श्रीनगर : जम्मू एवं कश्मीर के माछिल इलाके में वर्ष 2010 में ‘फर्जी मुठभेड़’ में तीन युवकों की मौत के मामले में सात सैनिकों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। सैन्य सूत्रों ने यह जानकारी दी। राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी हालांकि, एक ट्वीट में बताया कि फर्जी मुठभेड़ मामले में सात जवानों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
सैन्य सूत्रों ने कहा कि दो अधिकारियों सहित पांच जवानों को समरी जनरल कोर्ट मार्शल द्वारा सजा सुनाई गई, लेकिन यह सजा पुष्टि का विषय है।
फर्जी मुठभेड़ को अंजाम देने वाले सात जवानों की पहचान कमांडिंग अफसर कर्नल डी.के. पठानिया, कैप्टन उपेंद्र, हवलदार देवेंद्र, लांस नायक लख्मी और लांस नायक अरुण कुमार के रूप में हुई है।
इन सैनिकों ने तीन मई, 2010 को कुपवाड़ा जिले के नजदीक माछिल इलाके में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास शहजाद अहमद, मुहम्मद शफी और रियाज अहमद की गोली मारकर हत्या कर दी थी। तीनों युवक बारामूला जिले के नदिहाल गांव के रहने वाले थे।
सेना ने उस वक्त दावा किया था कि तीनों युवक पाकिस्तान से प्रशिक्षण प्राप्त आतंकवादी हैं, जो कश्मीर घाटी में घुसपैठ करने की कोशिश करते समय मार गिराए गए।
पुलिस जांच में यह बात सामने आई थी कि सेना के साथ काम करने वाले अब्बास हुसैन और बशीर अहमद उन तीनों युवकों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर अपने साथ ले गए थे।
तीनों को माछिल ले जाया गया और बाद में मौत के घाट उतार दिया गया।
उमर ने सैनिकों को मिली सजा का स्वागत किया है।
उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “मैं आशा करता हूं कि हमें दोबारा माछिल फर्जी मुठभेड़ जैसी घटनाएं देखने को नहीं मिलेंगी। इस फैसले को हम ऐसी गुस्ताखी करने वालों के लिए एक चेतावनी के रूप में लें।”
(आईएएनएस)




