
MUMBAI : देश में जिस रफ्तार से बीजेपी का कुनबा बढ़ता जा रहा है. कई प्रदेश कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के हिस्से से निकलकर बीजेपी की झोली में आ रहे हैं वो वाकई कांग्रेस और गैर बीजेपी विचारधारा वाले दलों के लिए चिंता की बात है. ऊपर से त्रिपुरा , नागालैंड और मणिपुर के चुनाव परिणामों में बीजेपी को संजीवनी मिलने से तमाम विपक्षी दलों के लिए ये सोचने का वक्त आ गया है कि उन्हें अब बीजेपी के खिलाफ एकजुट होना चाहिए. यह चिंता पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष और पार्टी की शीर्ष नेता सोनिया गांधी ने भी जताई है. सोनिया गांधी ने आज कहा कि ‘‘समान विचारधारा’’ वाले दलों को देश के व्यापक हित में स्थानीय मतभेदों को दूर करने की आवश्यकता है. सोनिया का बयान इस रूप में भी विचारणीय है कि उनके चिंता व्यक्त करने का संदर्भ और समय क्या है. जाहिर सी बात है जहां बीजेपी के लिए खाता खोलना तक मुश्किल था, वहां सरकार बना लेना किसी चमत्कार से कम नहीं, लेकिन विपक्षी दलों के लिए ये पराजय पर आत्ममंथन का भी समय है, जिसे सोनिया गांधी ने बेहद जरूरी बताया है.
MUMBAI : देश में जिस रफ्तार से बीजेपी का कुनबा बढ़ता जा रहा है. कई प्रदेश कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के हिस्से से निकलकर बीजेपी की झोली में आ रहे हैं वो वाकई कांग्रेस और गैर बीजेपी विचारधारा वाले दलों के लिए चिंता की बात है. ऊपर से त्रिपुरा , नागालैंड और मणिपुर के चुनाव परिणामों में बीजेपी को संजीवनी मिलने से तमाम विपक्षी दलों के लिए ये सोचने का वक्त आ गया है कि उन्हें अब बीजेपी के खिलाफ एकजुट होना चाहिए. यह चिंता पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष और पार्टी की शीर्ष नेता सोनिया गांधी ने भी जताई है. सोनिया गांधी ने आज कहा कि ‘‘समान विचारधारा’’ वाले दलों को देश के व्यापक हित में स्थानीय मतभेदों को दूर करने की आवश्यकता है. सोनिया का बयान इस रूप में भी विचारणीय है कि उनके चिंता व्यक्त करने का संदर्भ और समय क्या है. जाहिर सी बात है जहां बीजेपी के लिए खाता खोलना तक मुश्किल था, वहां सरकार बना लेना किसी चमत्कार से कम नहीं, लेकिन विपक्षी दलों के लिए ये पराजय पर आत्ममंथन का भी समय है, जिसे सोनिया गांधी ने बेहद जरूरी बताया है, क्योंकि कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी पार्टियों के समक्ष खोयी जमीन बचाने के साथ-साथ बीजेपी को उखाड़ फेंकने की भी चुनौती है. सोनिया गांधी ने कहा, ‘‘मैं कांग्रेस संसदीय दल अध्यक्ष के रूप में राहुल (गांधी) और अन्य सहकर्मियों के साथ यह देखने के लिए समान विचारधारा वाले दलों के साथ नियमित बैठक करती रही हूं कि क्या हम साथ मिलकर काम कर सकते हैं.’’ सोनिया ने कहा, ‘‘हमने पहले भी मिलकर काम किया है. संसद में समन्वय है, विशेषकर राज्यसभा में.’’ उन्होंने हालांकि स्वीकार किया कि ऐसे दलों का साथ आना एक कठिन काम है.
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कठिन तो है, मगर एकजुट होना जरूरी : सोनिया गांधी
सोनिया ने कहा, ‘‘हमारे सहित यह सभी दलों के लिए कठिन है. राष्ट्रीय स्तर पर कुछ मुद्दों पर हम साथ आ सकते हैं. लेकिन जमीनी स्तर पर हम विरोधी हैं. हमारे सहित सभी दलों की ओर से काफी दबाव है जैसे कि पश्चिम बंगाल और अन्य कई राज्यों में.’’ उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन यदि हममें से सभी व्यापक परिदृश्य में सोचें. यदि हम महसूस करते हैं और देश की चिंता करते हैं तो हमें स्थानीय मतभेदों को दूर करना होगा.’’
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बीजेपी के खिलाफ संयुक्त मोर्चा बनाने की तैयारी
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार भाजपा के खिलाफ संयुक्त मोर्चा बनाने के ताजा प्रयास के तहत सोनिया ने 13 मार्च को नयी दिल्ली में विपक्षी दलों को रात्रिभोज पर आमंत्रित किया है. उन्होंने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर यह पहल विपक्ष को मजबूत करने और संयुक्त मोर्चे की नींव रखने की दिशा में एक कदम है.
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