नई दिल्ली : पटियाला कोर्ट से देशद्रोह के आरोपी जेएनयू के छात्र कन्हैया कुमार ने जेल से निकलने के बाद जेएनयू में जमकर दहाड़ लगायी। छात्रों के साथ पहले से भी बुलंद आवाज में उन्होंने गरीबी से आजादी का नारा लगाया। कन्हैया ने तकरीबन 50 मिनट के अपने भाषण पर केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कुछ मीडिया चैनलों के खिलाफ जमकर हमला बोला।
कन्हैया के भाषण के मुख्य अंश :
जवान के बाप भाई मर रहे हैं उनके लिए सरकार क्यों नहीं बात करती है।
देश से नहीं देश में आजादी मांग रहे हैं।
जिसके पिताजी कमजोर वर्ग के हो वहीं पुलिस में नौकरी करता है।
एक सिपाही ने पूछा ये लाल सलाम लाल सलाम क्या है।
मैंने कहा कि लाल मतलब क्रांति और सलाम मतलब क्रांति को सलाम
एबीवीपी नकली इंकलाबी और हम असली इंकलाबी हैं।
वर्दी के लिए 210 रुपए मिलता है, इतने में तो अंडर गार्मेंट भी नहीं मिलता।
इसे से तो आजादी चाहते हैं, भुखमरी से, गरीबी से।
सिपाही ने कहा कि पहले सोचा था कि जब तुम आओगे तो बहुत पीटेंगे, लेकिन तुमसे बात करके लग रहा है जाकर उनको जाकर पीट दूं।
ये वो सिपाही था जो आम परिवार का लड़का है, वह पीएचडी करना चाहता था लेकिन उसे जेएनयू नहीं मिला, उसे जेनएयू में दाखिला नहीं मिला।
एक कमजोर आदमी पीएचडी ना कर सके इसके प्रयास हो रहा है।
राजनैतिक लोकतंत्र से नहीं सामाजिक लोकतंत्र से काम चलेगी बाबा साहब ने कहा था।
एक चपरासी का बेटा और एक राष्ट्रपति का बेटा एक स्कूल में बात कर सके इसलिए ये लड़ाई है।
प्रधानमंत्री सावरकर की बात कर रहे थे दिल कर रहा था टीवी में घुस कर प्रधानमंत्री जी का सूट पकड़कर कहूं कि हिटलर की भी बात कर लीजिए।
जेएनयू मे 60 फीसदी लड़कियां भी आती है।
मेरा परिवार 3000 रुपए में चलता है, क्या मैं बड़ी-बड़ी युनिवर्सिटी में नहीं पढ़ सकता हूं।
सीताराम येचुरी, राहुल गांधी, डी राजा, केजरीवाल को मेरे साथ देशद्रोह के केस में डाल दिया है।
जो लोग जेएनयू के पक्ष में बोल रहे हैं वो सही को सही और गलत को गलत कह रहे हैं। इन्हें गालिया दी जा रही हैं, धमकी दी जा रही है।
मुझसे कुछ कॉस्टेबल ने पूछा कि सच में नारे लगाये हैं बोला हां लगाये हैं, फिर जाउंगा तो फिर लगाउंगा गरीबी से आजादी का।
इस सरकार को अभी 3 साल अभी और झेलना है, इनकी अगली तैयारी है राम मंदिर बनायेंगे।
मुझसे सिपाही ने पूछा कि धर्म मानते हो मैं बोला धर्म जानते हैं, पहले जान ले फिर मान लेंगे।
देश के 69 फीसदी लोगों ने उस मानसिकता को वोट दिया है जो आपकी मानसिकता के खिलाफ है।
आप अपनी हमेशा के लिए लिए जीत मत समझिये, सौ बार झूठ को झूठ कहने से सच हो सकता है लेकिन यह सच के साथ नहीं होता है। सच हमेशा सच रहता है।
देश के बाहर ये लोग भटकाव वाला प्रस्ताव लाते हैं।
इस देश के भीतर जो हो रहा है वह खतरनाक प्रवृत्ति है, इसीलिए मैं किसी व्यक्ति, पार्टी या मीडिया के लिए नहीं कह रहा हूं।
अगर स्वामी तार्किक तरीके से बहस करके समझा ले तो मैं उनकी बात मान लुंगा कि चार महीने के लिए जेएनयू को बंद करवा दें लेकिन अगर साबित नहीं कर सके तो पहले की ही तरह देश छोड़कर चले जाये।
सबका प्रोग्राम नागपुर में तय हो रहा है, एक ही तख्ती के साथ पूर्व सैनिक, एबीवीपी के कार्यकर्ता और हिंदू सेना के लोग मार्च निकालते हैं।
इस संघर्ष को तुम दबा नहीं पाओगे, तुम जितना दबाओगे हम उतना खड़े होंगे।
ये लंबी लड़ाई है, उसे बिना रुके लड़ना होगा। जेएनयू के छात्र आजादी चाहते हैं भारत से नहीं गरीबी से आजादी चाहते हैं।
(साभार : वन इंडिया।)




