Opinion

यस बैंक, PMC बैंक घोटाले में जिस कंपनी का नाम आया, उसने BJP को दिया है 20 करोड़ का अवैध चंदा

Girish Malviya

क्या आप जानते हैं कि यस बैंक और PMC बैंक के घोटाले में जिस कंपनी का नाम सबसे प्रमुख रूप से उछला है, उस कंपनी से जुड़ी कंपनियों ने 2014 से 2017 के बीच भाजपा को अवैध रूप से लगभग 20 करोड़ रुपये का चंदा दिया है.

हम बात कर रहे हैं DHFL की

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29 जनवरी 2019 को खोजी पत्रकारिता से जुड़ी वेबसाइट कोबरा पोस्ट ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर ‘द एनाटॉमी ऑफ इंडियाज बिगेस्ट फाइनेंशियल स्कैम’ नाम से अपनी रिपोर्ट पेश की थी.

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कोबरा पोस्ट ने अपनी स्ट‍िंग में यह आरोप लगाया था कि DHFL ने कॉरपोरेट मंत्रालय को जरूरी जानकारी दिये बिना बड़े लोन मंजूर किये हैं. और ये संभवत: देश का सबसे बड़ा वित्तीय घोटाला हो सकता है.

पूर्व वित्त मंत्री और भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने स्वंय आगे आकर गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी डीएचएफल पर लगे 31,000 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच की मांग की थी.

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इस पूरी रिपोर्ट में DHFL कंपनी के प्रमुख प्रमोटर वधावन परिवार पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने अपने व्यक्तिगत फायदों के लिए शेल कंपनियों का नेटवर्क बनाकर बड़े पैमाने पर फंड की हेराफेरी की है. इस पूरे खेल में करीब 31,000 करोड़ रुपये का घपला होने का आरोप है. यह भी आरोप लगाया गया कि इन हथकंडों से प्रमोटर्स ने अपनी निजी वैल्थ खड़ी की.

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि डीएचएफएल ने वधावन समूह द्वारा नियंत्रित कंपनियों को 10,000 करोड़ रुपये से अधिक जारी किये. आरोप है कि बदले में इन कंपनियों ने तब भारत और अन्य देशों जैसे यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका और मॉरीशस में शेयरों, इक्विटी और अन्य निजी संपत्तियों का अधिग्रहण करने के लिए इस धन का इस्तेमाल किया.

2017-18 के वित्तीय ब्योरे के मुताबिक, इस कंपनी ने अलग-अलग बैंको और वित्तीय संस्थानों से 98 हजार 718 करोड़ रुपए का कर्ज हासिल कर लिया था. डीएचएफएल की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने कुल मिलाकर 36 बैंकों से उपरोक्त धनराशि कर्ज में जुटाई थी. इन बैंको में सरकारी और प्राइवेट के अलावा छह विदेशी बैंक शामिल हैं.

आरोप लगाया गया था कि यह कर्ज अलग-अलग तरीके से हासिल किया गया है. जो अब 2020 में खुलकर सामने आ रहा है.

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यह बात उसी वक्त सामने आ गयी थी कि यस बैंक ने DHFL से 3,700 करोड़ रुपए के डिबेंचर्स खरीदे और DHFL ने कपूर की बेटियों के स्वामित्व वाली कंपनी को 600 करोड़ रुपए का कर्ज दिया. इन दोनों लेनदेन को संदिग्ध बताया गया था. क्योंकि कपूर की बेटियों के पास पर्याप्त कारोबार या संपत्तियां नहीं थीं.

लेकिन तब कोई कार्यवाही नहीं हुई और वो कार्यवाही इसलिए नहीं हुई, क्योंकि DHFL से जुड़ी कंपनियों ने भाजपा को 20 करोड़ का चंदा दिया था और न सिर्फ चंदा दिया, बल्कि कंपनी अधिनियम की धाराओं के उल्लंघन करते यह चंदा दिया.

कोबरापोस्ट ने भारतीय चुनाव आयोग को दिये गये भाजपा के दस्तावेजों के मुताबिक ही यह खुलासा किया था कि वित्तीय वर्ष 2014-17 के दौरान आरकेडब्ल्यू, दर्शन और स्किल रियल्टर्स ने भाजपा को लगभग 20 करोड़ रुपये का दान दिया था. जो कि कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 182 का उल्लंघन है.

धारा 182 कंपनियों द्वारा राजनीतिक योगदान पर प्रतिबंधों से संबंधित है. इसमें कहा गया है कि एक कंपनी तीन पूर्ववर्ती वित्तीय वर्षों के दौरान अर्जित औसत शुद्ध लाभ का 7.5 प्रतिशत तक ही चंदा राजनीतिक दलों को दे सकती है.

लेकिन कोबरापोस्ट की रिपोर्ट बताती है कि, वित्तीय वर्ष 2014-15 में आरकेडब्ल्यू डेवलपर्स ने भाजपा को 10 करोड़ रुपये का योगदान दिया. जबकि इस कंपनी को वित्तीय वर्ष 2012-13 में लगभग 25 लाख रुपये का नुकसान हुआ और पूर्ववर्ती तीन साल में औसतन 18 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था.

अब आप समझे कि चौकीदार दरअसल चौकीदार नहीं है, बल्कि खुद सबसे बड़ा है और यह बात आज बिका हुआ मीडिया हमें बिल्कुल नहीं बतायेगा, बल्कि इस बात को छुपाने में सहयोग करेगा.

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