
Ranchi : झाऱखंड भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल 2017 का पूरजोर तरीके से विरोध करते हुए आजूस पार्टी ने कहा है कि भूमि अधिग्रहण नीति में संशोधन झारखंड की जनभावनाओं के विरुद्द में उठाया गया कदम है. सरकार को चाहिए कि वह इस विषय पर सर्वदलीय व सामाजिक संगठनों के साथ बैठक कर इस संशोधन की पुनर्समीक्षा करें.
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कानून में संशोधन से पड़ेगा दूरगामी प्रभाव : देवशरण भगत
पार्टी के केंद्रीय मुख्य प्रवक्ता डॉ देवशरण भगत ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कहा है कि पहले भी केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने इस नीति का समर्थन नहीं किया है. कारण यह है कि इस नीति से कृषि योग्य भूमि में कमी आएगी. साथ ही कृषि योग्य भूमि का गैर भूमि उपयोग के लिए हस्तांतरण तेजी से होने लगेगा. इस कारण अगर कानून में किसी भी तरह का कोई संशोधन किया जाता है तो झारखंड में इसका दूरगामी प्रभाव पड़ेगा.
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भूमि अधिग्रहण बिल में हेमंत को बोलने का कोई हक नहीं : राजेंद्र मेहता
पार्टी के नेता राजेंद्र मेहता ने जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष हेंमत सोरेन पर निशाना साधते हुए कहा कि उसे सीएनटी/एसपीटी एक्ट, स्थानीय नीति व भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक पर बोलने का कोई हक नहीं है. हेंमत को पहले यह स्पष्ट कर देना चाहिए कि क्या वर्ष 2010 में सीएनटी/एसपीटी एक्ट में हुए संशोधन के प्रस्ताव को उसने सहमति प्रदान किया था? साथ ही यह भी बताना चाहिए कि अपने 14 महीने के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान उसने स्थानीय नीति को आखिर क्यों नहीं बनाया था. सीएम रघुवर दास पर निशाना साधते हुए राजेंद्र मेहता ने कहा कि अगर सीएनटी/एसपीटी एक्ट, स्थानीय नीति पर राज्य की रघुवर सरकार बैकफुट पर आई थी तो उसका कारण आजसू पार्टी द्वारा किया गया पूरजोर विरोध व आंदोलन है. भूमि संशोधन विधेयक पर हो रही किसी भी बदलाव का आजसू पार्टी हमेशा विरोध किया है और करती रहेगी.
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