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कॉरपोरेट जगत का गड़बड़झाला

ईमेल हैकिंग केस से खुलता

ईमेल हैकिंग केस में गिरफ्तार प्रइवेट सेक्रेटरी और कंपनी से हटाये गये एसोसिएट वाइस प्रसेसिडेंट से न्यूज विंग की खास बातचीत से उभरा अडाणी के दफ्तरों में चल रहे गोखधंधों का मसला! उठ रहे हैं कई सवाल?

  • कॉरपोरेट ऑफिसों में बाबुओं, अफसरों के बीच वर्चस्व को लेकर साजिशें,
  • दूसरी कंपनियों से गुपचुप गंठजोड़,
  • प्रतिद्वंद्वी कंपनी को सूचनाएं बेबने का धंधा,
  • झारखंड में जमीन की लूट से धन उगाही,
  • ??.. और भी बहुत कुछ!

कॉरपोरेट सेक्टर में पद का बड़ा महत्व होता है। पद पाने की दौड़ में कौन कब, किस तरह की चाल चल दे इसका अंदाजा लगाना मुमकिन नहीं होता। तेजी से आधुनिकता की ओर बढ़ रही रांची में भी बीते सप्ताह कॉरपोरेट सेक्टर का ऐसा ही मामला सुर्खियों में रहा। अडाणी पावर लिमिटेड के एक शीर्ष अधिकारी और निम्न कर्मचारी से जुड़े इस मामले में साइबर फ्राड का केस दर्ज किया गया है। जिसमें एक कर्मचारी अपने वरीय अधिकारी का ईमेल अकाउंट हैक करने का मामला दर्ज किया गया है। हालांकि तथ्यों से संकेत मिलते हैं कि यह एक बहुत बड़ी साजिश है जिसकी गहराई में जाकर जांच होने पर और भी कुछ नामों का खुलासा हो सकता है। न्यूज विंग को इस मामले की रिपोर्टिग के दौरान जो जानकारियां दी गयी हैं वो इशारा कर रहे हैं कि अडाणी पावर लिमिटेड के शीर्ष स्तर के अधिकारी अपने से नीचे के अधिकारी को उनके पद से हटा कर रांची के पोजिशन में आने की साजिश में शामिल रहे हैं। इस काम में उन्होंने कंपनी के कुछ लोगों को मोहरे की तरह इस्तेमाल भी किया। कंपनी से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े सूत्रों के अनुसार इस साजिश की शुरूआत कॉरपोरेट स्ट्रैटजी के तहत हुई है और यह यहीं रूकने वाली नहीं है। इन्हीं सूत्रों के अनुसार इस मामले में निचले स्तर के कर्मचारी को निशाना बनाकर इस स्ट्रैटजी में काफी हद तक सफलता हासिल कर ली गयी है। रातों रात चर्चित हुए इस साइबर क्राइम के मामले में आरोपी पंकज पाठक जेल में बंद है। वहीं एडिशनल वाइज प्रेसीडेंट स्तर के अधिकारी डॉ राजीव कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसी अधिकारी ने अपने सेक्रेटरी पंकज अभियुक्त पर अपना आॅफिसियल और पर्सनल जी मेल अकाउंट के अलावा फेसबुक अकाउंट हैक करने का आरोप लगाया है। प्रारंभिक जांच में साइबर क्राइम पुलिस ने मामला सत्य पाया है। जबकि कंपनी से इस्तीफा दे चुके डॉ राजीव कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाये गये हैं। न्यूज विंग से विशेष बातचीत में आरोपी पंकज ने उनपर अडाणी समूह में रहते हुए दूसरे औद्योगिक घरानों से संपर्क रखने, फर्जी कंपनी बनाकर जमीन खरीद बिक्री में लिप्त होने के अलावा और भी कई आरोप लगाये हैं। इस मामले में अडाणी पावर के एक अन्य बड़े अधिकारी की भी भूमिका बतायी जा रही है जिनका लोकेशन झारखंड से बाहर है। सूत्र बताते हैं कि ये अधिकारी कुछ न कुछ तरकीब निकाल कर रांची में रहकर झारखंड के कामकाज पर वर्चस्व चाहते हैं। इसी स्ट्रैटजी के तहत साइबर क्राइम की साजिश रची गयी। न्यूज विंग को यह भी जानकारी दी गयी कि इस खेल में झारखंड के कुछ नेता भी शामिल हैं जो कंपनी पर पकड़ बनाने और झारखंड को चारागाह के रूप में इस्तेमाल करते हुए अच्छी खासी रकम बटोरने की फिराक में हैं।
 

रिपोर्ट: रणजीत, न्यूज विंग.

