झामुमो के पूर्व गुआ अध्यक्ष अयोध्या प्रसाद ने बताया कि वर्तमान में राज्य में उनकी पार्टी की अपनी खास पहचान है। वर्ष 1991 तक झामुमो की अपनी कोई पहचान नहीं थी। उस समय कृष्णा मार्ड़ी पश्चिम सिंहभूम के सांसद थे जो (वर्तमान में कांग्रेस नेता) जिन्होंने गुआ में झामुमो कार्यकर्ताओं की एक समिति बनायी थी। कार्यकर्ता के सकारात्मक प्रयास से पार्टी की पहचान गांव-गांव में बननी शुरू हो गयी। बाद में वर्ष 1980 में गुआ गोली कांड में शहीद हुए की शहीदों की याद में गुआ में शहीद स्थल बनाने का निर्णय लिया गया।
अयोध्या प्रसादके अनुसार पूर्व सांसद कृष्णा माड़ी शुरू से ही सतत प्रयासरत थे कि गुआ में शहीद स्थल बने। जबकि प्रशासन का विरोध करता था। खास तौर पर पश्चिम सिंहभूम चाईबासा सदर के एस.ड़ी.ओ. विजय कपूर शहीद स्थल के निमार्ण का विरोध कर रहे थे। अंतत: गुआ में रातों रात शहीद स्थल बनाया गया। इस निमार्ण कार्य में सुभाष प्रुष्टि, गोपाल गुप्ता उर्फ बबलू, कैलाश ओझा व अन्य का उल्लेखनीय योगदान रहा है। अयोध्यां बताते हैं कि बावजूद इसके, आजकल पुराने कार्यकर्ता की कोई पूछ नहीं है। झामुमो पार्टी चापलूसों की पार्टी बन गयी है। झामुमो पार्टी धीरे धीरे अपने पुराने कर्मठ कार्यकर्ताओं को भूला रहीं है।
अयोध्याप प्रसाद मानते हैं कि आज 1980 गुआ गोली कांड का झारखण्ड़ राज्य के इतिहास में शहीदों के नाम एक ऐतिहासिक महत्व रखता है। आज अगर गुआ में पूर्व सांसद कृष्णा माड़ी के दिशा निर्देशन में शहीद स्थल नहीं बना होता तो क्या शहीदों के आश्रितों को नौकरी मिल पाती?
— श्रवण पाण्डेय




