
रविवार को बोकारो के गोमिया ब्लॉक में भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का दौरा था. उन्होंने गोमिया में एक कोल बेड मिथेन कुआं का उद्घाटन और स्वांग के खुदगड़ा में गैस स्टॉक सेंटर का शिलान्यास किया. जाहिर तौर पर ऐसी परियोजनाओं से देश और राज्य को काफी फायदा होगा. ओएनजीसी केंद्र सरकार का एक लोकउपक्रम है. राज्य में इस कंपनी को किसी तरह की कोई परेशानी ना हो इसकी पूरी जवाबदेही राज्य सरकार की होती है. आने वाले समय में ओएनजीसी को राज्य में 13 नये कुएं खोदने हैं. चार तो इसी साल में खोदने का लक्ष्य है. लेकिन जमीन की लेन-देन में राज्य में हो रही देरी की वजह से कंपनी ने सरकार के पास चिंता जाहिर की. राज्य सरकार की ओर से भी इस समस्या को गंभीरता से लिए जाने का आश्वासन मिला.
Akshay Kumar Jha
Ranchi: रविवार को बोकारो के गोमिया ब्लॉक में भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का दौरा था. उन्होंने गोमिया में एक कोल बेड मिथेन कुआं का उद्घाटन और स्वांग के खुदगड़ा में गैस स्टॉक सेंटर का शिलान्यास किया. जाहिर तौर पर ऐसी परियोजनाओं से देश और राज्य को काफी फायदा होगा. ओएनजीसी केंद्र सरकार का एक लोकउपक्रम है. राज्य में इस कंपनी को किसी तरह की कोई परेशानी ना हो इसकी पूरी जवाबदेही राज्य सरकार की होती है. आने वाले समय में ओएनजीसी को राज्य में 13 नये कुएं खोदने हैं. चार तो इसी साल में खोदने का लक्ष्य है. लेकिन जमीन की लेन-देन में राज्य में हो रही देरी की वजह से कंपनी ने सरकार के पास चिंता जाहिर की. राज्य सरकार की ओर से भी इस समस्या को गंभीरता से लिए जाने का आश्वासन मिला.

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कंपनी की बातों को केंद्रीय मंत्री ने गलत ठहराया
कंपनी के मुखिया यानि पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गोमिया में न्यूज विंग के एक सवाल के जवाब में कहा कि झारखंड में कंपनी को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं है. उन्होंने सचिव स्तर के अधिकारियों का नाम लिया और कहा कि यह सब अधिकारी कंपनी को काफी मदद कर रहे हैं. सीएनटी एक्ट को लेकर किसी तरह की कोई परेशानी नहीं है. रिपोर्टर ने जब मंत्री जी से कहा कि इससे संबंधित कागजात उसके पास है, तो मंत्री ने जोर देकर बोला कि वो इस कंपनी के हेड हैं और कंपनी का हेड कह रहा है कि झारखंड में सीएनटी एक्ट को लेकर किसी तरह की कोई परेशानी नहीं है. ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि मंत्री जी के सामने सबूत पेश किए जाएं. नीचे लगी तस्वीर में आप साफ देख सकते हैं कि कंपनी ने सरकार के सामने किस बात को लेकर चिंता जाहिर की थी.
तस्वीर नंबर-1

इस तस्वीर में मोटे-मोटे अक्षरों में लिखा है कि कोल बेड मिथेन गैस के कुएं के लिए राज्य सरकार की तरफ से ओएनजीसी को क्या मदद चाहिए. कंपनी ने सरकार से कहा है इस साल हजारीबाग के करनपुरा ब्लॉक (केरेडारी, डंडवा और बरकागांव प्रखंड मिला कर) कंपनी को कोल बेड मिथेन उत्पादन के लिए खुदाई करनी है. लेकिन जमीन नहीं मिलने की वजह से प्रोस्पेक्टिंग माइनिंग लीज नहीं मिल पा रहा है. इससे प्रोजेक्ट शुरू करने में काफी देर हो रही है. कंपनी ने यह भी कहा है कि इस बाबत भू-राजस्व विभाग के सचिव से लगातार बात हो रही है. ऐसे में मंत्री जी का कहना है कि कंपनी को कोई परेशानी नहीं है, कितना जायज है.
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तस्वीर नंबर-2

कंपनी ने बैठक के दौरान प्वाइंट ऑफ सबमिशन में सीएनटी एक्ट का साफ उल्लेख किया है. कंपनी का कहना है कि सीएनटी एक्ट की वजह से काफी परेशानी होती है. सीएनटी एक्ट के मामले की सुनवाई डीसी कोर्ट में होती है. डीसी कोर्ट की सुनवाई काफी बोझिल होती है. ओएनजीसी ने यह भी कहा कि ज्यादातर सरकारी जमीनों पर लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है. ऐसे में प्रोजेक्ट के लिए एप्रोच रोड (संपर्क मार्ग) बनाने में परेशानी होती है. जिन लोगों को सरकारी जमीन पर सालों से कब्जा है, वो ज्यादा परेशानी की वजह है. कंपनी ने कहा कि जिन लोगों ने 30-85 साल से सरकारी जमीन पर कब्जा जमाए हुए हैं, वो जमीन देने के एवज में मुआवजे की डीमांड करते हैं. जो स्वीकारा नहीं जा सकता. यहां तक कि लोग जो जमीन की रसीद दिखाते हैं वो 2009 या 2011 की होती है. इससे पता नहीं चल पाता है कि जमीन पर फिलहाल किसका कब्जा है.
लेकिन पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान क्या कहते हैं देखें वीडियो में
चंद सवाल
– अगर पेट्रोलियम मंत्री सही हैं, तो क्या कंपनी के अधिकारी बिना बात सरकार को परेशान कर रहे हैं.
– क्या कंपनी को वाकई सीएनटी एक्ट से परेशानी है, तो इसका समाधान नहीं निकलना चाहिए.
– केंद्रीय मंत्री क्या परेशानी को परेशानी नहीं मान कर कंपनी के मकसद को खतरे में नहीं डाल रहे हैं.
– क्या मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और कंपनी के बीच कम्यूनिकेशन गैप है.
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