‘मैं जेल में हूं, बावजूद इसके कंपनी मेरे साथ खड़ी है’

– अडाणी कंपनी के रांची ऑफिस में प्राइवेट सेक्रेटरी रहे पंकज पाठक से न्यूज विंग की बातचीत –

एक बड़े कंपनी के अधिकारी का ई मेल अकाउंट हैक कर महत्वपूर्ण जानकारी चुराने का आरोप आप पर लगा है। इसमें कितनी सच्चाई है?
मेरे खिलाफ डॉ राजीव कुमार का ई मेल अकाउंट हैक करने का लगाया गया आरोप झूठा है। ईमेल हैक कब होता है? मान लीजिये, आपको कानूनी रूप से किसी बक्से की चाबी दी गयी है आप उसका इस्तेमाल कर रहे हैं। ये अपराध नहीं है। लेकिन जब आप इसकी डुप्लिकेट चाबी बनवा लेते हैं और इस चाबी का इस्तेमाल आपके अलावा दूसरे लोग भी करते हैं। तब यह अपराध की श्रेणी में आयेगा। मुझे कंपनी ने आधिकारिक तौर से डॉ राजीव के अकाउंट का पासवर्ड दे रखा था फिर मुझे अकाउंट हैक करने की जरूरत क्यों पड़ती? वो मुझसे कहा करते थे कि ये मेल चेक करो, वो चेक करो। उनके सभी काम मैं ही देखता था। इसी काम के लिए मुझे कंपनी में रखा गया था। अपनी गलती छिपाने और मुझे फंसाने के लिए पूरी साजिश डॉ राजीव कुमार ने रची है। क्योंकि मैं उनके कई भेद जान गया था…!

…आप किस तरह के राज जान गये थे?
कंपनी में रहते हुए राजीव कुमार जो गैर कानूनी काम कर रहे थे, मुझे सब पता था। लेकिन, मैं उनके इस पर्सनल मामले में नहीं जाना चाहता था…! वो जमीन खरीद बिक्री के विवाद में काफी गहराई तक चले गये थे। राजीव कुमार आज की तारीख में 90 जमीन की दलाली में शामिल हैं। ये जमीन कोई छोटे मोटे प्लॉट नहीं हैं। आजतक लगभग 800 एकड़ जमीन बेच चुके होंगे! …वैसे भी कोई कंपनी किसी छोटे स्तर के कर्मचारी को काम से नहीं हटाना चाहती। बल्कि कंपनी में जो बुरे लोग हैं और जो कंपनी को नुकसान पहुंचा रहे हैं उनको काम से हटाना चाहेगी। यहां भी यही हो रहा था।

…आपका इशारा शायद इस ओर है कि राजीव कुमार के कारनामों की जानकारी कंपनी तक पहुंच गयी थी?
कुछ ऐसा ही था। इन्होंने (राजीव कुमार) अडाणी कंपनी में रहते हुए एक अपनी कंपनी क्रिएट कर ली। कंपनी का नाम रखा बीएसडब्ल्यु इंटरप्राइजेज। अब इसी कंपनी के जरिये डॉ राजीव सही—गलत हर तरह के काम कर रहे थे। इन्होंने अडाणी ग्रुप के एक जिम्मेदार पद पर रहते हुए इस कंपनी के काम से, … एक अन्य पुरानी स्थानीय कंपनी   को बड़े पैमाने पर जमीन उपलब्ध करवायी। इसमें उस (..) कंपनी के कुछ पदाधिकारियों की भी मिलीभगत है। हालांकि मैं उनका नाम अभी नहीं लेना चाहता…..! इस तरह से डॉ राजीव कुमार ने उस कंपनी (..) के साथ बहुत बड़ी डील की। जमीन बिक्री के बाद जो पैसे उन्हें मिले, चार या पांच पेमेंट मैंने खुद ही डॉ राजीव के अकाउंट में आते हुए देखा है क्योंकि मैं उनके सेक्रेटरी के तौर पर काम कर रहा था। पैसे कहां से आ रहे हैं और कहां जा रहे हैं इतना पता चल ही जाता है! मेन रोड स्थित एचडीएफसी बैंक के ब्रांच में उनका अकाउंट है जिसमें पैसे जमा किये गये।

…तो राजीव कुमार कंपनी के साथ रहते हुए मुख्य रूप से जमीन का कारोबार कर रहे थे?
डॉ राजीव का जमीन ब्रिकी का कारोबार बहुत गंभीर मामला है। मैं यह बताना चाहूंगा कि कंपनी में रहते हुए वो (डॉ राजीव) एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट कम और जमीन के दलाल ज्यादा थे। यहां कंपनी के कॉरपोरेट ऑफिस में उनसे जो लोग मिलने आते थे, ज्यादातर जमीन की दलाली से जुड़े लोग थे। ये दलाल  उस कंपनी (..) के लिए काम करते हैं और अडाणी के ऑफिस में घंटों बैठकर डॉ राजीव के साथ डील करते थे। सोचिये, ये कंपनी को किस तरह से धोखा दे रहे थे…..! ..सभी बातें खुले तौर पर होती थीं। जमीन दलाल हमारे ऑफिस में आते हैं उनसे (राजीव) बात करते हैं … और पेमेंट हो जाता है। जो मुख्य बात है वो यह कि वो (राजीव) अडाणी में रहते हुए दूसरी कंपनियों के लिए काम कर रहे थे, उन्हें फायदा पहुंचा रहे थे। उन कंपनियों के साथ डॉ राजीव के गैर कानूनी संबंध थे। इसके कुछ सबूत हैं मेरे पास…..। बस बेल हाने का इंतजार है, बाहर आते ही मैं वो सबूत सभी के सामने रख दूंगा।

किस तरह की बातें होती थीं?
मतलब कि वो खुलकर बोलते थे कि फलां डील में मेरा हिस्सा क्या होगा? इस तरह से जमीन वाले मामले में इनकी कम्पिलिट इनवाल्वमेंट (पूरी संलिप्तता) है। मतलब कि पैसे के मामले में राजीव ऐसे हैं कि जहां से पैसा निकल रहा है निकाल लो, बाद की कौन देखता है? 

