
आधी हो जाएगी सुरक्षाकर्मियों की संख्या
दोगुने पैसे होंगे खर्च
वर्तमान सुरक्षाकर्मियों को नहीं हो पता नियमित भुगतान
Ranchi : राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स की व्यवस्था जब 408 सुरक्षाकर्मियों से नहीं संभल पा रही है तो सैप के 200 जवान रिम्स की व्यवस्था को कैसे संभाल पाएंगे. सैप के जवानों को वर्तमान में रिम्स की सुरक्षा की जिम्मेवारी संभालने का दायित्व सौंपा गया है. हाल ही में रिम्स में हुए हड़ताल के बाद नर्सों और जूनियर डॉक्टरों के शिकायत के बाद रिम्स प्रबंधन ने नेशनल एवरेस्ट ह्यूमन रिसोर्स कंसल्टेंट से रिम्स की सुरक्षा का जिम्मा वापस लेकर सैप के जवानों को सौंपने का फैसला लिया है. जिसमें वर्तमान में सुरक्षा पर आ रहे खर्च से कई गुना ज्यादा खर्च करना पड़ेगा और सुरक्षाकर्मियों की संख्या आधी हो जाएगी. वर्तमान में कार्यरत सुरक्षा कर्मी सुरक्षा के अलावा कई अन्य तरह की कमियों को पूरा करने की जिम्मेवारी भी उठाते हैं
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नियमित भुगतान के बाद बेहतर सेवा देंगे सुरक्षाकर्मी
सैप के जवानों को सुरक्षाकर्मियों से कई गुना अधिक वेतन दिए जाने की चर्चा है. वहीं रिम्स प्रबंधन यदि वर्तमान में कार्यरत सुरक्षाकर्मियों का वेतन भुगतान नियमित करा दें और इन सुरक्षाकर्मियों के वेतन में थोड़ी वृद्धि करा दी जाए तो उम्मीद है कि बेहतर ड्यूटी निभाने में सक्षम होंगे मौजूदा सुरक्षाकर्मी.
कार्यालय संबंधित कामों में भी करते हैं मदद
रिम्स के सुरक्षाकर्मियों से विभिन्न विभागों के डॉक्टर से लेकर पदाधिकारी तक कार्यालय के छोटे-मोटे के काम करा लेते हैं. लेकिन क्या सैप के जवान अधिकारियों और डॉक्टरों के किसी भी तरह के निजी कार्य में सहयोग करेंगे! वहीं रिम्स प्रबंधन को सैप जवानों को वर्तमान में सुरक्षाकर्मियों को दिए जा रहे वेतन से कई गुना ज्यादा पैसे का भुगतान भी करना पड़ेगा.
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ट्रॉली मैन सहित 408 सुरक्षाकर्मी तीन पालियों में करते हैं ड्यूटी
वहीं एक सवाल यह भी उठता है कि जब ट्रॉली मैन सहित 408 सुरक्षाकर्मियों को विभिन्न विभागों में तीन पालियों में ड्यूटी देने के बाद भी जब अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था ठीक नहीं हो पा रही है तो इसकी क्या गारंटी है कि 200 सैप के जवान रिम्स की सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद कर पाएंगे.
मरीजों की भी करते हैं सहयोग सुरक्षाकर्मी
रिम्स में आने वाले मरीजों को इलाज में होने वाली परेशानी की शिकायत जब अधिकारियों के पास पहुंचती है तो कई बार संबंधित विभाग के अधिकारी सुरक्षाकर्मियों के साथ पीड़ित व्यक्ति को भेजकर उनकी समस्या का समाधान कराते हैं. रिम्स के सुरक्षाकर्मी भी दूर-दराज से आने वाले मरीजों की बढ़-चढ़कर सेवा करने से पीछे नहीं हटते. लेकिन क्या सैप के जवान अपनी ड्यूटी छोड़कर किसी मरीज के साथ संबंधित विभाग में जाकर उनकी समस्या का निदान करने में सहयोग प्रदान कर पाएंगे यह रिम्स प्रबंधन के लिए विचारणीय है.
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