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साल आगे बढ़ते रहे, हमारे लोग और विचार पीछे छूटते रहे : सुदेश

समाधि स्थल पर बिरसाइत की सभा में धरती आबा को किया याद

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Ranchi : आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो ने कहा कि साल आगे निकलते गये, लेकिन धरती आबा के विचार और हमारे लोग पीछे छूटते गये. गुरुवार को कोकर स्थित बिरसा मुंडा के समाधि स्थल पर श्रद्धा सुमन अर्पित करने के बाद उन्होंने ये बातें कहीं. इस दौरान उन्होंने बिरसा मुंडा के अनुयायियों के साथ सभा की और उनके साथ विचारों को साझा किया.

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राज्य गठन के क्या उद्देश्य थे, यह बड़ी बहस है

सुदेश कुमार महतो ने कहा कि बिरसा मुंडा ने जिन उद्देश्यों के साथ उलगुलान किया था, वे कितने साकार हो सके हैं, अक्सर यह सवाल पूछा जाता है. दरअसल, भौगोलिक, प्रशासनिक, भाषाई और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से अलग राज्य हासिल हुए 18 साल हो गये, लेकिन गांव के लोग और हमारे विचार स्थापित नहीं हो सके. इसलिए अलग राज्य गठन के उद्देश्य क्या थे, यह बड़ी बहस है और इसमें सबको शामिल होना पड़ेगा. किसी दूसरे देश या राज्य को मानक मानकर हम काम नहीं कर सकते. झारखंड के अपने औचित्य हैं, इन्हीं मुद्दों और धरती आबा के सपनों के अनुरूप हम कहां तक पहुच पाये हैं, इसे देखना होगा. उन्होंने कहा कि आधारभूत संरचना और औद्योगिकीकरण की होड़ में झारखंड को जिस अलग दिशा में अलग विचारों के साथ चलना था, वह डगमगाती रही. राज्य को एक स्पष्ट दिशा की जरूरत है और इसके केंद्र में गांव, जमीन से जुड़े लोगों को रखना होगा.

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स्वराज स्वाभिमान यात्रा के जरिये अलख जगाने की कोशिश में जुटे हैं

सुदेश ने कहा कि हर वर्ष 15 नवंबर को, यानी बिरसा जयंती पर हम धरती आबा को याद करते हैं, उनके सपने साकार हों, इसके संकल्प लेते हैं, लेकिन सवाल वहीं रह जाते हैं कि बिरसा के सपने साकार क्यों नहीं होते. इसलिए हम स्वराज स्वाभिमान यात्रा के जरिये एक अलख जगाने की कोशिश में जुटे हैं कि सत्ता, सियासत और सिस्टम गांवों और इसकी बड़ी आबादी को समझें. उन्हें समझना होगा कि बिरसा ने भी अपना राज और अपने शासन की मुनादी की थी. उन्होंने कहा कि बिरसाइत अनुयायियों को नमन करता हूं. हजारों परिवार आज भी जंगलों में बिरसा धर्म का पालन कर रहे हैं. यह सादी वेश-भूषा, सादा खाना, उनकी प्रार्थना, खुद को भगवान पर लीन कर देने की उनका तरीका दिखाता है कि किस तरह बिरसा के मूलभूत मूल्यों पर आज भी ये लोग आस्था रखते हैं.

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ये थे मौजूद

श्रद्धांजलि प्रार्थना सभा में डॉ संजय बसु मल्लिक, डॉ देवशरण भगत, सुबोध प्रसाद, बिरसा मुंडा, सरजीत मिर्धा, सिद्धार्थ महतो, ललित ओझा, ज्ञान सिन्हा, बनमाली मंडल, रामदुर्लभ सिंह मुंडा, आदिल अजीम, सुनील यादव, हरीश कुमार, गौतम सिंह, नीतीश कुमार सहित पार्टी के सैकड़ों लोग शामिल थे.

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