
News Wing Desk
“एक जमाने में 2 सीटों वाली पार्टी बीजेपी आज जिस तरह देश में बहुमत की सरकार चला रही है और देश में लंबे समय तक शासन करने वाली पार्टी कांग्रेस अब तक के सबसे कठिन दौर से गुजर रही है, उसी तरह इन दोनों पार्टियों की आर्थिक स्थिति में भी काफी गहरा बदलाव आया है, जो अपने आप में ये संकेत देता है कि पिछले कुछ सालों में सिर्फ बीजेपी का कुनबा ही नहीं बढ़ा, उसकी आमदनी में भी बेतहाशा इजाफा हुआ है. वहीं इसके ठीक उलट कांग्रेस राजनीतिक ही नहीं आर्थिक रुप से भी मुश्किलों का सामना कर रही है .”
81.18 फीसदी बढ़ी बीजेपी की कमाई, कांग्रेस की 14 फीसदी घटी
आखिर बीजेपी की झोली में कितनी धनवर्षा हुई और उसके मुकाबले कांग्रेस किस पायदान पर है, इन सवालों पर बहस तब शुरू हुई, जब मंगलवार को एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स यानि एडीआर की रिपोर्ट जारी हुई. इस रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2016-17 के बीच भारतीय जनता पार्टी की आमदनी में 81.18 फीसदी का इजाफा हुआ है. इस वृद्धि के साथ बीजेपी की आमदनी बढ़कर 1,034.27 करोड़ रुपये दर्ज की गई है. वहीं इसी समयावधि में देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस की आमदनी में 14 फीसदी की गिरावट आई है, लिहाजा कांग्रेस की आमदनी घटकर 225.36 करोड़ रुपये पर आकर सिमट गई. एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक सात राष्ट्रीय दलों-बीजेपी, कांग्रेस, बसपा, एनसीपी, माकपा, भाकपा और टीएमसी की कुल घोषित आय 1,559.17 करोड़ रुपये रही, जबकि इन पार्टियों ने 1,228.26 करोड़ रुपये खर्च किए. एडीआर की रिपोर्ट में उन विवरणों के आधार पर बीजेपी और कांग्रेस की कुल आय-व्यय एवं आय के स्रोत की तुलना की गई है, जो चुनाव आयोग में दाखिल किए गए थे.
इसे भी देखें- मुख्यमंत्री जी 27 हजार को तो ज्वाइन करा नहीं पाए, अब मात्र छह महीने में एक लाख युवाओं को रोजगार देने का कर रहे वादा

इसे भी देखें- सरकारी विभागों के कुल 3,78,816 पदों में 1,61,881 खाली, जानिए किन विभागों में कितने कर्मचारियों की है कमी
आमदनी से अधिक हुआ कांग्रेस का खर्च
एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट में ये यह स्पष्ट किया गया है कि वित्त वर्ष 2015-16 से 2016-17 के बीच भारतीय जनता पार्टी की आमदनी में 81.18 प्रतिशत का उछाल आया है, जिससे उसकी आय 570.86 करोड़ रुपये से 463.41 करोड़ रुपये बढ़कर 1034.27 करोड़ रुपये हो गई. जबकि कांग्रेस की आय 261.56 करोड़ रुपये से 14 फीसदी (36.20 करोड़ रुपये) घटकर 225.36 करोड़ रुपये रह गई. वहीं रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी ने 2016-17 में 710.057 करोड़ रुपये का खर्च बताया जबकि इस कालावधि में कांग्रेस ने 321.66 करोड़ रुपये के खर्च का ब्योरा दिया, जो उसकी इस दौरान की कुल आय से 96.30 करोड़ रुपये अधिक है. इन दोनों पार्टियों ने चंदा या दान को अपनी आय के प्रमुख तीन स्रोतों में से एक बताया है.

इसे भी देखें- हेमंत का हमला : कहा- रघुवर दास सीएम नहीं, दिल्ली के लठैत और माफियाओं के संरक्षक हैं

दोनों दलों ने चंदा, अनुदान को बताया आय का अहम स्रोत
एडीआर की रिपोर्ट कहती है कि बीजेपी ने साल 2016-17 के दौरान 997.12 करोड़ रुपये की आय का स्रोत अनुदान, चंदा या आर्थिक सहयोग बताया. यह राशि भाजपा की कुल आय का 96.41 फीसदी है. वहीं इस बीच कांग्रेस की सर्वाधिक कमाई (115.644 करोड़ रुपये) उसके द्वारा जारी किए गए कूपनों से हुई है, जो उसकी कुल आय का 51.32 फीसदी है. इस दौरान सात राष्ट्रीय पार्टियों ने 2016-17 के दौरान स्वैच्छिक योगदान से 74.98 फीसदी (1,169.07 करोड़ रुपये) धनराशि जुटाई, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष (2015-16) में स्वैच्छिक योगदान से उनकी आमदनी 60 फीसदी (616.05 करोड़ रुपये) रही थी. इन दलों ने 2016-17 में बैंकों से ब्याज के रूप में 128.60 करोड़ रुपये प्राप्त किए.
इसे भी देखें- आशा लकड़ा, संजीव विजयवर्गीय और राजेश गुप्ता समेत 12 पार्षद प्रत्याशियों के खिलाफ दर्ज होगा एफआईआर
देर से ऑडिट रिपोर्ट जमा करते रहे हैं चार दल
अब प्रश्न उठता है कि किन पार्टियों ने कब अपने आय-व्यय एवं स्रोत से संबंधित लेखा-जोखा पेश किया. एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक इन राजनीतिक दलों को अपनी आय-व्यय का विवरण दर्ज कराने की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर थी, लेकिन बीजेपी ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट आठ फरवरी को जमा कराई और कांग्रेस ने उसके अगले महीने 19 मार्च को अपना लेखा-जोखा दर्ज कराया. एडीआर ने कहा है कि बीजेपी, कांग्रेस, एनसीपी और भाकपा पिछले पांच वर्षों से लगातार अपना लेखा-जोखा देर से जमा कर रही हैं.
इसे भी देखें- ग्राम आदिवासी विकास एवं ग्राम विकास समिति के गठन का विरोध, राज्य के सभी मुखिया आर-पार की लड़ाई को तैयार : विकाश महतो
अगर इस रिपोर्ट पर गौर करें तो इसमें यह बातें स्पष्ट रुप से उभरती है कि बीजेपी की कमाई बढ़ी तो उसका खर्च उस अनुपात से कम रहा, जबकि कांग्रेस का खर्च आमदनी से ज्यादा. वहीं बीजेपी की आय बढ़ने की असली वजह केंद्र सहित देश के कई राज्यों में उसकी सरकार का होना भी हो सकता है, जो उसके बढ़ते राजनीतिक कद का परिचायक है. वहीं, कांग्रेस को कई राज्यों में नुकसान होने से उसका असर उसकी आय पर भी गहरे स्तर तक पड़ा है. इन आर्थिक आंकड़ों से वर्तमान का राजनीतिक परिदृश्य भी नजरों के सामने उभरता है. कहना गलत नहीं होगा कि पैसे में बहुत ताकत होती है, और इसके बिना न सियासत हो सकती है, और न आज के दौर में सत्ता के सोपान पर चढ़ा जा सकता है. जिसके पास जितनी आर्थिक ताकत होती है, वो उतनी ही तेजी से अपने कुनबे को बढ़ाता है. वर्तमान में बीजेपी भी अपनी आय की सुपरफास्ट गति से गदगद है.
न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.




