
London: ब्रिटिश अदालत मंगलवार को इस बात पर फैसला करेगी किविकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे के खिलाफ ब्रिटेन की ओर से जारी गिरफ्तारी वारंट को वापस लिया जाये या नहीं. अगर अदालत वारंट वापस लेने का फैसला करती है तो असांजे लंदन स्थित इक्वेडोर दूतावास से बाहर आ सकते हैं.
असांजे पिछले पांच साल से इक्वाडोर के दूतावास में हैं
असांजे पिछले पांच साल से इक्वाडोर के दूतावास में हैं. अगर अदालत असांजे के पक्ष में फैसला देती है तो वह जून 2012 में दूतावास में शरण लेने के बाद वह पहली बार वहां से बाहर कदम रखेंगे. साल 2010 में बलात्कार और यौन उत्पीड़न के आरोपों में स्वीडन में चल रही जांच के सिलसिले में एक यूरोपीय गिरफ्तारी वारंट और स्वीडन प्रत्यर्पित होने से बचने की खातिर असांजे इक्वाडोर के दूतावास में दाखिल हुए थे. स्वीडन ने पिछले साल असांजे के खिलाफ जांच बंद कर दी थी. लेकिन ब्रिटिश पुलिस उन्हें अब भी गिरफ्तार करना चाहती है, क्योंकि विकीलीक्स के संस्थापक ने प्रत्यर्पण के खिलाफ अपनी असफल लड़ाई के दौरान जमानत की शर्तों का उल्लंघन करने के बाद अदालत में आत्मसमर्पण नहीं किया था.
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असांजे के दांतों और कंधों में है तकलीफ
असांजे के वकील मार्क समर्स ने लंदन की एक अदालत को पिछले हफ्ते बताया था कि वारंट का अब कोई मतलब नहीं रहा. उन्होंने कहा कि असांजे ‘‘जेल जैसे हालात’’ में रह रहे हैं, उनकी ‘‘मनोवैज्ञानिक सेहत’’ में गिरावट आयी है और वह ‘‘गंभीर खतरे’’ में हैं. अदालत को बताया गया कि 46 साल के असांजे के दांतों और कंधों में तकलीफ है और वह अवसाद की चपेट में हैं. हालांकि, अभियोजन पक्ष के वकील एरॉन वॉटकिंस ने असांजे की तरफ से पेश की गयी दलीलों को ‘‘बकवास’’ करार दिया था. असांजे दूतावास छोड़ने से इनकार कर चुके हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि 2010 में अमेरिकी सेना के खुफिया दस्तावेजों और राजनयिक केबलों को प्रकाशित करने के मामले में उन्हें अमेरिका प्रत्यर्पित किया जा सकता है. पिछले साल अमेरिका के अटॉर्नी जनरल जेफ सेशंस ने कहा था कि असांजे की गिरफ्तारी एक ‘‘प्राथमिकता’’ है.
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