Year 2020 Overview

लालू के इर्द-गिर्द घूमती रही राजद की राजनीति

Ranchi : वर्ष 2020 झारखंड प्रदेश राजद के लिए कुछ भी नया लेकर नहीं आया. राजद की पूरी राजनीति लालू प्रसाद यादव के इर्द-गिर्द घूमती रही. वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में पांच वर्षों के बाद झारखंड में राजद का खाता तो जरूर खुला लेकिन इस पर बिहार की पार्टी होने का टैग नहीं हट सका. इस चुनाव में राजद शून्य से एक सीट पर पहुंचने में कामयाब रहा. हेमंत सरकार में राजद के एकमात्र विधायक को मंत्रिमंडल में जगह भी मिल गयी, लेकिन संगठनिक तौर पर राजद कुछ नया नहीं कर सका. पिछले एक वर्ष में देखा जाये तो पार्टी का कोई कार्यक्रम देखने को नहीं मिला. प्रदेश कार्यालय से लेकर रिम्स तक राजद के नेता-कार्यकर्ता चक्कर काटते रहे. कोरोना काल में भले ही राजद ने रिम्स परिसर में गरीबों के लिए पके हुए भोजन की व्यवस्था कर सुर्खियां बटोरी थीं, मगर इसका प्रभाव पार्टी के जनाधार पर नहीं पड़ा.

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पार्टी के कार्यक्रमों के बजाय राजद कई अन्य मामले को लेकर चर्चा में आया. सबसे पहले राजद चर्चा में आया पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को रिम्स के पेइंग वार्ड से रिम्स निदेशक के बंगले में शिफ्ट करने को लेकर. चारा घोटाला मामले में सजा काट रहे लालू प्रसाद यादव रिम्स के पेइंग वार्ड में भर्ती थे. झारखंड में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद लालू प्रसाद यादव को रिम्स निदेशक के बंगले में शिफ्ट किया गया. राजद की जगह लालू प्रसाद यादव की चर्चा इस बात को लेकर होने लगी कि रिम्स निदेशक के बंगले में वह दरबार लगाने लगे. राजद नेताओं-कार्यकर्ताओं का वहां जुटान होने लगा जबकि नियमतः लालू यादव से सिर्फ हर शनिवार को तीन लोग ही जेल प्रशासन से आदेश लेकर मिल सकते थे. इस नियम की खूब धज्जियां उड़ायी गयीं.

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बिहार विधानसभा के दौरान राजनीति का केंद्र बना का रिम्स निदेशक का बंगला

बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान फिर लालू यादव की चर्चा राजनीतिक गलियारे में होने लगी. कैदी के रूप में रिम्स निदेशक के बंगले से ही लालू यादव ने बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीति की. बिहार में महागठबंधन की सरकार बने इसको लेकर लालू यादव ने नियमों को ताक पर रख कर मोबाइल से भाजपा और अन्य दलों के विधायकों को तोड़ने का प्रयास किया. जब यह मामला तूल पकड़ा तो लालू यादव को फिर से रिम्स के पेइंग वार्ड में शिफ्ट किया गया. पूरे वर्ष के दौरान राजद की तरफ से कोई बड़ा कार्यक्रम नहीं किया गया. सिर्फ किसान बिल के विरोध में छोटे-मोटे कार्यक्रम हुए. प्रदेश कार्यालय में भी किसी तरह की गतिविधि नहीं देखी गयी. हलांकि कोरोना काल में कुछ दिनों के लिए प्रदेश कार्यालय को बंद कर दिया गया था लेकिन जब से कार्यालय खुला कोई बड़ा कार्यक्रम नहीं हुआ. राजद को एकमात्र सफलता पूर्व मंत्री और झारखंड के वरिष्ठ नेता राधाकृष्ण किशोर को पार्टी में शामिल कराना रहा. जिस दिन राधाकृष्ण किशोर को राजद में शामिल कराया जा रहा था उस दिन पार्टी कार्यालय के पास गहमागहमी देखी गयी थी.

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