Vikash kumar mishra
Giridih, 16October: करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का नया भवन सरिया वासियों को 9 साल बीत जाने के बाद भी मयस्सर नहीं हो सका है. बड़े ही तामझाम से वर्ष 2008 में गिरिडीह के सरिया प्रखंड मुख्यालय में स्वास्थ्य एवम परिवार कल्याण विभाग की ओर से, तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री भानू प्रताप शाही के हाथों प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की आधारशिला रखी गई थी.
जुआरियों और नशेड़ियों का अड्डा बना भवन
शिलान्यास के बाद झटपट भवन निर्माण का काम शुरू हुआ, तो लोगों की उम्मीदें जगी उठीं कि नया भवन बनेगा और स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ेंगी. लेकिन ठेकेदारी वर्चस्व की लड़ाई और घटिया निर्माण जांच के बाद आधे-अधूरे भवन का निर्माण अधर में लटक गया और लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया. आज 9 साल गुजर जाने के बाद भी इस भवन की कोई सूध लेने वाला नहीं है. इस बीच कई सत्ता बदली, सत्ताधारी बदले, लेकिन नहीं बदली, तो इस भवन की सूरत. वक्त के थपेडों को झेलते हुऐ इस भवन की दशा खस्ताहाल हो चुकी है. वहीं उदाडॉगर हाल में फिलवक्त यह भवन जुआरियों और नशेड़ियों का अड्डा बना हुआ है.
सरकार की मंशा पर सवालिया निशान
इस अधूरे अर्धनिर्मित भवन के बाबत जिला परिषद सदस्य सह आजसू नेता अनूप पांडेय ने बताया कि भवन का अग्रीमेंट तो जेई के नाम था लेकिन तत्कालीन विधायक के तथाकथित नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दबंगई से काम को अपने अंदर लेकर काम की शुरुआत की, मगर घटिया निर्माण होने पर मंत्री तक शिकायत पहुंची और मंत्री ने स्वयं जांच कर काम रुकवा दिया. जो आजतक पुनः शुरू नहीं हो सका. वहीं उन्होंने बताया कि इस मामले पर जेई राजेन्द्र कुमार पर कार्रवाई नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है. इस क्षेत्र की जनता सरकार की मंशा पर सवालिया निशान खड़ी कर रही है.
निराशावादी रवैया और ठेकेदारी लड़ाई की वजह से नहीं हो पाया निर्माण
इधर क्षेत्र के प्रमुख रामपति प्रसाद वर्मा इस मामले पर कहते हैं कि 2008 में भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन निराशावादी रवैया और ठेकेदारी की लड़ाई के कारण भवन निर्माण नहीं हो पाया. चुनाव जीतने के बाद से ही लगातार भवन निर्माण की मांग वो हर मीटिंग में उठाते आये हैं और इसको लेकर 1करोड़ 23 लाख का संशोधित बिल प्राकलन भी बना है. लेकिन काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया है. उन्होंने बताया कि सरकारी पदाधिकारी की लापरवाही और जिम्मेवार जनप्रतिनिधि नहीं होने के कारण भी ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है. कहा कि लगातार प्रयास में लगे हैं, आशा है जल्द ही निर्माण कार्य शुरू हो जायेगा.
आखिर कब तैयार होगा अधूरा भवन
बहरहाल, अब मामला चाहे जो भी हो लेकिन 9 साल बीतने के बाद भी अधूरा भवन निर्माण अपने आप में कई सवालों को जन्म दे रहा है. इस प्रकरण ने सरकार व स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कलई भी खोल कर रख दी है. ऐसे में देखना यह है कि आखिर कब इस अधूरे भवन के दिन बहुरेंगे और कब सरिया प्रखण्ड वासियों की उम्मीदें मुस्कुराएंगी.