… ऑफिस से ये जानकारियां कौन दे रहा था? …क्या आप भी सहयोग कर रहे थे?
ऑफिस में यह बात जगजाहिर थी कि किसी भी काम के लिए डॉ राजीव 10 परसेंट का कमीशन रखते थे। कमीशन नहीं देने पर काम लटका दिया जाता था। एक छोटा सा उदाहरण बताता हूं, हमारे ऑफिस के लिए बाहर के कुछ लोग काम कर रहे थे। इनके साथ डॉ राजीव ने यह तय किया कि उन्होंने एक नया फ्लैट खरीदा है उसमें मार्बल का काम करवाना है। अगर वेंडर ने काम नहीं किया। उसका पेमेंट रोक दिया जायेगा। एक तरह से देखिये तब ये कंपनी के साथ काम नहीं कर रहे थे। बल्कि कंपनी के हित के खिलाफ जा रहे थे। कंपनी भी यह बात समझ चुकी थी। इतनी बड़ी कंपनी है। उसके पास अपने इनफारमेशन सोर्स होते ही हैं। देखिये, जब मैं 25 हजार रूपये की सैलरी में ईमानदारी से काम कर सकता हूं। आपको (डॉ राजीव को) साढ़े चार लाख रूपये दिये जा रहे हैं। आपको दूसरे तरीके से पैसे कमाने की जरूरत ही क्या थी? उनको लगने लगा था कि कुछ कुछ चीजें अब उनके हाथ से निकल जायेंगी….। फिर भी वो नहीं माने। कंपनी के हित के खिलाफ जो काम कर रहे थे, मैंने कंपनी के अधिकारियों को इसकी जानकारी दे दी।
मैं आपको बताना चाहूंगा कि इस मामले में कंपनी के पास जो सूचनाएं थीं, सिर्फ उसको प्रमाणित करने का काम मैंने किया है। इसके बाद कंपनी ने डॉ राजीव को हेड ऑफिस बुलाकर कंपनी गतिविधियों के इनके सभी अधिकार छीन लिये। 20 जुलाई, 2016 को कंपनी के शीर्ष अधिकारियों ने डॉ राजीव को हेड ऑफिस बुलाया और उनके सभी अधिकार समाप्त कर दिये गये। उनसे कहा गया कि टर्मिनेशन लेटर में आपकी सेवा लगभग समाप्त कर दी गयी है। अब उल्टा वो कह रहे हैं कि पंकज ने जो फर्जी काम किया है उसकी सजा उसे मिली है। लेकिन, मैं कहना चाहता हूं कि मैंने ऐसा कोई काम किया ही नहीं। इसके सबूत हैं मेरे पास।

कंपनी के एवीपी डॉ राजीव के जी मेल अकाउंट से छेड़छाड़ होने की बात में कितनी सच्चाई है?
डॉ राजीव कहते हैं कि अडाणी ग्रुप का मैं एवीपी (एडिशनल वाइज प्रेसिडेंट) हूं। लेकिन, सच्चाई यह है कि उनसे कंपनी ने कह दिया है कि आप इस पद पर नहीं हैं। रहा सवाल मेल चेक करने का, मुझे मेल देखने की इजाजत दी गयी थी और मैं अपना काम कर रहा था। जब आप कंपनी के अधिकारी हैं, जिम्मेदारी आपकी भी बनती है। जहां तक उनके जी मेल अकाउंट और फेसबुक अकाउंट हैक करने की बात है। फेसबुक का पासवर्ड डॉ राजीव ने मुझे खुद बताया था। अब आप कहते हैं कि आपका पासवर्ड बदल दिया गया है…..! आपको (डॉ राजीव) और बहुत सी चीजों के बारे में भी पता नहीं है। आपको अपना पीएफ (प्रोविडेंड फंड) अकाउंड का पासवर्ड नहीं मालूम है, इएसआई कार्ड का पासवर्ड भी नहीं मालूम है। सभी का पासवर्ड मेरे पास है और आप मुझसे सभी काम करवा रहे हैं। …..फिर ये इल्जाम कैसे लग गया कि पंकज ने उनका ई मेल आईडी हैक कर लिया? …..रही बात फेसबुक अकाउंट की, उनका फेसबुक अकाउंड जी मेल आईडी से लिंक्ड है। …..अगर फेसबुक में किसी एक नोटिफिकेशन में आप क्लिक करेंगे तब अकाउंट में इसका मैसेज आयेगा ही। तब मैंने उनका ई मेल आईडी कैसे हैक कर लिया?

