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एचएमटी की 3 कंपनियों को बंद करने की मंजूरी

नई दिल्ली/बेंगलुरू : आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने बुधवार को हिंदुस्तान मशीन टूल्स (एचएमटी) की तीन कंपनियों -एचएमटी वाचेज, एचएमटी चिनार वाचेज और एचएमटी बेयरिंग्स- को बंद करने की मंजूरी दे दी। ये कंपनियां घाटे में चल रही थीं। सीसीईए ने अपने एक बयान में कहा, “427.48 करोड़ रुपये के नकद सहयोग के साथ एचएमटी लिमिटेड की घाटे में चल रही तीन सहयोगी कंपनियां -एचएमटी वाचेज लिमिटेड, एचएमटी चिनार वाचेज लिमिटेड और एचएमटी बेयरिंग्स लिमिटेड करीब 1,000 कर्मचारियों को आकर्षक वीआरएस/वीएसएस देकर और उनके बकाए का निपटारा कर उन्हें कंपनी की सेवा से अलग करने के बाद बंद हो जाएंगी।”

कर्मचारियों को 2007 के वेतनमानों के आधार पर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) लाभ दिया जाएगा।

बयान में कहा गया है कि तीनों कंपनियों की चल-अचल संपत्तियों का निपटारा सरकार की नीति के तहत किया जाएगा।

31 केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (सीपीएसई) में से सिर्फ 12 ही लाभ में चल रही हैं और शेष 19 घाटे में चल रही हैं।

भारी उद्योग विभाग घाटे में चल रही प्रत्येक सीपीएसई की जांच कर यह तय कर रही है कि उन्हें लाभ में वापस लाने की कोशिश कितनी व्यावहारिक होगी।

बयान में कहा गया है, “इस प्रक्रिया के तहत घाटे में चल रही जिन कंपनियों में संभावना है, उसका जीर्णोद्धार किया जा रहा है और जो पूरी तरह बीमार हैं, उनका या तो विनिवेश किया जा रहा है या कर्मचारियों को वाजिब मुआवजा देकर उन्हें बंद किया जा रहा है।”

एचएमटी को 2015-16 की दूसरी तिमाही में 24.25 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है।

एचएमटी की घड़ी बनाने वाली सहायक कंपनी के बेंगलुरू में दो (तुमकुर और रानीबाग में) संयंत्र हैं और इनमें 1,004 कर्मचारी काम कर रहे हैं।

चिनार इकाई में 31 कर्मचारी हैं। इसके कश्मीर के श्रीनगर में एक बंद संयंत्र और जम्मू में एक एसेंबली इकाई हैं।

बेयरिंग इकाई में 56 कर्मचारी हैं।

अक्टूबर 2015 में जब जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल भारत आई थीं, तब एचएमटी उन पांच कंपनियों में थी, जिसने जर्मनी की कंपनियों के साथ साझेदारी की थी।

एचएमटी ने मशीन उपकरण बनाने के लिए फ्राउनहोफर के साथ समझौता किए थे।

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