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#Zero_Tolerance वाली रघुवर सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि भी हो गयी दागदार

Surjit Singh

अति सुंदर

गौरव का क्षण

दर्शनीय है भवन

Sanjeevani

चुनिंदा विधानसभा में एक

सपना साकार हुआ

तारीफ कम पड़ेगी

अकल्पनीय है नया हाउस…

आपको याद है. 12 सितंबर का वह दिन. जिस दिन प्रधानमंत्री ने झारखंड विधानसभा के नये भवन का उद्घाटन किया था. 13 सितंबर को हमें अखबारों में यही सब पढ़ने को मिला था. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इसे अपनी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि बतायी थी. तब कौन जानता था. उनकी यह उपलब्धि भी दागदार हो जायेगी.

तकनीकि तौर पर देखा जाये तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस विधानसभा भवन का उद्घाटन किया, वह उस वक्त वह उद्घाटन के लायक ही नहीं था. कांट्रैक्टर ने आज की तारीख तक विधानसभा भवन सरकार को हैंडओवर ही नहीं किया है. इसका मतलब झारखंड सरकार ने एक ऐसे भवन का उद्घाटन प्रधानमंत्री के हाथों करा दिया, जो उस वक्त सरकार का था ही नहीं.

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इतना ही नहीं रघुवर सरकार ने तो उद्घाटन के दूसरे ही दिन नये भवन में एक दिन का विशेष सत्र भी आयोजित करा दिया. आज अखबारों में विधानसभा सचिव का बयान छपा है कि कांट्रैक्टर ने अभी तक भवन हैंड ओवर नहीं किया है. यह शर्मनाक है. जरा सोचिये, ऐसा क्यों किया गया? किस बात की जल्दबाजी थी सरकार को? कि सारे नियम कायदे तक पर रख दिये गये.

अब बात विधानसभा भवन, उसके कांट्रैक्टर रामकृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन और सीएम रघुवर दास की. विधानसभा भवन का ठेका रामकृपाल कंस्ट्रक्शन को मिले, इसके लिए कितने प्रपंच किये गये यह सर्वविदित है. तब की भवन निर्माण सचिव राजबाला वर्मा और रामकृपाल कंस्ट्रक्शन के संबंध जग जाहिर हैं. बाद में राजबाला वर्मा मुख्य सचिव बनीं. रघुवर दास और राजबाला वर्मा में गजब की ट्यूनिंग है. मैनहर्ट कंपनी को नाजायज लाभ पहुंचाने के मामले में निगरानी आयुक्त रहते राजबाला वर्मा ने रघुवर दास की खूब मदद की. तो रघुवर दास ने मुख्यमंत्री रहते राजबाला वर्मा का बचाव दायरे से बाहर जाकर ही नहीं अपनी सरकार को जलील होने की हद तक किया.

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रामकृपाल कंस्ट्रक्शन और रघुवर सरकार का एक और रिश्ता इन दिनों चर्चा में है. कहा जाता है कि जिस तरह रघुवर सरकार में रामकृपाल कंस्ट्रक्शन को भरपूर लाभ दिया गया, उसी तरह रघुवर सरकार में पांच लोग सबसे अधिक प्रभावशाली और ताकतवर रहे हैं. तीन सरकारी व दो प्राइवेट. इनमें से ही एक का बहुत ही करीबी रिश्तेदार राकृपाल कंस्ट्रक्शन से जुड़ा हुआ है. इसका खुलासा फिर कभी.

बहरहाल, चार दिसंबर की रात की अगलगी की घटना ने विधानसभा के बारे में प्रचलित बहुत सारी बातों को गलत साबित कर दिया है. बताया गया था, सबसे सुरक्षित, हाईटेक, अकल्पनीय और न जाने क्या-क्या. यह भवन तो अब शॉर्ट सर्किट के लिए जाना जायेगा. ऐसे में अब भवन निर्माण विभाग की जिम्मेदारी बढ़ जाती है. वह दोबारा से भवन की जांच करे. जो कमियां हैं, उसे हर कीमत पर दूर कराये. ताकि सच में यह विधानसभा देश के चुनिंदा विधानसभा में शामिल हो सके और अगलगी से जो दाग लगे हैं, वह धुल जायें.

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