आप पर यह भी आरोप लगा है कि आपने फर्जी कंपनी बनायी और करीब 800 एकड़ जमीन बेच दी जिसमें सरकारी जमीन भी शामिल है?
इस आरोप पर मैं सिर्फ इतना कहना चाहूंगा कि मैंने जो बयान दिया, अखबारों के जरिये उससे अलग बात प्रचारित करवायी गयी। मैंने कहा था कि फर्जी कंपनी डॉ राजीव कुमार ने बनायी थी। लेकिन उसका आरोपी मुझे बताया गया है। अडाणी में आने से पहले डॉ राजीव हिंडलको में भी काम कर चुके हैं और मुझे जो सूचनाएं मिली हैं वहां भी उनका बैकग्राउंड बहुत अच्छा नहीं रहा। वहां भी वो पाक साफ नहीं थे। उसी कंपनी में रहते हुए डॉ राजीव ने अपनी पत्नी के नाम से एक कंपनी क्रिएट कर ली। जो बीएसडब्ल्यु कंपनी है उन्होंने अपनी पत्नी के नाम से बनायी है। जमीन का अधिकांश कारोबार उस कंपनी (..) से चल रहा था। अभी जहां वो रहते हैं उसी घर को उन्होंने नयी कंपनी का ऑफिस बना लिया है। लेन देन वगैरह सब कुछ वहीं से आॅपरेट किया जाता है। कुछ जमीन जिसकी बिक्री नहीं की जा सकती थी। उसे भी बेच दिया। इस जमीन की माप करने आये अमीन ने इस बात का खुलासा किया था। ये जमीन किसी दूसरी कंपनी को दिया जा रहा था। उन्होंने इस फर्जी कंपनी के जरिये उस जमीन को बेच दिया। इसमें उन्होंने अच्छा मुनाफा कमाया। डॉ राजीव के इस फर्जी काम के पीछे कई नेता भी शामिल हैं जो पार्टी (जमीन के खरीददार) लेकर आते थे, या जमीन बिक्री में आ रही रूकावट को दूर करते थे और उसके बदले वो डॉ राजीव से पैसे लेते थे।

इस मामले में झारखंड प्रोजेक्ट के ग्रुप सीईओ राजेश झा और अहमदाबाद सेक्टर के अभिषेक त्यागी के नाम भी सामने आ रहे थे? इस मामले में उनकी क्या भूमिका रही है?
देखिये, किसी भी कंपनी के बड़े अफसर कंपनी का भला चाहते हैं। अभिषेक त्यागी जब झारखंड आये, उन्हें पता चला कि झारखंड के ऑफिस का माहौल खराब कर दिया गया है। यहां ठीक से काम नहीं हो पा रहा है। उन्हें इसके कई संकेत मिल गये थे। कुछ दस्तावेज भी थे जो उन्होंने अपने साथ रख लिये। अब डिपार्टमेंट पर कार्रवाई होनी थी जिसके लिए ये दस्तावेज जरूरी थे। इसमें डॉ राजीव पर सवाल उठने लगे थे। और उन्हें लगने लगा कि कल का एक लड़का आया जिसने मेरे सारे बने बनाये काम पर पानी फेर दिया। …..लेकिन कंपनी का आदमी कंपनी का होता है। इससे हमसे भी सवाल पूछा जाता। तब मैंने हेड ऑफिस को सूचित कर दिया कि राजीव कुमार खुद काम नहीं करते और दूसरों को भी काम नहीं करने देते। कंपनी में उन्हें पहले ही टारगेट कर लिया गया था। कंपनी ने इस पूरे मामले पर बात करने के लिए राजीव को अहमदाबाद बुलाया। वहां अफवाह उड़ायी गयी कि राजीव कुमार अहमदाबाद गये हैं अब पंकज की नौकरी चली जायेगी। जिसमें पंकज की कोई गलती भी नहीं है, राजीव कुमार ने उसके खिलाफ लिखित शिकायत की है। उन्होंने यह भी अफवाह उड़ायी कि फाइल में एक नन महाराष्ट्रीयन की नौकरी चली गयी है। मेरे साथ कुछ लोग काम करते थे। मैंने उन्हें इस बात की जानकारी दी। कंपनी के पास सारी इनफारमेशन थी। मेरे काम के बारे भी पता था। हालांकि मुझे कंपनी ज्वाइन करने के कुछ महीने बाद अहसास होने लगा था कि मैंने कंपनी बहुत अच्छी चुनी है लेकिन मैं गलत टीम में आ गया हूं। इस टीम का कप्तान भी वैसा ही था!

