रांची: भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) के 14वें राष्ट्रीय अधिवेशन में भारत स्वाभिमान मंच और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा हंगामा करने और उस दौरान वरीय संस्कृति कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार की घटना की निंदा की गयी है। विरोधस्वरूप रांची के संस्कृतिकर्मियों व साहित्यकारों ने एक मौन मार्च निकाला। इस मार्च में शामिल संस्कृतिकर्मी और साहित्यकार मुंह में काली पट्टी बांध कर रांची के शहीद चौक से निकले थे। यह मार्च सर्जना चौक से होते हुए शहीद अल्बर्ट एक्का चौक पहुंची। प्रदर्शनकारियों ने अभिव्यक्ति के अधिकारों के संरक्षण से संबंधित कई कलात्मक पोस्टर से भी संदेश दिया। सभा स्थल पर इप्टा, रांची के अध्यक्ष सह चर्चित कहानीकार पंकज मित्र ने कहा कि इस तरह की घटना कोई घटना नहीं, बल्कि पूरे देश में इसका सिलसिला चल चुका है। अभी हाल में हरियाणा केन्द्रीय विश्वविद्यालय में ए.बी.वी. पी. के कार्यकर्त्ताओं ने महाश्वेता देवी की कहानी द्रौपदी के नाट्य मंचन के दौरान हंगामा किया है जो निंदनीय है। इस तरह की घटनाएँ संवैधानिक अधिकारों पर हमला है।
इस मार्च में ललित आदित्य, मिथिलेश जी, एम जेड खान, उमेश नजीर, सच्चिदानंद, अरुण नायक, ऋषिकेश, फरजाना फारुकी, श्यामल चक्रवर्ती, अजय कुमार सिंह सहित कई लोग शामिल थे। इसमें प्रगतिशील लेखक संघ, जनवादी लेखक संघ और झारखण्ड जन संस्कृति मंच के प्रतिनिधि शामिल हुए।




