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सरकार के फैसलों व नीतियों से ही युसूफ पूर्ति को मिला आदिवासियों में पैठ बनाने का मौका

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Sweta Kumari /Pravin Kumar

Ranchi : खूंटी में हर तरफ पुलिस है. पुलिस युसूफ पूर्ति को ढूंढ़ रही है और छापामारी कर रही है. पुलिस के सैंकड़ों जवान उसे पकड़ने में लगी है. युसूफ पूर्ति का नाम आज झारखंड के सबसे चर्चित नामों में से एक है और पुलिस की नजर में मोस्टवांटेड है. ऐसे में यह जानना जितना दिलचस्प है कि युसूफ पूर्ति कौन है. इससे भी ज्यादा यह जानना दिलचस्प होगा कि युसूफ पूर्ति, जिसे कुछ माह पहले तक लोग जानते नहीं थे, वह इतना लोकप्रिय नाम आखिर कैसे बन गया.

दरअसल,  युसूफ पूर्ति ने संविधान की व्याख्या अपनी सुविधानुसार करके ग्रामीणों के बीच लोकप्रिय बना. उसे ऐसा करने में सफलता कहीं और से नहीं मिली, बल्कि झारखंड सरकार के कुछ फैसलों ने उसे यह मौका दिया. सरकार फैसले लेती रही, नीतियां बनाती रही और युसूफ पूर्ति उन्हीं फैसलों व नीतियों के बहाने लोगों को अपनी सुविधानुसार जानकारी देता रहा. जिससे ग्रामीण उसकी बातों में आते चले गए. युसूफ पूर्ति ग्रामीणों को यह समझाने में सफल रहा कि वह आदिवासियों का असली हितैसी है और वर्तमान सरकार व सरकारी सिस्टम, ग्रामीणों का दुश्मन. वह ग्रामीणों को अपने हिसाब से जानकारी देता रहा और सरकार चुप रही. सरकार की तरफ से ग्रामीणों को सही जानकारी देने की कोई कोशिश ही नहीं की गयी. सरकार सिर्फ पुलिसिया डंडे से इस समस्या का समाधान करने में लगी रही.  

पेश है न्यूज विंग संवाददाता स्वेता कुमारी और प्रवीण कुमार के रिपोर्ट की दूसरी किस्त. जो कुछ दिन पहले लिये गये युसूफ पूर्ति के साक्षात्कार के आधार पर तैयार किया गया है.

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सवाल : किन संवैधानिक प्रावधानों की आप बात कर रहे हैं, क्या यह अब तक आदिवासी इलाकों में लागू नहीं किया गया ?

जवाब : सवाल के जवाब में युसूफ पूर्ति ने कहाः संविधान में लिखे अधिकारों को उकेर कर हमने पत्थरों पर लिखा, जिससे सरकार डरी हुई है और अनाप-शनाप बोल रही है. इस बात को हमलोग खुद नहीं बोल रहे हैं,  बल्कि संविधान में यह सब कुछ मौजूद है. संविधान के गलत व्याख्या की बात कही जा रही है, लेकिन हमने कोई गलत व्याख्या नहीं की है, हम पत्थलगड़ी की बात को संविधान की किताब को खोलकर बता सकते हैं. क्योंकि संविधान के अनुरूप ही सारी बातों को पत्थर पर लिखा गया है. खूंटी जिला तो बना है, लेकिन जिला बनाने का लोक अधिसूचना आज तक जारी नहीं हुआ है. अगर लीगल तरीके से देखा जाये तो अभी भी खूंटी जिला, रांची जिला का ही हिस्सा है. जब जिला ही अवैध है और इसके बनने का लोक अधिसूचना आज तक जारी नहीं हुआ, तो ऐसे में जिला के सभी जिला प्रशासन अवैध हैं. इसी बात को हमने जिला प्रशासन से पूछा और राज्यपाल से भी हमने पूछा. तो राज्यपाल ने लिखकर दिया है कि खूंटी जिला प्रशासन पांचवी अनुसूची क्षेत्र में डीसी के अधिकार के विस्तार के बारे में कोई कार्रवाई राज्यपाल सचिवालय की ओर से किया गया है. इसलिए अगर हम बोल रहे हैं कि जिला प्रशासन अवैध और डीसी अवैध है, तो हम इसके गलत नहीं बोल रहे हैं.

