
Ranchi: चारा घोटाला मामले में देवघर कोषागार से 89.27 लाख की अवैध निकासी के मामले में दोषी आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की सजा पर सस्पेंस आखिरकार खत्म हो गया. सीबीआई की विशेष कोर्ट उन्हें साढ़े तीन साल की सजा सुनायी है, साथ ही 5 लाख का जुर्माना लगाया गया है. 6 महीने की सजा ज्यादा होने के कारण उन्हें अब प्रोविजनल बेल नहीं मिल पायेगा. अगर तीन साल की सजा होती तो लालू को प्रोविजनल बेल मिल सकता था, लेकिन 6 महीना अतिरिक्त सजा होने के कारण उन्हें ज्यादा दिनों तक जेल में रहना होगा और बेल के लिए हाईकोर्ट मूव करना होगा. सीबीआई स्पेशल कोर्ट के जज शिवपाल सिंह ने होटवार जेल में बंद लालू और अन्य दोषियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सजा सुनायी. दोपहर दो बजे से कोर्ट की कार्यवाही शुरू हुई जिसमें सभी दोषियों की सजा पर सुनवाई हुई और फिर जज ने शाम चार बजे सजा सुनाने की बात कही. लालू यादव के साथ-साथ जगदीश शर्मा को 7 साल की सजा और 10 लाख जुर्माना, सुनील गांधी, त्रिपुरारी प्रसाद और गोपी नाथ झा को 7 साल की सजा और 10 लाख जुर्माना लगाया गया है. वहीं अन्य दोषियों को साढ़े तीन साल की सजा और 5 लाख जुर्माना लगाया गया है.
गौरतलब है कि 23 दिसंबर को देवघर कोषागार से अवैध निकासी के मामले में दोषी ठहराए गए लालू यादव और अन्य दोषियों की सजा का ऐलान 3 जनवरी को होना था, लेकिन अल्फाबेट के चक्कर में लालू की सजा पर फैसला टलता रहा. इससे पहले शुक्रवार को भी होटवार जेल में बंद लालू यादव की वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के जरिये पेशी हुई थी. जिसमें कोर्ट ने लालू यादव समेत पांच अन्य आरोपियों की सजा की बिंदुओं पर सुनवाई पूरी कर ली. जज शिवपाल सिंह की अदालत शुक्रवार को लालू प्रसाद, पूर्व विधायक डॉ आरके राणा, तत्कालीन वित्त आयुक्त फूलचंद सिंह, तत्कालीन सचिव महेश प्रसाद, आपूर्तिकर्ता राजा राम जोशी की सजा के बिंदुओं पर सुनवाई पूरी की थी. शनिवार को 2 बजे कोर्ट की कार्यवाही शुरू होने के बाद सिर्फ आधे घंटे के अंदर बाकी आरोपियों की सजा पर सुनवाई हुई.
