
Pravin Kumar
Khunti: इन इलाकों को बीहड़ कह सकते हैं. बमुश्किल तीन किमी के इलाके में 75-100 घर. छोटी-छोटी बस्तियां. सन्नाटा यहां की हमेशा से पहचान रही है. घटना के दिन नुक्कड़ नाटक करते वक्त निश्चित ही दूर-दूर तक नाटक करने वालों की आवाज गूंज रही होगी. महिलाओं के साथ दुष्कर्म हुआ या नहीं, अगर हुआ तो किसने किया, इन सवालों के जवाब पूरी सच्चाई जानने के बाद ही मिल सकेंगे.
लेकिन उस दिन जो हुआ. जिसके सामने हुआ, वो क्या कहते हैं ? यहां यह बताना जरूरी है कि इन ईलाकों में किसी भी बाहरी शख्स के साथ कुछ भी गलत हो सकता है, क्योंकि अव्वल तो मदद के लिए पुलिस पहुंच नहीं सकती और पहुंचेगी भी तो प्रशासन को अपनी जान पर खेलना होगा. यहां ये भी बता दें कि कुछ दिनों पहले कुरुंगा में ही पुलिस जवानों को बंधक बनाया गया था. इन खतरों के बावजूद न्यूज विंग ने इन बीहड़ इलाकों में जा कर सच जानने की कोशिश की. क्योंकि सवाल बेटियों की आबरु का है. कोई कयासबाजी नहीं, बल्कि आंखों-देखी बात, आपके सामने रखी जा रही है.
स्कूल के सहायक शिक्षक दिलबर सोय की जबानी उस दिन की कहानी
दिलबर सोय, स्टॉकमैन मेमोरियल मिडिल स्कूल की शिक्षका हैं. उन्होने न्यूज विंग को बताया कि स्कूल मे 19 जून को मानव तस्करी को लेकर नुक्कड़ नाटक चल रहा था. नुक्कड़ नाटक की मंडली में कुल 11 लोगों की टीम थी. मंचन के दौरान ही स्कूल के उत्तर दिशा की ओर से लोग आए, उन्होने अपनी गाड़ी खड़ी की. वहां पहुंच कर सबसे पहले वे लोग नुक्कड़ टीम के हेड को बुलाकर बात किये, उसके बाद नुक्कड़ बंद करा कर सभी लोगों को अपने पास बुलाकर बात किया. हमलोग दूर खड़े थे, हमें नहीं पता कि उनलोगों के बीच क्या बात हुई. पर जब उन्हें गाड़ी में बिठाकर ले जाया जाने लगा तब फादर ने उनलोगों को ये कहते हुए रोका कि आप स्कूल कैंपस से किसी को नहीं ले जा सकते. पर वे नहीं माने. टीम के साथ ही दो सिस्टर भी थीं. जो लोग बाइक से आए थे, उन्होंने अपने साथ सिस्टर को ले जाने से मना किया. उन्होने कहा, आप लोग यहीं रुकिये, हमलोग इनको लेकर आते हैं. नुक्कड़ टीम को अपने साथ ले जाने वाले युवकों को इस क्षेत्र में पहले हमलोगों ने कभी नही देखा था.
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क्या कहना है स्कूल की सहायक शिक्षिका दसकी हसापूर्ती का
दसकी हसापूर्ती, स्टॉकमैन मेमोरियल मिडिल स्कूल की सहायक शिक्षिका (प्रत्यक्षदर्शी) हैं. वे घटना के वक्त वहां मौजूद थीं. दसकी हसापूर्ती के अनुसार जब स्कूल से नाटक करने आयी युवतियों को ले जाया जा रहा था तो वो वहीं मौजूद थीं. दो मोटरसाइकिल से पांच युवक आये थे. गाड़ी लेकर आए युवकों ने नुक्कड़ नाटक करने वालों से बात की. फिर वे उन्हे गाड़ी में बिठाकर ले गये. उसके बाद युवकों ने उन्हें शाम के छह बजे वापस छोड़ दिया. वो जिस अवस्था में वहां से गईं थीं, उसी हाल में वापस भी आयीं. उन्होंने उनके साथ दुष्कर्म होने संबंधी कोई भी जानकारी स्कूल में नहीं दी. उन्हे देखकर उस वक्त नहीं लगा कि उनके साथ मारपीट की गई है, क्योंकि उनके जिस्म पर किसी जोर-बरदस्ती के निशान हमने नहीं देखा. नुक्कड़ की टीम का मांदर और पंप्लेट वहां था. वे वापस आए तो दो सिस्टर उनका इंतजार कर रही थीं, वहीं सिस्टर जिन्हें युवकों ने ले जाने से मना किया था. सिस्टर ने युवतियों को गाड़ी में बिठाया और वे सभी वहां से निकल गये. दूसरे दिन अखबारों के माध्यम से पता चला कि उनके साथ दुष्कर्म हुआ. उन लोगों ने फादर तक को जानकारी नहीं दी कि उनके साथ दुष्कर्म हुआ है.
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