अभी इतना सब कुछ हो जाने के बाद कंपनी के बड़े अधिकारियों की क्या प्रतिक्रिया है?
अभी मैं जेल में हूं और कंपनी मेरे साथ खड़ी है। सिर्फ इसलिए कि मैंने कोई गलत काम नहीं किया है। मैंने कंपनी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है। डॉ राजीव डीएसडब्ल्यु कंपनी में एचआर (ह्युमन रिसोर्स) का काम संभाल रहे थे और अडाणी में ये कॉरपोरेट अफेयर्स का काम देखने लगे। डॉ राजीव अडाणी ग्रुप के साथ करीब डेढ़ साल से जुड़े हैं। यहां एक और बात बताना चाहुंगा कि कुछ महिलाओं के साथ उनकी घनिष्ठ मित्रता रही है। कई बार ऐसा हुआ कि उन्होंने कंपनी के काम से टूर प्लान बनाया और पता चला किसी और के साथ घूमने चले गये …! ये बातें छिपती नहीं हैं। सच कहूं कि मैंने अपनी जिंदगी में जमीन का इतना बड़ा दलाल नहीं देखा। वो कौड़ियों की कीमत में जमीन खरीदते थे। पर कंपनी को जानकारी दी जाती थी कि पांच लाख रूपया एकड़ की दर से जमीन खरीदी गयी है। यानी कंपनी से जमीन की ज्यादा कीमत लेते थे और रैयतों को कम पैसे चुकाते थे। इस काम में कुछ नेता भी उनका सहयोग कर रहे थे। पैसे की हेर फेर के लिए किसी जमीन दलाल के साथ मिलकर बैंक में ज्वाइंट अकाउंट खुलवा लेते थे। अकाउंट में पैसा आने पर उसे निकल कर कहीं और लगा देते थे। मुझे इसकी सजा मिली कि मैंने डॉ राजीव के खिलाफ कंप्लेन करवा दी। हालांकि कंपनी ने उन्हें टर्मिनेट कर दिया था और उनके अधिकार क्षेत्र का काम उनसे उच्च अधिकारी अमृतांशु प्रसाद देख रहे थे।

साइबर थाना में सेटिंग की
एक और बताता हूं कि डॉ राजीव ने किस तरह साइबर थाने में सेटिंग की। जिस दिन मुझे अरेस्ट किया गया उस दिन साइबर थाने से मेरे पास फोन आया था। उसके बाद राजीव कुमार ने भी मुझे फोन किया। साइबर थाने से उनकी बात हो ही रही होगी। राजीव ने कहा कि मैं थाने वालों से कहूं कि डॉ राजीव मेरे साथ कंपनी में कभी भी नहीं रहे। उन्होंने यह भी कहने को कहा कि मैं पुलिस को यह बताउं कि राजीव अभी नहीं हैं। मैं पेपर लेने के लिए राजी हो गया। मैंने डॉ राजीव से यह भी कहा कि यह बात मैं किसी को बताऊंगा नहीं। लेकिन मैंने कहा कि पेपर आपको खुद आ कर लेना होगा। 

अब डॉ राजीव क्या प्रतिक्रिया है?
अब डॉ राजीव मेरे परिजनों से कह रहे हैं कि इस मामले में मैं अडाणी के अधिकारियों को फंसा कर उन्हें बचा लूं। जो कभी नहीं हो सकता। मैं जमानत पर बाहर आने पर और नये खुलासे करूंगा, सबूत के साथ। उस कंपनी (..) के भी दो तीन अधिकारी हैं जो कंपनी को बर्बाद करने के रास्ते पर हैं।

मेरा ईमेल हैक करने के पीछे ‘उसका’ कोई गंभीर मकसद रहा होगा, फिनांसियल या नॉन फिनांसियल

– अडाणी कंपनी के रांची ऑफिस में एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट रहे डॉ राजीव कुमार से न्यूज विंग की बातचीत –

डॉ राजीव, आपका आरोप है कि अडाणी कंपनी में आपके सेक्रेटरी ने आपका ईमेल अकाउंट हैक कर उसे एसेस किया और उसमें से महत्वपूर्ण जानकारियां चुरा लीं। … पर इस आरोप को बेबुनियाद बताया जा रहा है। क्या हैक होने की बात मनगढंत है?
देखिये, मैंने साधारण तरीके से एफआईआर दर्ज करवायी है। इसमें पूरा विवरण दिया गया है। मैं बस यही मांग कर रहा हूं कि इसमें जिसकी भी संलिप्तता है, उसको सजा मिले। इस हेरफेर में कंपनी में मेरा करिअर बर्बाद हो गया। आगे का भविष्य दांव पर लग गया है। इसका अंदाजा कोई नहीं लगा सकता कि मेरा कितना डैमेज हुआ है? क्राइम क्राइम होता है। उसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए।

ऑफिस का ईमेल अकाउंट और आपका पर्सनल ईमेल अकाउंट इस बात पर अस्पष्टता है। कुछ स्पष्ट करना चाहेंगे कि आपके किस अकाउंट को हैक किया गया और उस अकाउंट से छेड़छाड़ की गयी…..?
सभी कंपनियों में अधिकारियों का एक आफिशियल मेल होता है। इसी तरह हमलोग अडाणी मेल अकाउंट से अपने मेल ऑपरेट कर रहे थे। इससे अलग हमारा पर्सनल मेल था जिसे हम व्यक्तिगत रूप से इस्तेमाल करते थे। ऑफिस से इसका संबंध नहीं था। इसमें मेरे बैंक, नेट बैंकिंग, अन्य खाते और पासवर्ड लिंक थे। नियमता आफिशियल मेल किसी को देखने या उसके प्राइवेसी में जाने की इजाजत किसी दूसरे व्यक्ति को नहीं दी जाती। जबतक कि आपको कॉरपोरेट का आईटी सिक्युरिटी सिस्टम इसकी लिखित इजाजत नहीं दे देता। आज देखिये कि बैंकों में सिक्युरिटी सिस्टम को मजबूत करने के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम इस्तेमाल हो रहा है। यानी सिक्युरिटी आज सेन्सेटिव इश्यू बन गया है। ऑफिस के बारे में मुझे ज्यादा आइडिया नहीं कि पंकज ऐसा करता था या नहीं। लेकिन, वह मेरा सेक्रेटरी था इसलिए उसे मैंने कई बार कहा कि मेरा ईमेल खोलकर फलां काम कर दे। यहां स्पष्ट करूं कि इस काम के लिए भी मैंने उसे अधिकृत नहीं किया था। यानी मेरी अनुमति या जानकारी के बिना मेरे ऑफिसियल मेल को कोई भी जूनियर या सीनियर ऑपरेट करने अधिकृत नहीं था। पंकज मेरा जूनियर था। उसने मुझे जानकारी दिये बिना मेरा अकाउंट ऑपरेट किया और जी मेल अकाउंट हैक भी कर लिया।

