
New Delhi : डॉक्टर भगवान के रुप हैं. अस्पताल, जांच घर, दवा दुकानदार हमारे भले के लिए उस भगवान को सहयोग करते हैं. ताकि हमारी जिंदगी बच सके. पर, यह धारणा अब टूट रहा है. प्राइवेट अस्पताल लोगों को लूट रहें हैं. बीमार लोगों के परिजनों की मजबूरी का फायदा उठा रहें हैं. कमजोर व गरीब लोगों का इलाज मुश्किल होता जा रहा है. इलाज महंगा होता जा रहा है. डॉक्टर, जांच घर और दवा दुकानदार भारी मुनाफा कमा रहे हैं. इन बातों की जानकारी सभी को है. पर कम ही लोग जानते हैं कि डॉक्टर, अस्पताल, जांच घर और दवा दुकानदार कितना मुनाफा कमा रहे हैं. आप भी जान लें वे धरती का भगवान बनने के लिए 1200 प्रतिशत तक का मुनाफा कमा रहे हैं.
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दवाई व जांच पर कुल खर्च का 46 प्रतिशत खर्च
इसका खुलासा नैशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPAA) ने मंगलवार को एक रिपोर्ट जारी कर किया है. एनपीएए ने दिल्ली और उसके आसपास के इलके में स्थित चार बड़े प्राइवेट अस्पतालों के बिलों की जांच की है. जांच में यह तथ्य सामने आया है कि अस्पताल जांच और दवाओं में 1200 प्रतिशत तक का मुनाफा कमा रहे हैं. एनपीएए की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि अस्पतालों में भर्ती होने वाले नरीजों का जो कुल बिल बनता है, उसमें से 46 प्रतिशत खर्च दवाई और जांच पर होता है.

दवाई कंपनी को कम, अस्पतालों को ज्यादा फायदा
रिपोर्ट में कहा गया है कि ज्यादा फायदा दवाई बनाने वालों का नहीं बल्कि अस्पतालों का ही होता है. NPAA के मुताबिक, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि प्राइवेट हॉस्पिटल्स अपने आप से कहकर दवाईयों पर ज्यादा रेट प्रिंट करवाते हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हॉस्पिटल्स ज्यादातर ऐसी दवाइयां लिखते हैं जो कि उनकी खुद की या पहचान वाली फार्मेसियों द्वारा ही बनाई जाती है. ऐसे में मरीज और उसका परिवार वे दवाइयां कहीं और से नहीं ले पाते. हॉस्पिटल्स फार्मेसियों पर दबाव भी बनाते हैं कि वे अपनी दवाओं पर असल कीमत से ज्यादा की एमआरपी लिखें. तब ही वे बहुत सारी दवाओं का स्टॉक खरीदते हैं.
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5.77 रुपये की दवा 106 रुपये में
नव भारत टाईम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि NPAA ने यह जांच इसलिए की क्योंकि पिछले दिनों प्राइवेट अस्पताल पर कई बार ज्यादा बिल वसूलने के आरोप लगे. रिपोर्ट में बताया गया है कि कोई सूई अगर अस्पताल को 5.77 रुपए की पड़ रही होती है तो उसे हॉस्पिटल मरीज को 106 रुपए में देता है. इससे उसका मुनाफा 1,737 प्रतिशत तक का हो जाता है. ऐसे कई उदाहरण नीचे दिए गए हैं.
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