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Patna, 10 November : वरिष्ठ भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने आरक्षण की समीक्षा के लिए केंद्र से आज एक आयोग के गठन की मांग की है. कहा कि पता लगाया जाना चाहिए कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा को बढ़ाया जा सकता है या नहीं. आरक्षण पर यहां एक समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री सिन्हा ने कहा कि संविधान लागू होने के 67 साल बाद भी आरक्षण एक ‘अधूरा एजेंडा’ है.
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आरक्षण से काफी कुछ बदला
अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे सिन्हा ने कहा कि एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षण लागू करने से समाज में बदलाव आए हैं लेकिन अब भी बहुत कुछ किये जाने की जरूरत है और इसके लिए केंद्र सरकार को इन समुदायों के मौजूदा स्तर का अध्ययन करने के लिए नये आयोग का गठन करना चाहिए.
उन्होंने कहा कि आयोग को कई पहलुओं पर विचार करना होगा. मसलन एससी, एसटी और ओबीसी श्रेणियों के लोगों का आरक्षण के लिहाज से मौजूदा स्तर क्या है. उनकी क्या समस्याएं और आने वाले दिनों में इन समस्याओं से कैसे निपटा जाएगा. इसके अलावा इन समुदायों को प्रोन्नति में आरक्षण, छात्रवृत्ति और इनके सामाजिक उत्थान जैसे विषय भी शामिल हों.
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आयोग अध्ययन कर सिफारिश दे
सिन्हा ने कहा, ‘‘आयोग को उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा को जरूरत लगने पर बढ़ाने समेत उपरोक्त विषयों पर अपनी सिफारिश देनी चाहिए.’’ बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और जदयू नेता उदय नारायण चौधरी के गैर-राजनीतिक संगठन ‘वंचित वर्ग मोर्चा’ ने यहां कार्यक्रम का आयोजन किया था.