‘कंपनी में मेरा पोजिशन खराब करने की साजिश’

इस मामले में आपको साफ बताऊं तो पंकज दो तीन लोगों से मिल गया था। कुछ बाहर के लोग थे और कुछ कंपनी के इंटरनल लोग थे। अब कंपनी में मेरा पोजिशन खराब करने के लिए वह उन लोगों के इशारे पर मेरा पर्सनल ईमेल आइडी और कभी पासवर्ड हैक कर रहा था। अगर ऐसा नहीं था तब दूसरी जगहों तक मेरी पर्सनल इनफारमेशन कौन पहुंचा रहा था? कई बार मैं ऑफिशियल मेल भी अपने पर्सनल मेल से भेजा करता था यह सोचकर कि इसे जिस जगह भेज रहा हूं वहां का सेक्रेटरी इस मेल को देख न ले। लेकिन इस ईमेल आईडी से भेजे गये इनफारमेशन को भी कहीं कहीं लोग शेयर कर लेते थे। बाद में मुझे बताते थे कि तुम्हारा फलां मैसेज ऐसा था…..!  मैं यही सोचता कि कौन कर रहा है ये सब? मुझे पंकज पर जरा भी संदेह नहीं था। क्योंकि उसे मैंने ही अप्वाइंट करवाया था। इससे पहले वो जहां काम कर रहा था, उसे 15 या 17 हजार रूपये सैलरी मिल रही थी। यहां उसे पैसे ज्यादा मिलते। आर्गेनाइजेशन भी बड़ा था इसलिए मैंने उसका साथ दिया। उस वख्त मेरे पद को देखते हुए कुछ लोग मुझे पंकज को अपना सेक्रेटरी बनाने से मना कर रहे थे। पर मैंने उसे जबरदस्ती अप्वाइंट करवाया। वह अपनी आदतों से लाचार था यहां ये सब करने लगा! स्थिति ऐसी हो गयी कि मैनेजमेंट की उंगली मुझ पर उठने लगी। मिटिंग्स में मुझसे पूछा जाता कि वन टू वन इनफारमेशन दूसरा व्यक्ति कैसे जान जाता है? इन सब बातों से तंग आकर मैंने अपने पद से रिजाइन भी कर दिया। मैंने इंडिया के टॉप कंपनियों के साथ जुड़ कर काम किया लेकिन इस तरह की स्थिति कहीं नहीं आयी। अडाणी पावर में कौन, कैसे इनफारमेशन जान जा रहा है, मुझे कुछ भी पता नहीं चलता था।

क्या इससे पहले भी कंपनी में आपके ईमेल अकाउंट हैक किये गये थे?
अब जिस परिस्थिति के बीच मैं खड़ा हूं। मुझे विश्वा स हो गया है कि पहले भी पंकज ने मेरे अकाउंट को हैक किया होगा। पहले अकाउंट खोलकर उसे पढ़कर जानकारी लेता रहा होगा। मैं अपने रूटीन में चलता था इसलिए कभी क्रास चेक करने की जरूरत नहीं हुई। कंपनी से रिजाइन करने के बाद 23 अगस्त, 2016 को मैंने सोचा अब अपने अकाउंट का पासवर्ड बदल देता हूं। क्योंकि आये दिन बैंकिंग फ्राड की खबरें आती रहती हैं। मेरे सभी एटीएम और बैंक ट्रांजक्शन उसी अकाउंट से लिंक्ड थे। इस तरह मैंने शायद जुलाई में अपने अकाउंट का पासवर्ड बदल दिया। अब 23 अगस्त को मेरे पास मैसेज आया कि मेरा पासवर्ड फिर बदल दिया गया है। मैं परेशान हो गया। चूंकि मैं बहुत ज्यादा आईटी फ्रेंडली था नहीं इसलिए मैंने अपना दूसरा ईमेल आईडी बना लिया। तब भी मेरा शक पंकज पर नहीं था। मुझे लगा शायद गुगल से कोई प्रॉब्लम हो। अब मेरे नये ईमेल आईडी को भी हैक कर लिया गया। फिर एक ही दिन मैंने दो ईमेल आईडी बनाये। इसमें से एक आईडी को हैक करने की कोशिश की गयी। एक सितंबर को कोई मेरा फेसबुक अकाउंट हैक कर लेता है। इतना कुछ हो जाये तब आपको कुछ संदेह होगा ही। अब मुझे विश्वायस हो गया कि कोई प्रोफेशनल हैकर मेरे पीछे लगा है जो मेरे खाते से पैसे चुराना चाहता है। कभी भी मेरा शक पंकज पर नहीं गया। लेकिन सब बातों का जिक्र करते हुए थाने में एफआईआर करवा दी। साइबर पुलिस से अनुरोध किया। एक से एक कड़ी जोड़ते हुए पुलिस को मेरे फेसबुक अकाउंट से एक नंबर मिला जिसे ट्रेस किया गया। पुलिस ने इस नंबर का सीडीआर निकाला। फिर आईसीडीआर निकाला। इस नंबर का आईपी डिटेल्स भी निकाला गया। सभी इनफारमेशन को को रिलेट करते हुए पुलिस को मोबाइल की गतिविधि का पता चल रहा था। इतना कुछ होने के बाद मुझसे ऑफिस स्टाफ का आफिशियल नंबर मांगा गया। इन नंबरों में एक मोबाइल नंबर ऐसा था जो इसके दूसरे वाले नंबर के साथ मूव कर रहा था। रात को गौतम ग्रीन सिटी और दिन को अडाणी ऑफिस। इस तरह कड़ी से कड़ी मिलाते हुए पंकज को पकड़ा लिया गया।

