हाउस का बकाया 4.60 लाख व 9.60 लाख दिखाया गया. वर्ष 2016 में एक बकाया बिल 49.75 लाख रुपया बालाजी टेन्ट को भुगतान किया गया. इस बिल का बकाया IPL 2014 का दिखाया गया है. इस भुगतान को छोड़कर अन्य बिल का भुगतान 2016 तक इस पार्टी को हुआ है. आश्चर्यजनक बात यह है की अकाउंट में कहीं भी लाईबलिटिज में नहीं दिखाया गया है. बिल चेक करके अग्रसारित करने वाले देवाशीष चक्रवर्ती हैं, जो उस समय सचिव भी नहीं थे.

– स्टेडियम निर्माण का अनुमानित लागत मूल्य (Civil and Structural work) 77,98,61,599.18 रुपया था. जिसमें Ms RKSCPL ने 5.47% below quote  करके 73,72,03,169.70 रूपये में काम लिया था.  31मार्च 2013 तक अकाउंट में 221 करोड़ रुपया खर्च दिखाया गया. इसके बाद Depreciation value घटना शुरू हो गया. आगे भी लगभग 50 करोड़ का काम किया गया है. इस कांट्रेक्ट का एग्रीमेंट 14 मई 2009 को हुआ और उसके पहले 9 मार्च 2009 को एक ही दिन बैंक गारंटी दिखाकर 68 करोड़ 41 लाख 11 हजार रुपए RTGS से ठेकेदार के अकाउंट में ट्रांसफर कर दिये गये. Mobilisation advance सिर्फ 10% ही दिया जाना चाहिए था, जो करीब 35 करोड़  रुपया होता है.

 

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– स्टेडियम में बनने वाले क्लब और कमरे के डिजाइनिंग के लिए 14 जुलाई 2013 के एनुअल रिपोर्ट में M/S Carving Dreams कंपनी की चर्चा की गई है. इस कंपनी ने क्या काम किया, कितना भुगतान हुआ, इसका जिक्र अकाउंट में नही है.  हां, किसी मनचंदानी नामक व्यक्ति की चर्चा जरुर है. जेएससीए के आजीवन सदस्य और तत्कालीन अध्यक्ष के स्कूल के दोस्त कृष्णा सिंह की कंपनी M/S Brevette Holding pvt Ltd Salkia, Howrah West Bengal  को भी करोड़ों का भुगतान हुआ है.

– कीनन जमशेदपुर और रांची के स्टेडियम में होने वाले मैच के खर्च की तुलना की जाये, तब बहुत बड़ा फर्क नजर आता है. व्यक्तिगत लाभ के लिए रांची में कंप्लीमेंटरी पास बहुतायत में बांटे जाते हैं. जिससे संघ को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है.

 

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– AGM, SGM एवं अन्य बैठकों में सालाना होने वाले खर्च Domestic cricket Tournament के फंड से बहुत ज्यादा होता है. पुराने स्टाफ के सैलरी, प्रोविडेंट फंड, इंश्योरेंस में समानता नहीं थी, जिस कारण सभी काम छोड़कर भाग गये. जो नये लोग नियुक्त किये गये, उन्हें सैलरी और सुविधा अच्छी मिल रही है. ज्यादातर लोग जेएससीए के आजीवन सदस्य हैं. जिन लोगों को स्टेडियम परिसर व्यवसायिक उपयोग के लिए दिया गया है, उन्हें एडवांस भी दिया जाता है.

– टिकट प्रिंटिंग हमेशा क्षमता से अधिक प्रिन्ट हुआ है, जिसमें एक जांच भी पेंडिंग है. सदस्यता का फीस जेएससीए का हो या कंट्री क्रिकेट क्लब का भारी अनियमितता है. बैठक AGM/SGM एक ही दिन बुलाये जाते हैं और समान उपस्थिति दिखाकर नियम संशोधित कर दिये जाते हैं. बैठक का मिनट्स बाद में लिखा जाता है. कभी-कभार तो मीटिंग के बाद घटने वाली घटना का भी मिनट्स में जिक्र रहता है.

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– झारखंड प्रीमियर लीग एक वर्ष के बाद बन्द कर दिया गया. फ्रेंचाइजी के  25 लाख रुपये आज भी वर्ष 2010 से वापस नही किये गये हैं. यह सुरक्षा राशि के तौर पर जमा कराये गये थे. टूर्नामेंट सात वर्षों से बन्द है अब क्लब की गतिविधि ज्यादा होता है.

International accounting and financial Firm DIOLLETE  ने संघ के वित्तीय व्यवस्था पर आपत्ति जतायी है. बीसीसीआई के तत्कालीन लोकायुक्त Retd.Judge Hon’ble Sri A.P. sah  ने हमारे Complain Application No.36/2016 में मामले की गंभीरता को समझते हुए बीसीसीआई को जांच के लिए लिखा है. लेकिन जिन पर जांच होना है वही पद पर विराजमान हैं.

नोटः लेखक झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन  के जिला संयोजक थे. वर्तमान में “सेव झारखंड स्पोर्ट्स” के संयोजक हैं और यह लेख  और इसके तथ्य उनके निजी  है. न्यूज विंग  इससे सहमत हो , यह जरुरी नहीं.

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