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इंसानियत की मिसाल बीडीओ पवन महतो, एक बेसहारा को अपनाकर दी नई जिंदगी

Priyanka: कहते हैं इंसान वही जो इंसान के काम आये, क्योंकि इंसानियत से बढ़कर सच्चा और नेक रिश्ता कोई दूसरा नहीं होता. कुछ ऐसी ही शख्सियत के मालिक है गुमला जिले के कामडारा प्रखंड में पोस्टेड बीडीओ पवन कुमार महतो. झारखंड प्रशासनिक सेवा के इस अधिकारी की पहल पर आज इनके पूरे परिवार को नाज है. साथ ही बीडीओ पवन महतो उनलोगों के लिए एक मिसाल हैं जो समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं. दरअसल पवन महतो ने ना सिर्फ एक बेसहारा बच्ची उषा को आश्रय दिया, बल्कि अच्छी तालीम के साथ-साथ उस अनाथ को भरेपूरे परिवार का प्यार भी दिया. इतना ही नहीं, अब उसकी शादी की भी तैयारी है. 6 जुलाई को उषा की शादी होनेवाली है. बीडीओ पवन महतो की बस यही इच्छा है कि वो एक पिता की जिम्मेदारी को अच्छी तरह से निभा पाये.

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2014 में लिया था गोद

अनाथ उषा की ये कहानी शुरु होती है 2014 से, जब वो बोकारो जिले के चंद्रपुरा प्रखंड कार्यालय में राशन कार्ड बनवाने आयी थी. या यूं कहे कि उस दिन उषा की जिंदगी ने करवट बदली. दरअसल उषा नम आंखों से ब्लॉक आफिस पहुंची और राशन कार्ड बनवाने का निवेदन बीडीओ पवन महतो से किया, उन्होंने बच्ची को इंतजार करने को कहा. लेकिन काम की व्यस्तता के बीच पवन, उषा को भूल गये. देर शाम कार्यालय के एक कर्मचारी ने उन्हें उषा की याद दिलाई. जिसके बाद उन्होंने कहा कि उसे बुलाओ, तब उन्हें पता चला कि जिस तरह से रोते-रोते वो लड़की वहां पहुंची थी, वैसे ही लौट गयी. लेकिन उस रात पवन महतो सो नहीं पाये. उस बच्ची की बेबसी, आंखों से झलकता उसका दर्द बार-बार बीडीओ साहब को बेचैन कर रहा था. सुबह उठकर उन्होंने सबसे पहले उषा को खोजने की कोशिश की. इस दौरान उन्हें उषा बकरी चराते दिखी. जब बच्ची बीडीओ के पास आयी थी, तब वो उम्र के उस पड़ाव पर थी, जिसमें उसे किसी योजना का लाभ नहीं मिल सकता था. लेकिन उषा की मदद करने की कसक पवन महतो को अंदर ही अंदर कचोट रहा था.

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जिसके बाद उन्होंने फेसबुक पर अपनी बेचैनी और बच्ची की मदद ना कर पाने की बेबसी बयां की. इस पोस्ट पर कुछ लोगों ने व्यंग्य किया, तो कुछ ने सुझाव दिये. लेकिन एक बेसहारा की मदद करने के अंतर्द्वंद से गुजर रहे पवन महतो को उनके परिवार, उनकी पत्नी का साथ मिला और उन्होंने उषा को गोद लेने का फैसला किया. उस घड़ी को याद करते हुए भी पवन महतो कहते है कि उस दौरान मेरे फैसले का कुछ लोगों ने मजाक बनाया, तो कुछ ने तीखे कटाक्ष किये. लेकिन उन्होंने अपने फैसले को पूरा किया और एक लाचार- बदहाल जिंदगी जी रही उषा को गोद लिया. आज उषा की जिंदगी पूरी तरह से बदल चुकी है. एक धर्मपिता के तौर पर बीडीओ साहब ने अपनी जिम्मेदारियां निभाते हुए उषा की शादी तय की है. और आनेवाली 6 जुलाई को उसकी शादी होने वाली है.

क्या कहती है उषा

2014 से पहले लाचारगी, मुफलिसी, दो जून की रोटी के लिए मशक्कत, बिन मां-बाप के बेसहारा-बेबस… कुछ ऐसी थी उषा की जिंदगी. बकरी चराकर वो किसी तरह से अपना और अपनी बूढ़ी बुआ का पेट भरने की कोशिश करती थी. उषा की परवरिश कर पाने में विफल उसकी बूढ़ी बुआ ने भी उसे ये कहकर घर से निकाल दिया कि, ‘निकल जाओ घर से कोई मदद मिले तो ही घर लौटना नहीं तो उधर ही मर जाना.’ आज की तारीख में उसी उषा का भरा-पूरा परिवार है, वो भुरकुंडा के जेएन कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई कर रही है. और अपने धर्मपिता की तरह अधिकारी बनना चाहती है. इतना ही नहीं, एक जिंदगी उषा का इंतजार कर रही है. उसकी सगाई हो चुकी है. छह जुलाई को उसका विवाह होनेवाला है. ये है उषा की आज की जिंदगी. इस बदलाव पर उषा फुली नहीं समाती. उसका कहना है कि बीडीओ पवन महतो के एक साहसिक फैसले ने उसकी जिंदगी बदल दी. उषा का कहना है कि जिस तरह मुझे मम्मी पापा मिले हैं सभी बेसहारा और लाचार बच्चों को ऐसे ही माता-पिता का प्यार मिले और उनकी जीवन में किसी भी तरह का कोई परेशानी ना रहे.

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झारखंड प्रशासनिक सेवा के तीसरे बैच के अधिकारी पवन कुमार महतो की पहल की आज हर कोई तारीफ कर रहा है. उनकी एक कोशिश ने एक बेसहारा के चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी. बता दें कि पवन महतो वर्तमान में गुमला के कमडारा प्रखंड में पोस्टेड हैं. अपनी पहली पोस्टिंग के दौरान उन्होंने उषा को गोद लिया था. उनकी इस पहल में उनके परिवार का बहुत बड़ा सहयोग रहा. जिसमें उनकी पत्नी और बच्चों ने खुले ह्दय से उषा का स्वागत किया और उसे अपने परिवार का हिस्सा माना.

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