आपकी बेटी के नाम से फर्जी ईमेल आईडी क्रिएट करने की बात सामने आ रही थी?
इस सवाल के जवाब में मैं कहना चाहूंगा कि जब आप कोई नया ईमेल अकाउंट बनाते हैं या पासवर्ड चेंज करते हैं उसमें एक मोबाइल नंबर के अलावा रिकवरी ईमेल आईडी भरनी होती है। पंकज ने मेरी बेटी के नाम से एक फेक ईमेल आईडी बना कर मेरे जीमेल का रिकवरी मेल उस अकाउंट में डाल दिया। फोन नंबर को वहां से रिमूव कर दिया गया। इसके बाद मैं जब भी पासवर्ड रिवकर करने का प्रयास करता था, कन्फमेशन मेल मेरी बेटी से नाम से बनाये गये फेक ईमेल आईडी पर चला जाता था। उस आईडी का पासवर्ड पंकज के पास ही था। मैंने पुलिस से अनुरोध किया है कि इसकी डिटेल इन्क्वाइरी की जाये।
इसमें दो तीन बातें बहुत स्पष्ट हैं कि पंकज कोनाइवेंश कर ही रहा था। पुलिस को दिये अपने बयान में पंकज ने हमारे ऑफिस के दो सीनियर लोगों का नाम लिया था। इसके अलावा पंकज बाहर के लोगों से इनफारमेशन शेयर करता था, या नहीं करता था? ये बात जांच में सामने आ जायेगी। पुलिस ने उसका डोंगल और पेन ड्राइव जब्त किया है। उस डोंगल का आईपी डिटेल निकलने के बाद और भी तथ्य सामने आने की उम्मीद है। ये पता चला जायेगा कि पंकज मेल और डाक्युमेंट्स का कहां कहां यूज और मिसयूज कर रहा था।

कंपनी के महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की बात भी सामने आ रही है? वास्तव में ऐसा कुछ हुआ था? या यह अफवाह है?
इतने गंभीर विषय में मैं अभी कुछ कह नहीं सकता लेकिन मुझे अब लग रहा है कि पंकज ऐसा कर सकता है। आखिर उसका कोई मकसद रहा होगा तभी उसने मेरा ईमेल अकाउंड हैक कर लिया। इसमें भी फिनांसियल या नन फिनांसियल मैटर हो सकता है। फिनांसियल मैंटर समझ में आता है क्योंकि अडाणी ग्रुप के पीछे सभी इंडस्ट्री के लोग लगे रहते हैं। बहुत से पॉलिटिकल पार्टी के लोग भी लगे रहते हैं। यदि अडाणी का इमपोर्टेंट इनफारमेशन उसे रेग्युलर बेस पर मिलता रहेगा तब अडाणी को प्रेशराइज कर सकेंगे। वैसे भी कोई किसी को फ्री सर्विस नहीं देता…..! हालांकि यह जांच का विषय है।

ऐसी बात समने आ रही है कि कंपनी सरकारी फाइलों से दूसरी कंपनी के दस्तावेजों को निकाल लेती थी?
इसके विषय में मुझे ज्यादा कुछ आइडिया नहीं है। अगर पंकज ने ऐसा कुछ कहा है, इसके पीछे भी कोई राज होगा!