किसे मिली कितनी सजा और जुर्माना
नाम सजा जुर्माना
लालू यादव 3.5 साल 5 लाख
आरके राणा 3.5 साल 5 लाख
सुनील गांधी 7 साल 10 लाख
टीएम प्रसाद 7 साल 10 लाख
गोपीनाथ झा 7 साल 10 लाख
सुबिर भट्टाचार्य 3.5 साल 5 लाख
फूलचंद सिंह 3.5 साल 5 लाख
महेश प्रसाद 3.5 साल 5 लाख
बेग जूलियस 3.5 साल 5 लाख

राबड़ी ने बुलायी आपात बैठक, बनी रणनीति
उधर, लालू की सजा को लेकर आरजेडी में शनिवार सुबह से ही हलचल तेज रही. लालू को ज्यादा वक्त जेल में बिताना पड़ा तो पार्टी की रणनीति क्या होगी, इसके लिए तैयारी चल रही है. बिहार की पूर्व सीएम और लालू की पत्नी राबड़ी यादव ने अपने आवास पर पार्टी की भावी रणनीति तैयार करने के लिए बैठक बुलायी. बैठक में लालू के दोनों बेटे तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव, रघुवंश प्रसाद सिंह समेत लालू के कई करीबी शामिल हुए. बैठक में लालू यादव की चिट्ठी पढ़कर सुनायी गयी और चिट्ठी बांटी भी गयी. वहीं बैठक के बाद रघुवंश प्रसाद सिंह ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान नेतृत्व के सवाल पर इशारों-इशारों में ही सबकुछ साफ कर दिया. उन्होंने कहा कि नेता चुना हुआ है. जो विपक्ष का नेता है वही राजद का नेतृत्व करेगा. उनका इशारा साफ-साफ तेजस्वी यादव की ओर है. वहीं उन्होंने यह भी कहा कि बैठक में यह तय किया गया है कि 2018 राजद के लिए राष्ट्रव्यारी आंदोलन का साल होगा. कोर्ट में भी लड़ाई जारी रहेगी और जनता के बीच भी लड़ाई जारी रहेगी. इस समय पूरा राजद परिवार लालू परिवार के साथ खड़ा है.
दूसरे दलों की भी नजर लालू की सजा पर
लालू प्रसाद यादव पिछले 3 दशकों से बिहार की सियासत की धुरी बने हुए हैं. इस दौरान बिहार की राजनीति उनके इर्द-गिर्द ही घूमती रही है. यही वजह है कि उनकी सजा पर सिर्फ राजद की ही नजर नहीं है. कांग्रेस जैसी सहयोगी पार्टियां और भाजपा-जेडीयू जैसे विरोध दल भी उनकी सजा पर नजर बनाये हुए हैं. अब लालू की सजा के बाद सभी दल राजनीतिक नफा-नुकसान के आकलन में जुट गये हैं. बीजेपी ने रविवार को कोर कमेटी की बैठक बुलाई है, वहीं कांग्रेस भी लाभ-हानि का समीकरण बना रही है.

शनि का कोपभाजन बने लालू
ज्योतिष के मुताबिक लालू यादव पर शनि भारी है. जरा देखिये लालू किस तरह शनि का कोपभाजन बने हैं. तीन जनवरी को सजा का दिन मुकर्रर था, लेकिन सजा सुनायी गयी 6 जनवरी यानी शनिवार के दिन. बता दें कि लालू यादव कि राशि कुम्भ और लग्न सिंह है. इनका स्वग्रही भाग्येश मंगल जहां इन्हें भाग्य का बलि बना रहा है वहीं, कर्म में राहू कि उपस्थिति इन्हें राजनीति का बड़ा खिलाड़ी बना रही है. दसवें भाव में सूर्य कि उपस्थिति जहां इन्हें कुल दीपक योग प्रदान करके इन्हें अपनें कुल का सिरमौर बना रही है, वहीं साथ में शुक्र कि मौजूदगी एक उत्तम योग निर्मित कर रही है, लेकिन छठें भाव का मालिक शनि की व्यय भाव में उपस्थिति शनि की दशा में इनके लिए कष्टकारी बन रही है. इस समय लालू यादव कर्मेश व पराक्रमेश शुक्र की महादशा में राहू की अन्तर्दशा और शुक्र की प्रत्यंतर दशा भोग रहे हैं. केतु की पूर्ण दृष्टि सूर्य पर है. एक फरवरी 2018 को जब सूर्य का प्रत्यंतर शुरू होगा, कठिन परिस्थितियों को जन्म देगा. कानूनी प्रपंच जटिल होगा. यह स्थिति लालू यादव की सेहत और जीवन के लिए तनाव का सृजन कर रही है.
