News Wing
Jamtara, 05 October: जामताड़ा जिले के करमाटांड प्रखंड के पांच सौ बीपीएल महिलाओं को दुधारू मवेशी अनुदान की दर पर मिलने की सपना धरा ही रह गया. 2016-17 में ही गव्य विकास विभाग द्वारा करमाटांड प्रखंड से कुल 905 बीपीएल महिलाओं को अनुदान की दर देने के लिए आवेदन लिया था, लेकिन दो वर्ष बाद भी करमाटांड के एक भी बीपीएल महिला के आवेदन के स्वीकृति नहीं दिया गया और न ही दुधारू मवेशी का वितरण किया गया. सरकार द्वारा अनुदान में दो दुधारू मवेशी मिलने की योजना से बीपीएल महिलाओं में रोजगार की आस जगी थी, लेकिन सरकार के रोज बदलते नियमों में लाभुको के सपनों में पानी फेर दिया.
सालभर पहले हुआ सर्वे, अब फाइलों में लटकी प्रक्रिया
करमाटांड प्रखंड में मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट नहीं लगने के कारण बीपीएल महिलाओं को दुधारू मवेशी नहीं मिले हैं. सरकार का नियम है जिस क्षेत्र में गव्य विकास विभाग द्वारा दुधारू मवेशी का वितरण किया जायेगा. उस क्षेत्र में एक मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट लगना अनिवार्य है. विभाग व झारखंड सरकार मिल्क फेडरेशन कंपनी ने संयुक्त रूप से मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट के लिए सर्वेक्षण पिछले वर्ष ही किया है, इसके बावजूद आगे का कार्य फाइलों में अटक कर रह गया है.
करमाटांड से दूध उठाव के लिए बनाया गया मिल्क रूट
करमाटांड प्रखंड में बीपीएल धारी को दिये जाने वाले दुधारू मवेशी का दूध देवघर डेयरी से उठाव किया जायेगा. इसके लिए झारखंड मिल्क फेडरेशन कंपनी के द्वारा मिल्क रूट भी बनाया गया है. देवघर से करमाटांड प्रोसेसिंग प्लांट आने के लिए सारवा, सबेजोर, सारठ, नारंगी मोड़ तक पूर्व में कंपनी द्वारा मिल्क रूट बनाया जा चुका है. देवघर जिला से नारंगी मोड़ की दूरी महज 19 किलोमीटर है. इसके लिए झारखंड मिल्क फेडरेशन कंपनी नारंगी मोड़ से जामताड़ा जिला के करमाटांड प्रखंड को जोड़ा गया है. ताकि यहां से दुध का उठाव आसानी से कर सके.
प्रोसेसिंग प्लांट बनते ही होगा मवेशियों का वितरणः विभाग
जिला गव्य पदाधिकारी का कहना है कि करमाटांड प्रखंड में बीपीएल धारी महिलाओं को दुधारू मवेशी वितरण के लिए आवेदन लिया जा चुका है. करमाटांड में मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट की स्वीकृति के लिए निदेशक को पत्र दिया गया है. प्रोसेसिंग प्लांट बनते ही बीपीएल धारी का दुधारू मवेशी का वितरण की जायेगी. संजीव रंजन जिला गव्य विकास पदाधिकारी जामताड़ा.




