
Pravin kumar
Ranchi : झारखंड कैबिनेट के द्वारा 6 मार्च को लिये गये फैसले के अनुसार आदिवासी गांवों के विकास के लिए आदिवासी विकास समिति का गठन किया जायेगा. इस समिति के अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष, सचिव आदिवासी होंगे. एससी-एसटी के जिन गांवों में अनुसूचित जनजाति की संख्या 50% से कम होगी, वहां की ग्राम विकास समिति में एसटी -एससी के दो-दो सदस्य होंगे. मुखिया को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया जायेगा. गैर अनुसूचित क्षेत्र में बीडीओ के नियंत्रण में इन समितियों का कार्य संचालित किया जायेगा, जबकि अनुसूचित क्षेत्र पंचायत स्वशासी परिषद को सोसाइटी एक्ट में निबंधन कर योजनाओं का वित्तीय कार्य संचालित किया जायेगा.
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आदिवासी विकास समिति के बारे में क्या कहते हैं स्टेन स्वामी
स्टेन स्वामी कहते हैं कि झारखंड सरकार पेसा अधिनियम 1996 को लागू नहीं करने की दोषी है. सरकार झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2001 की शर्तों को पूरा नहीं करना चाहती है. संविधान की चौथी अनुसूची अनुच्छेद 244 (1) के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में जनजाति सलाहकार परिषद की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. झारखंड सरकार आदिवासियों के जीवन के साथ विकास के नाम पर खेल कर रही है. आदिवासियों के विकास को लेकर सरकार के विचार सही नहीं हैं. पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में जनजाति सलाहकार परिषद और ग्राम सभाओं के परामर्श से ही सही विकास संभव है. रघुवर सरकार के द्वारा 32,000 गांवों में ग्राम विकास समिति की स्थापना की घोषणा आने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए की गयी है. सरकार की यह घोषणा गैर कानूनी है. इसे लेकर राज्य सरकार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए.
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क्या कहता है पेसा कानून
पेसा कानून के तहत ग्राम सभा विशेष शक्ति प्रदान करती है. पेसा कानून आदिवासी समुदाय को अपनी परंपरा, नेग-दस्तूर, रीति-रिवाजों एवं आदिवासियों की सांस्कृतिक पहचान बनाये रखने का अधिकार देता है. साथ ही समुदाय के संसाधनों पर भी ग्राम सभा का अधिकार सुनिश्रिचत करता है. साथ ही आदिवासी स्वशासन व्यवस्था एवं परंपरा के तहत गांवों के विवादों का निपटारा करने का अधिकार मिला हुआ है.
पेसा कानून के तहत ग्रामसभा को मिले संवैधानिक अधिकारों की झारखंड सरकार हमेशा की तरह अवहेलना करती रही है. आदिवासी विकास समिति का गठन कर पेसा कानून के साथ-साथ झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2001 और पांचवीं अनुसूची की विकास योजना को भी लागू करने में अवहेलना की जा रही है. राज्य सरकार का दायित्व होता है कि संविधान के अनुरूप विकास योजनाओं को पांचवीं अनुसूची के क्षेत्र में लागू करें, लेकिन न ही सरकार के द्वारा इस पर विचार किया जाता है और न ही अधिकारियों के द्वारा योजना निर्माण एवं संचालन में संवैधानिक प्रावधानों को समावेशित किया जा रहा है.
आदिवासी विकास समिति में की जा रही अनदेखी
ग्राम विकास समिति का गठन वैसे गांवों में करने की बात की गयी है, जहां 100 परिवारों से अधिक की बसाहट है. जबकि आदिवासी इलाकों में पेसा कानून के तहत राजस्व गांवों के अलग-अलग टोलों में अलग-अलग ग्राम सभा की मान्यता है. जिसे विकास समिति में अवहेलना दिखती है. पेसा में कहा गया है कि गांवों के सभी निवासी जो 18 वर्ष के उम्र के हैं, वह ग्राम सभा का सदस्य है. जबकि आदिवासी विकास समिति 11 या 9 सदस्यों के एक विशेष समूह के रूप में बनायी जानी है जो ग्रामसभा की भागीदारी को कमजोर करती दिखती है.
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ग्रामसभा को क्या अधिकार मिले हैं पेसा कानून एवं पांचवीं अनुसूची के तहत विकास योजनाओं के संचालन में
गांवों के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए योजनाओं, कार्यक्रमों और परियोजनाओं को मंजूरी देना जो योजनाएं गांवों के विकास के लिए स्थानीय स्तर पर आवश्यक है. गांवों के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को पहचान कर लाभार्थियों की पहचान करना. झारखंड सरकार के द्वारा 11लाख 65 हजार राशन कार्ड रद्द किये जाने के समय में इस संदर्भ में किसी भी ग्राम सभा को पूछा नहीं गया था और न ही वर्तमान समय में नये राशन कार्ड बनाने के लिए ग्राम सभा की स्वीकृति ली जा रही है. आदिवासी इलाके के विकास योजना सरकार के द्वारा अपने अनुरूप निर्धारित कर गांव स्तर पर सरकार थोपने का काम करा रही है. पेसा के तहत पंचायत को विकास योजनाओं के लिए धन की उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार है, लेकिन मनरेगा एवं 14वें वित्त आयोग द्वारा पंचायत को मिली विकास की राशि पंचायत से लेकर जिला प्रशासन तक बंदरबाट करने के प्रमाण राज्य में सामने आ चुके हैं. अधिकारियों के हस्तक्षेप से विकास योजना का निर्धारण जिले में ही किया जाता है.
पेसा उपायुक्त स्तर पर ग्राम सभा/पंचायतों जो शक्ति प्रदान करता है
भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और विस्थापित व्यक्तियों के पुनर्वास में अनिवार्य परामर्श का अधिकार, ग्राम सभा या पंचायत द्वारा खान और खनिजों के लिए संभावित लाइसेंस पट्टा, रियायतें देने के लिए अनिवार्य सिफारिशें करने का अधिकार, मादक द्रव्यों की बिक्री का अधिकार, भूमि हस्तांतरण को रोकना और हस्तांतरित भूमि की बहाली करने का अधिकार, गांवों के बाजारों का प्रबंधन, अनुसूचित जनजाति को दिये जाने वाले ऋण पर नियंत्रण के साथ ही सामाजिक क्षेत्र में कार्यकर्ताओं और संस्थानों, जनजातीय उप योजना और संसाधनों सहित स्थानीय योजनाओं पर नियंत्रण का अधिकार पंचायत एवं ग्रामसभा को मिला हुआ है.
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