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चारा घोटालाः जानिये कब क्या हुआ
चारा घोटाला स्वतन्त्र भारत का सबसे बड़ा घोटाला था, जिसमें पशुओं को खिलाये जाने वाले चारे के नाम पर 950 करोड़ रुपये सरकारी खजाने से फर्जीवाड़ा करके निकाल लिये गये थे. सरकारी खजाने की इस चोरी में अन्य कई लोगों के अलावा बिहार के तत्कालीन मुख्यमन्त्री लालू यादव और पूर्व मुख्यमन्त्री जगन्नाथ मिश्र पर भी आरोप लगा था.

जनवरी 1996 : 27 जनवरी 1996 को चाईबासा में पशुधन विभाग पर मारे गए एक छापे के बाद चारा घोटाले मामला सबसे पहले सामने आया. तात्कालीन डीसी अमित खरे ने छापा मारकर पूरे मामले का खुलासा किया.
मार्च 1996 : पटना हाईकोर्ट ने 11 मार्च 1996 को चारा घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया.
मार्च 1996 : 27 मार्च 1996 को सीबीआई ने चारा घोटाला मामले में एफआईआर दर्ज किया.
मई 1997 : 10 मई 1997 को सीबीआई ने तात्कालीन राज्यपाल से लालू के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी.
जून 1997 : 17 जून 1997 को राज्यपाल ने लालू समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी.
जून 1997 : 23 जून 1997 को लालू और अन्य 55 लोगों के खिलाफ सीबीआई ने आरोपपत्र दाखिल किया.
जुलाई 1997 : 30 जुलाई 1997 को लालू ने सीबीआई कोर्ट के सामने सरेंडर कर दिया.
अक्टूबर 2001 : झारखंड के नए राज्य बनने पर 5 अक्टूबर 2001 को सुप्रीम कोर्ट ने केस झारखंड ट्रांसफर कर दिया.
फरवरी 2002 : रांची में सीबीआई की स्पेशल अदालत में ट्रायल शुरू किया गया.
जून 2007 : लालू प्रसाद के भतीजे समेत 58 अभियुक्तों को दोषी ठहराया गया और उन्हें पांच से छह साल की सज़ा सुनाई गई.
मार्च 2012 : सीबीआई अदालत ने पूर्व लालू प्रसाद, जगन्नाथ मिश्रा और जगदीश शर्मा समेत 31 लोगों के खिलाफ फर्जी बिलों के सहारे बांका और भागलपुर कोषागार से 47 लाख रुपये निकालने के मामले में आरोप तय कर दिया.
अगस्त 2013 : 13 अगस्त 2013 को लालू के ट्रायल कोर्ट के जज को ट्रांसफर करने की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने रिजेक्ट कर दिया.
सितंबर 2013 : 17 सितंबर 2013 को विशेष सीबीआई अदालत ने चारा घोटाला मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.
सितंबर 2013 : 30 सितंबर 2013 को अदालत ने चारा घोटाले में फैसला सुनाया. लालू और जगन्नाथ मिश्र समेत 45 लोगों को दोषी करार दिया गया.
नवंबर 2014 : सीबीआई ने झारखंड हाइकोर्ट से उस आदेश को चैलेंज किया, जिसमें उसने चारा घोटाला में पेंडिंग चार अन्य केस को खारिज कर दिया था. कोर्ट का कहना था कि एक ही केस और इविडेंस के आधार पर आगे केस नहीं चलाया जा सकता है.
मई 2017 : सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की अपील को मंजूर करने के साथ लालू प्रसाद के खिलाफ चारा घोटाले से संबंधित अलग-अलग मामलों में मुकदमा चलाने का आदेश दिया.
दिसंबर 2017 : 13 दिसंबर 2017 को सीबीआई कोर्ट में बहस पूरी हुई.
दिसंबर 2017 : 27 दिसंबर 2017 को सीबीआई की विशेष अदालत चारा घोटाला मामले में लालू यादव को दोषी करार दिया. वहीं, जगन्नाथ मिश्र सहित 7 बरी हो गए.
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