Satya Sharan Mishra
Ranchi, 17 August: मिशन 2019 को लेकर झारखंड के तमाम दलों ने अपनी तैयारी तेज कर दी है. पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा के बेहतर प्रदर्शन को देखकर विपक्षी पार्टियों ने यह मान लिया है कि भाजपा मजबूत स्थिति में है. भाजपा को कमजोर करने के लिए झारखंड में नया सियासी समीकरण बन रहा है. झाविमो, झामुमो, कांग्रेस और राजद समेत अन्य कई पार्टियां महागठबंधन करने को आतुर दिख रही है. विपक्षी पार्टियों के आला नेता एक दूसरे के संपर्क में हैं. भीतरखाने में महागठबंधन की रूपरेखा तैयार हो रही है. पार्टी के नेता भी महागठबंधन की संभावनाओं से इनकार नहीं कर रहे हैं, लेकिन कोई कुछ खुलकर बोलने को तैयार नहीं दिख रहा है. उधर महागठबंधन की कवायद के बीच थर्ड फ्रंट की भी तैयारी चल रही है. भाकपा, माकपा और मासस जैसी पार्टियों को एकसाथ लाने के लिए वाम दलों के राष्ट्रीय नेता पूरी कोशिश में लगे हैं.
हेमंत के लीडरशिप पर फंस सकता है पेंच
झारखंड की मुख्य विपक्षी पार्टी झामुमो इस महागठबंधन को लीड कर सकता है, जाहिर है कि जब झामुमो लीड करेगा तब हेमंत सोरेन महागठबंधन के सबसे बड़े नेता होंगे, लेकिन यह भी गौर करने वाली बात है कि पिछले विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की कवायद के वक्त लीडरशिप को लेकर ही सारी कोशिश बेकार हो गयी थी. इस बार हेमंत सोरेन की कांग्रेस की नजदीकियां काफी बढ़ी दिख रही है. राष्ट्रपति चुनाव के दौरान वे पूरी तरह से कांग्रेस के साथ नजर आये, यहां तक की उनके ही आवास पर यूपीए की बैठक हुई, लेकिन अहम बात यह थी कि उस बैठक में बाबूलाल मरांडी नहीं पहुंचे थे. जो सियासी समीकरण अभी दिख रहा है उससे तो यही लगता है कि भले ही कांग्रेस हेमंत सोरेन का नेतृत्व स्वीकार कर ले, लेकिन झाविमो को मनाना आसान नहीं होगा.
27 अगस्त को धुंधली तस्वीर होगी साफ
महागठबंधन की कोशिशों पर अंतिम मुहर पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं की सहमति के बाद ही लगेगा. विपक्षी महागठबंधन के पक्ष में सबसे ज्यादा मुखर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद हैं. यूपी चुनाव के पूर्व भी उन्होंने इसका प्रयास किया था. अब फिर उन्होंने महागठबंधन का राग छेड़ा है. 27 अगस्त को पटना में होने वाली राजद की रैली में शामिल होने के लिए उन्होंने बाबूलाल मरांडी और हेमंत सोरेन दोनों को आमंत्रण भेजा है. अगर ये दोनों नेता उस रैली में एक मंच पर नजर आते हैं तब महागठबंधन की धुंधली तस्वीर थोड़ी साफ हो सकती है.
जदयू-आजसू एनडीए फोल्डर में ही रहेंगे
यह तो साफ हो चुका है कि झारखंड की आजसू पार्टी और बिहार की मजबूत पार्टी जदयू एनडीए फोल्डर में ही रहेगी. आजसू पार्टी ने भी झारखंड में एनडीए गठबंधन का ही हिस्सा बने रहने का संकेत दे दिया है. विधानसभा चुनाव के वक्त सीटों के तालमेल में अगर बात नहीं बनी तभी वह कोई फैसला लेगी. उधर नीतीश कुमार ने बिहार में लालू यादव का साथ छोड़ बीजेपी साथ जाकर यह साफ कर दिया है कि जदयू भी एनडीए के साथ है.
समान विचारधारा वाली पार्टियां महागठबंधन में आएंः कांग्रेस
कांग्रेस ने महागठबंधन के संकेत दिये हैं. पार्टी के प्रदेश महासचिव लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि 2019 में भाजपा को रोकने के लिए महागठबंधन का प्रयास तो चल रहा है, लेकिन फिलहाल कांग्रेस का पूरा फोकस संगठन पर है. कांग्रेस का प्रयास यह होगा कि चुनाव में समान विचारधारा वाले वोट न बिखरे इसलिए समान विचारधारा की पार्टियां महागठबंधन का हिस्सा बने.
भाजपा विरोधी दलों को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की कोशिशः झाविमो
झाविमो के मीडिया प्रभारी तौहीद आलम ने कहा कि झारखंड में महागठबंधन की कवायद सबसे पहले झाविनो ने शुरू की थी. इस बार भी झाविमो की कोशिश है कि भाजपा विरोधी पार्टियों को एक प्लेटफार्म पर लाया जाये. उन्होंने कहा कि लालू ने 27 अगस्त की रैली में बाबूलाल और हेमंत को पटना बुलाया है. उस रैली में कुछ बात बन सकती है.
भाजपा का साथ नहीं छोड़ेंगेः आजसू
खबर आ रही थी कि सरकार की सहयोगी आजसू पार्टी भी महागठबंधन का हिस्सा होगी, लेकिन आजसू ने इसे खारिज कर दिया है. पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता डॉ देवशरण भगत ने कहा कि पार्टी के अपने नीति और सिद्धांत हैं. इन्हीं के तहत वो सरकार के कुछ फैसलों का विरोध करती है, लेकिन इससे यह नहीं समझा जाना चाहिए कि वो भाजपा के साथ नहीं है.