आप पर यह आरोप लगाया गया है कि आपने एक फर्जी कंपनी बनायी और इस कंपनी के जरिये जमीन का कारोबार कर रहे थे? इसमें आपके संबंध बड़े औद्योगिक घरानों (अडाणी से अलग) से रहे हैं? वहां से आपके लेन देन भी होते हैं?
इसकी जांच करवायी जा सकती है कि मैं कंपनी में रहते हुए कंपनी कैसे बना सकता हूं। और इतने बड़े पद पर रहते हुए कंपनी बनाकर फर्जीवाड़ा भी करूंगा …..! मेरी पांच लाख रूपये महीने की तनख्वाह है, काम करने का अच्छा अनुभव है। मुझे फर्जीवाड़ा करने की जरूरत क्यों पड़ेगी? आज की तारीख में कम से कम कार्पोरेट सेक्टर में कोई भी झूठी कंपनी बनाकर फर्जीवाड़ा कर भी नहीं सकता है। क्योंकि जिस कंपनी के नाम से ट्रांजक्शन किया जा रहा है उसका बैंक डिटेल उपलब्ध होता है। उसका आईपीसीआईएन नंबर होगा। उसका इनकम टैक्स नंबर होगा। बैंक में कंपनी का खाता होगा। कंपनी ने किसी को पैसा चुकाया वह किस मकसद से चुकाया उसकी जानकारी होगी। कंपनी सही है या गलत है यह तुरंत पता चल जायेगा। अब पंकज अपने बचाव के लिए कुछ भी कह सकता है। मुझपर कुछ भी आरोप लगा सकता है।

यह कहा जा रहा है कि रांची के मेन रोड में स्थित एचडीएफसी बैंक में आपके अकाउंट से ट्रांजक्शन किया गया है?
आपको मैं इसकी सच्चाई बताता हूं। मेरी पत्नी के नाम से बीएसडब्ल्यु कंपनी रजिस्टर्ड है। हमारी शादी के समय पटना हाईकोर्ट में मेरी पत्नी डीएल प्रैक्टिशनर थी। उनकी व्यस्तता के लिए मैंने उन्हें कंपनी शुरू करने का सुझाव दिया। हमने कंपनी रजिस्टर्ड करवायी। बाकायदा ऑफिशियली प्रोपराइटरशिप फर्म में उसका टैक्स जमा होता है। कंपनी का सीआईएन नंबर है, सर्विस टैक्स नंबर है। कभी लीगल कंसलटेंसी, कभी छोटी कंपनियों के एक दो लाख रूपये के काम इस कंपनी के जरिये होते रहे हैं। इसमें मेरे माध्यम से या किसी और के माध्यम से काम मिल जाता था। अब उससे न ही मेरा और न मेरी कंपनी का लेन देन था। इसको घर से या कहीं और से आपरेट किया जा सकता है। ये वैसे ही आपरेट हो रही थी जैसे दो या चार लोग मिलकर लीगल फर्म बना लेते हों और काम कर रहे हों।

‘इनफारमेशन लीक‘ मामले में चर्चा करने के लिए आपको अडाणी के हेड ऑफिस में बुलाया गया था?
मुझे हेड ऑफिस बुलाया जरूर गया था। लेकिन प्रोजेक्ट रिव्यु मिटिंग के लिए। महीने में एक बार हमारी प्रोजेक्ट रिव्यु मिटिंग होती है। वहां मेेरे सामने वो फाइल रखे गये थे जो रांची के ऑफिस से लीक किये जा रहे थे। इसी बात से गुस्साकर मैंने रिजाइन कर दिया। ये सच्चाई थी कि इनफारमेशन लीक हुए थे। मैं इतने सीनियर पोजिशन पर था मेरी जिम्मेवारी थी। इसलिए मैंने रिजाइन किया। मैंने कहा था कि यदि लगता है कि ये मेरा एडमिनिस्ट्रेटिव लैप्स है तो मैं रिजाइन कर देता हूं।

आप पर रांची के जमीन दलालों से संपर्क रखने और ऑफिस में जमीन कारोबार की चर्चा करने के आरोप लगे हैं?
ऐसी कोई भी बात नहीं थी। जो ये आरोप लगा रहा है वो जमीन कारोबारियों के नाम भी बता दे …! वैसे भी रांची के जमीन दलालों से मुझे कोई मतलब भी नहीं है। देखिये, यहां साफ करूं कि झारखंड में अडाणी को कम से कम 10 हजार एकड़ जमीन चाहिए। मैं पिछले सात आठ साल अलग अलग कंपनियों के लिए झारखंड में काम कर रहा हूं। जमीनी स्तर पर मेरे अच्छे नेटवर्क हैं। मुझे पता है कि कौन सी जमीन विवदित है और किसमें विवाद नहीं है। कहां फर्जीवाड़ा हो सकता है। मान लीजिये कंपनी को सोलर पावर के लिए जमीन लेनी है, या किसी और काम के लिए लेनी है। तब मैं जमीन के मालिकों से बात करूंगा ना…..। इसमें मैं क्या गलत कर रहा हूं? ये मेरी कंपनी का काम है। हमारा पार्ट ऑफ द बिजनेस है।

कंपनी के कुछ दूसरे बड़े अधिकारियों के नाम सामने आ रहे थे? इस मामले में उनका भी कोई लिंक रहा है?
इसकी जानकारी मुझे नहीं है लेकिन यह सच है कि मेरा अकाउंट हैक किया गया है। गैरकानूनी तरीके से जानकारियां सार्वजनिक की गयीं।

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