सवाल : खूंटी जिला प्रशासन अवैध है यह आप किस आधार पर कहते हैं कह रहे हैं ?

जवाब :  मेरे पास इस बात के सारे एविडेंस हैं और इसी बात से एसपी और डीसी आहत हैं और अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं. तो इसलिए वर्जित क्षेत्र में क्या कर रहे हो. वर्जित क्षेत्र में घुसकर तानाशाही कर रहे हो. यही बात तो हमने कहा. इसी बात को संविधान भी कह रहा है, ये पांचवी अनुसूची के अधीन है.

हाथ में संविधान की किताब पकड़े युसूफ पूर्ति का कहना था कि संविधान की पारा दो की अधीन, पांचवी अनुसूची क्षेत्रों में किसी राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार इस अनुसूची के उपबंधों के अधीन रहते हुए उसके अनुसूचित क्षेत्रों पर है. तो यहां पर इस बात ढ़िंढ़ोरा डीसी पीट रहे हैं कि ये है और लोगों को बरगलाने का काम कर रहे हैं. इस पर मीटिंग भी हुआ और लोगों को बुलाकर एसपी और डीसी ने यही बोला कि यहां पर विस्तार से लिखा हुआ है. तो हां भाई हम भी मानते हैं कि यहां पर विस्तार लिखा हुआ है. लेकिन यहां साफ लिखा हुआ है कि उपबंधों के अधीन …तो यहां पर डीसी और एसपी को बताना चाहिये कि उपबंध क्या है.

इसके बाद युसूफ ने जोर देकर कहा कि तो उपबंध है ग्रामसभा, हमारे रीति-रीवाजों के अधीन रहते हुए और रूढ़िगत व्यवस्था के अंदर रहते हुए आपको यहां काम करना होगा. और इसी का लोक अधिसूचना राज्यपाल ने जारी नहीं किया है और स्पष्ट लिखकर दिया है राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने.  यही बात हम बोल रहे हैं तो इसमें गलत क्या है.

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सवाल : पांचवी अनुसूची के तीन प्रावधानों को आप  रूढ़ी प्रथा के अंतर्गत ग्रामसभा को मजबूत करना चाहते हैं ?

जवाब : जी हां सरकार की कार्रवाई के बाद ही हम आगे आये और हमको सब कुछ जानना पड़ा और आगे आकर राइट्स को जाना. इस पर हमने काफी रिसर्च भी किया है कि अब हम क्या करें. क्योंकि अब तो हम बच नहीं सकते हैं. ये सरकार हमको बर्बाद करके रख देगा और हम बच नहीं सकते हैं. इसलिये हमको सारा सिस्टम पढ़ना पड़ा, जो हमारा रूढ़िगत व्यवस्था है . तो इसके द्वारा हम बच सकते हैं और इसे लेकर हमलोग अपने आप में कॉन्फिडेंश हुए और उसके बाद आगे बढ़ने पर हमें ये रिजल्ट मिला. हमलोग आगे बढ़कर पत्थलगड़ी किये, तो इस कारण पूरे खूंटी जिला और खूंटी से पूरब खूंटकटी क्षेत्र में एक जगह भी जमीन अधिग्रहण नहीं हो पाया है.

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सवाल : आदिवासी इलाकों के विकास का एजेंडा केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता में है तो ऐसे में आप लोगों की क्या नाराजगी है ?

जवाब : उलिहातू में अमित शाह आये थे , एक लैटरिन घर का उद्घाटन करने के लिये. वह उतना बड़ा भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, लो एक लैटरिन घर का उद्घाटन करने के लिय़े आते हैं यहां. ये एक ढोंग और ढ़कोसला था. अमित शाह यहां लैटरिन घर का उद्घाटन करने नहीं आये थे, वो यहां का माइंस का उद्घाटन करने आये थे. तो ये सारा तमाशा हमलोग देख रहे थे, वहां के लोगों को डराया और धमकाया गया और पत्थर को भी गाड़ने नहीं दिया. वहां तो पत्थर को भी ले गया था, लेकिन उसको तो तोरपा में अरेस्ट करके ले गया था मान सिंह मुंडा को, जो तमाड़ के हैं.  

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