
Ranchi : अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति ने सीपीआई कार्यालय में बैठक कर किसानों के लिए केन्द्रीय बजट में वित्त मंत्री की घोषणा को झूठ का पुलिंदा कहा. राज्य और देश स्तर पर गहराता कृषि संकट के समाधान के लिए केंद्रीय बजट में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है. वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में बढ़ते हुए किसान आत्महत्या का जिक्र तक नहीं किया, जबकि देश के प्रधानमंत्री ने 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुना किया जायेगा कह कर किसानों का मजाक उड़ाया है. बैठक में वक्ताओं ने कहा कि जिस तरह से चुनाव में जुमलेबाजी का सहारा लिया जा रहा है, ठीक किसानों के साथ भी भाजपा सरकार वैसा ही कर रही है. देश के हालात भी कुछ ऐसी है कि किसान पूंजी का जुगाड़ भी नहीं कर पाते मात्र 14% किसान ही कृषि लोन लेकर खेती किसानी का कार्य कर पाते हैं. वित्तमंत्री के बजट भाषण में 27 दफे ‘किसान’ (Farmer) शब्द का प्रयोग किया गया और 16 दफे किसानी (Agriculture) का जिक्र किया. लेकिन ‘किसान-आत्महत्या’ या ‘ग्रामीण-संकट’ जैसा कोई शब्द बजट-भाषण में उपयोग नहीं किया था. जो कि किसानों की वास्तविक हालत से दूर थी.
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मोदी सरकार के किसान विरोधी नीतियों का पर्दाफाश करने का निर्णय
सरकार की घोषणा के विरुद्ध झारखंड राज्य किसान सभा की ओर से किसानों के साथ धोखाधड़ी के खिलाफ 19 फरवरी को राज्य के हर प्रखंड के किसानों को गोलबंद कर केन्द्रीय बजट की प्रतियां जलायेगी. मोदी सरकार के किसान विरोधी नीतियों का पर्दाफाश करने का निर्णय लिया गया. बैठक में दयमानी बारला, महेंद्र पाठक, राजेंद्र सिंह मुंडा, सुरजीत सिन्हा, श्याम सुंदर बैठा, हीरा गोप, का. सुफल महतो, का.श्याम सुन्दर महतो आदि मौजूद थे.
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