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Ranchi, 14 September : राजधानी रांची में भी मेट्रो रेल जल्द ही सरपट दौड़ेगी. रांची शहर के लिए चलने वाली मेट्रो रेल का डीपीआर भी तैयार कर लिया गया है. नगर विकास विभाग ने इसके मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेज दिया गया है. नगरीय प्रशासन के निदेशक आशीष सिंहमार ने बताया कि केंद्र की मंजूरी मिलते ही आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जायेगी. उन्होंने बताया कि एचइसी के कुटे में बननेवाले नये विधानसभा परिसर से कचहरी चौक तक मेट्रो रेल चलायी जायेगी. 16.25 किमी लंबे इस मेट्रो रूट पर 4000 करोड़ रूपये की लागत आयेगी. जिसमें एक डिपो भी बनाया जायेगा. विधानसभा परिसर से कचहरी चौक के बीच कुल 17 स्टेशन होंगें. इस प्रोजेक्ट के लिए 20 फीसदी राशि राज्य सरकार और 20 फीसदी राशि केंद्र सरकार वहन करेगी. शेष 60 फीसदी राशि के लिए वर्ल्ड बैंक की सहायता ली जायेगी. लोगों को इस प्रोजेक्ट पर यकीन करना थोड़ा मुश्किल हो रहा है. उन्हें लगता है कि यह प्रोजेक्ट दूसरे प्रोजेक्ट की तरह हवा हवाई ही साबित होकर न रह जाये. राज्य में बड़े-बड़े प्लान बनाये जरूर जाते हैं, लेकिन बाद में सब टांय टांय फिस्स हो जाता है.
मोनो रेल के प्रोजेक्ट को केंद्र ने कर दिया था खारिज
रांची शहर के लिए पूर्व में प्रस्तावित मोनो रेल प्रोजेक्ट को केंद्र ने खारिज कर दिया था. रांची शहर को मोनो रेल के लिए उपयुक्त नहीं माना गया था. राज्य सरकार को पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए अन्य विकल्पों पर विचार करने की सलाह दी गयी थी. राज्य सरकार ने रांची में मोनो रेल की डीपीआर भी तैयार कर ली थी. निजी एजेंसी आइडीएफसी ने प्री विजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर 15 अक्टूबर 2015 को मुख्यमंत्री रघुवर दास के सामने प्रेजेंटेशन भी दिया था. इसके बाद इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए केंद्र के पास भेजा गया था. आइडीएफसी ने मोनो रेल की आधारभूत संरचना के लिए निर्माण पर प्रति किलोमीटर 180 करोड़ रूपये खर्च होने की बात कही थी. सरकार की योजना कुल 25 किमी क्षेत्र में मोनो रेल चलाने की थी. व्यस्त सड़कों को चौड़ा करने की जगह डिवाइडरों के बीच खंभो के उपर पटरी बिछाने की योजना थी. कुल 4507 करोड़ की लागत का आंकलन किया गया था. अब बड़ा सवाल यह उठता है कि इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए अधिकारियों ने कोई योजना बनायी थी या नहीं. जब योजनाबद्ध तरीके से यह योजना आयी तो क्या अधिकारियों को नहीं पता था कि मोनो रेल चलाने के लिए बनाये गये मापदंड पर रांची खरा नहीं उतरेगा. आखिर डीपीआर पर करोड़ो खर्च तो हुए ही समय भी बर्बाद हुआ.
मेट्रो रेल की कहां से कहां तक कितनी लागत
कचहरी चौक से प्रोजेक्ट भवन तक की रूट के लिए कुल लागत 1955 करोड़ और कचहरी चौक से आइटीआइ बस स्टैंड और नामकुम से अलबर्ट एक्का चौक तक के लिए कुल 2005 करोड़ रूपये की लागत आयेगी. यह एक प्रकार का ट्राम है, जो सड़कों के किनारे ही रेल की दो या तीन बोगियों के साथ चलती है. असल में यह मेट्रो रेल ट्राम का एडवांस रूप है.
राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था आज तक नहीं सुधर पायी, कैसे चलेगी मेट्रो रेल
राजधानी के लोगों को आज तक ट्रैफिक की समस्या से निजात नहीं मिल पायी है. ट्रैफिक सिस्टम को सुधारने का लाख प्रयास किया गया लेकिन आज तक ट्रैफिक समस्या लोगों को परेशान करती है. कहने को तो हर महत्वपूर्ण चौक चौराहे पर पिछले 6 सालों से ऑटोमेटिक सिग्नल सिस्टम लगा हुआ है. ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू करने के लिए ट्रैफिक एसपी के अलावा दो ट्रैफिक डीएसपी भी तैनात हैं. लेकिन इसके बावजूद ट्रैफिक यहां के लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गयी है. ऐसे में सवाल उठता है कि जब ट्रैफिक व्यवस्था को आजतक दुरूस्त नहीं किया जा सका तो यहां मेट्रो रेल कैसे चलेगी.
रांची मेट्रो रेल के लिए उपयुक्त भी नहीं है
जानकारों की माने तो राजधानी रांची मेट्रो रेल के लिए उपयुक्त ही नहीं है. रांची में यह योजना खटाई में पड़ सकती है. केंद्र के पास मंजूरी के लिए यह प्रोजेक्ट पड़ा हुआ है. सड़कों के किनारे मेट्रो रेल चलाना मुश्किल भरा डगर है. रांची में अभीतक फ्लाई ओवर का निर्माण अधर में लटका हुआ है तब मेट्रो का सफर कैसे तय हो पायेगा. राजनीतिक वजहों से रांची में मेट्रो रेल चलाने की घोषणा कर जरूर दी गयी हो लेकिन असल में इसे धरातल पर उतारना बहुत कठिन है. मेट्रो रेल में चढ़ने के लिए बड़ी संख्या में पैसेंजर की जरूरत होगी. मेट्रो का जितना ज्यादा रोटेशन होगा उतना फायदा होगा. लेकिन रांची की वर्तमान हालात को देखते हुए लगता नहीं है कि मेट्रो रेल का रोटेशन ज्यादा हो सकेगा.
सिटी बस सर्विस भी रांची में फेल
रांची में सिटी बस सर्विस की शुरूआत की गयी थी. जेएनएनयूआरएम स्कीम के तहत रांची नगर निगम को 70 बसें मिली थी. इनके संचालन का काम रांची नगर निगम ने झारखंड टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन को दिया गया था. इन बसों की शुरूआत बड़े धूम-धड़ाके के साथ हुई थी. लेकिन मेंटेनेंस के अभाव के अलावा जेटीडीसी और रांची नगर निगम की आपसी खींचतान से 70 बसों में से 30 बसें चलनी बंद हो गयी. इनके संचालन का काम काफी विवादों में रहा था. अब सिर्फ 40 बसें ही किसी तरह सड़क पर चल रहीं थी. जेटीडीसी ने चार सालों तक बसों का संचालन किया. सिटी बसें पहले दिन से ही ठीक से नहीं चलीं. कभी मैन पावर की कमी तो कभी बसों के मेंटेनेंस के नाम पर हमेशा इसको लेकर विवाद ही रहा.
महिलाओं के लिए चली सिटी बस योजना भी फेल
मेयर आशा लकड़ा ने महिलाओं की सुरक्षा का ख्याल रखते हुए धुर्वा शहीद मैदान से रांची शहर के लिए दो लेडीज स्पेशल सिटी बस चलाने की शुरूआत हुई थी. लेकिन चार महीने होते होते यह योजना भी हवा हवाई हो गयी.




