
Akshay Kumar Jha
Ranchi: एनजीटी कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के समकक्ष का कोर्ट माना जाता है. जो देशभर में पर्यावरण से जुड़े मामलों को देखता है और फैसला सुनाता है. जिसके एक फैसले से देश की राजधानी दिल्ली की रफ्तार रुक जाती है. बड़े-बड़े प्रोजेक्ट पर ब्रेक लग जाते हैं. उस कोर्ट की टिप्पणी और टिप्पणी की जानकारी देने के बाद भी सूबे के मुखिया रघुवर दास ने सीएस राजबाला वर्मा और राम कृपाल कंस्ट्रक्शन पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की. बल्कि आंखे बंद किये रहें और रिटायर होने दिया. इतना ही नहीं अब उनके सलाहरकार बनाने की भी चर्चा चल रही है. मुख्यमंत्री की चुप्पी ने सीएस राजबाला वर्मा के लिए आराम से रिटायरमेंट के रास्ते खोल दिये गये. 28 फरवरी को वो रिटायर कर रही हैं. इसी महीने की सात तारीख को सीएम रघुवर दास को उन्हीं के सरकार के मंत्री सरयू राय ने एक पत्र लिखा था. पत्र में पश्चिम सिंहभूम जिला के गुआ-सलाई पथ निर्माण में बरती गयी अनियमितता की बात मंत्री ने सीएम से की थी. मामला 2015 का है. उस वक्त राजबाला वर्मा पथ निर्माण सचिव थीं. मामले में सरकारी की तरफ से सीएस राजबाला वर्मा पर किसी तरह की कोई कार्रवाई की गयी, ना ही इस मामले में उनसे कुछ पूछा गया.
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एनजीटी की टिप्पणी ईमानदार नहीं है राजबाला वर्मा
पश्चिम सिंहभूम जिला के गुआ-सलाई पथ निर्माण कार्य 2015 में हुआ. उस वक्त राजबाला वर्मा पथ निर्माण विभाग की सचिव थीं. उनके कार्यकाल में सड़कों को चौड़ा करने का फैसला लिया गया. इसके लिए विभाग की तरफ से सर्वेक्षण कराया गया. जंगलों की कटाई हुई. मामला पर्यावरण से जुड़ा होने के कारण एनजीटी की कोर्ट में सुनवाई होने लगी. 28 फरवरी 2017 को सुनवाई के दौरान एनजीटी कोर्ट ने पांच लोगों के ईमानदारी पर टिप्पणी की. जिसमें सबसे पहला नाम तत्कालीन सचिव राजबाला वर्मा का था. वहीं कोर्ट ने सड़क बनाने वाली कंपनी पर भी टिप्पणी की. बताते चलें कि सड़क निर्माण का काम राम कृपाल कंस्ट्रक्शन कर रहा था. जो फिलहाल झारखंड हाईकोर्ट के नए भवन का भी निर्माण कर रहा है. कोर्ट का कहना था कि पहली नजर में जो सबूत कोर्ट के सामने लाये गये हैं. उससे लगता है कि पथ निर्माण सचिव राजबाला वर्मा और सड़क बनाने वाली कंपनी ईमानदार नहीं हैं.
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डीएफओ ने अधिकार से बाहर जाकर काम किया
पथ निर्माण कार्य में आरोप लगा कि सारंडा आरक्षित वन प्रमंडल में गुआ-सलाई पर नाम मात्र का यातायात रहता है. मुश्किल से दो-एक बसें, आधा दर्जन चार पहिया और डेढ-दो दर्जन दोपहिया वाहन दिन भर में इस सड़क पर से गुजरते हैं. पर 2015 में राज्य सरकार की तरफ से एक फर्जी सर्वेक्षण रिपोर्ट बनायी गयी. रिपोर्ट में दर्शाया गया कि सड़क पर यातायात का भारी दबाव रहता है. इसलिए सड़क को चौड़ा किया जाए. सड़को को चौड़ा करने में बेतरतीब तरीके से जंगलों की कटाई की गयी. पथ निर्माण विभाग ने सड़क को चौड़ा करने के लिए डीएफओ सारंडा से एक अनुमति पत्र भी ले लिया. लेकिन नियमानुसार डीएफओ इस तरह के पत्र जारी नहीं कर सकता है, जिसमें सड़क के चौड़ीकरण के लिए अनुमति दी जा सके. डीएफओ ने अपने पत्र में लिखा था कि सड़क को 3.5 मीटर से 9 मीटर तक चौड़ा किया जा सकता है.
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सरयू राय ने सीएम को दोबारा पत्र लिखा
सरकार के खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने मामले में एक बार सात फरवरी को सीएम को पत्र लिखा था. दोबारा एक बार फिर से मंत्री सरयू राय ने सीएम रघुवर दास को पत्र लिखा है. अपने पत्र में सरयू राय ने लिखा है कि गुआ-सलाई पथ निर्माण में हुई अनियमितताओं को लेकर कार्रवाई की जाये. उन्होंने कहा कि इससे पहले भी वो मामले को लेकर पत्र लिख चुके हैं, लेकिन शायद मुख्यमंत्री को इसे देखने का समय नहीं मिला. दोबारा अपनी चिट्ठी के साथ सरयू राय ने 23 पन्ने की एनजीटी कोर्ट की सुनवाई के कागजात भी सौंपे हैं. सरयू राय ने सीएम से कहा कि मामले में बिना देरी किये हुए कार्रवाई करने का अनुरोध किया है.
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