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साल 2018 :  कई चुनौतियों से जूझता रहा RMC, कुछ उपलब्धियों का हुआ दावा, अधिकतर में रहा फेल

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Ranchi : साल 2018 आज खत्म होने जा रहा है. इस 365 दिनों की अवधि में रांची नगर निगम कई चुनौतियों से पूरी तरह जूझता दिखा. निगम ने कई क्षेत्रों में उपलब्धियां हासिल तो की, लेकिन अधिकतर मुद्दों पर वह पूरी तरह असफल दिखा. वहीं, जिन मुद्दों पर अधिकारियों ने सफल होने का दावा किया, उसमें भी समय-समय पर विवाद होता रहा. निगम की सबसे बड़ी उपलब्धि स्वच्छता सर्वेक्षण में देखने को मिली. सूची में रांची का स्थान बेहतर रहा. कार्य में लगे कर्मियों की भी प्रशंसा हुई. इस अवधि में एस्सेल इन्फ्रा विवाद, सीवरेज-ड्रेनेज परियोजना, नगर आयुक्त और अधिकारी के विवाद, एंटी करफ्शन ब्यूरो की कार्रवाई भी काफी चर्चा में रही.

इन मुद्दों पर निगम ने सफल होने का किया गया दावा

  • स्वच्छता सर्वेक्षण– 2018 : साल 2018 की सबसे बड़ी उपलब्धि स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 में रही. राज्यों की राजधानी की स्वच्छता रैंकिंग में रांची सिटीजन फीडबैक के मामले में पहले स्थान पर रहा. अधिकारियों ने डोर-टू-डोर कूड़ा उठाव, सड़कों की सफाई, गीला व सूखा कचरा को अलग-अलग करने के लिए सोर्स सेग्रिगेशन पर विशेष जोर देने को इसका कारण बताया. हालांकि, हकीकत इससे कोसों दूर रही.
  • अटल स्मृति वेंडर मार्केट का उद्घाटन : कचहरी रोड में बने अटल स्मृति वेंडर मार्केट का निर्माण निगम के लिए दूसरी प्रमुख उपलब्धि थी. 16 नवंबर को मुख्यमंत्री ने स्वयं इस मार्केट का उद्घाटन किया. हालांकि, इसमें पेंच फसने की बात मीडिया में प्रमुखता से छपी. दुकान आवंटन के विरुद्ध करीब 180 लोगों ने आपत्ति दर्ज की.
  • पर्यटन स्थलों तक सिटी बसों का परिचालन : निगम ने सिटी बसों से राजधानीवासियों को पर्यटन स्थलों तक लाने-जाने की सुविधा भी दी. इन पर्यटन स्थलों में ओरमांझी स्थित भगवान बिरसा बायोलॉजिकल पार्क, बायोडायवर्सिटी पार्क, पंचघाघ आदि शामिल हैं.
  • राजस्व में हुई बढ़ोतरी : साल 2018 राजस्व बढ़ाने में भी निगम के लिए काफी फायदेमंद रहा. होल्डिंग टैक्स वसूली में 40 प्रतिशत तक वृद्धि देखी गयी. वित्तीय वर्ष 2018-19 में 35 करोड़ रुपये तक की राजस्व वसूली हुई. यह राशि दिसंबर तक वसूली गयी. अगले तीन महीने में 15 करोड़ रहीध्‍े और राजस्व आने की उम्मीद है. एन्फोर्समेंट टीम ने नवंबर 2018 तक पार्किग वसूली में 49 लाख और प्लास्टिक, गंदगी, नो-पार्किंग में 73 लाख रुपये तक राजस्व निगम को दिया.
  • कई सेवाएं हुईं ऑनलाइन : आम लोगों के लिए कई सेवाओं को ऑनलाइन किया गया. इसमें होल्डिंग टैक्स व वाटर टैक्स का ऑनलाइन भुगतान, ट्रेड लाइसेंस की ऑनलाइन प्रक्रिया, बाजार शाखा की सभी वाणिज्यिक गतिविधियों को ऑनलाइन करना प्रमुख है. एन्फोर्समेंट टीम द्वारा निगम की जमीन को अतिक्रमण मुक्त करने, होल्डिंग टैक्स की नयी नियमावली, रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर विशेष जोर देना प्रमुख उपलब्धियां मानी गयीं.

इन मुद्दों में निगम रहा असफल 

  • सीवरेज– ड्रेनेज परियोजना : रांची नगर निगम के विवादित मुद्दों में उक्त परियोजना सबसे अधिक चर्चा में रही. राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने तो इसे एक बड़ा घोटाला बताया है.
  • एस्सेल इन्फ्रा विवाद : एस्सेल इन्फ्रा, रांची नगर निगम और पार्षदों के बीच संघर्ष ने सुर्खियां बटोरीं. कई बार नगर विकास मंत्री, नगर आयुक्त, मेयर, डिप्टी मेयर ने कंपनी को डिबार करने की चेतावनी दी. वहीं, कई पार्षदों ने जनप्रतिनिधियों पर कंपनी को बचाने का आरोप लगाया.
  • सफल नहीं हुआ स्लॉटर हाउस : करीब 18 करोड़ रुपये की लागत से कांके में बने स्लॉटर हाउस को चलाने में निगम असफल रहा. मामला अब कोर्ट में है. ऐसे में स्लॉटर हाउस कब शुरू होगा, इसकी जानकारी किसी को नहीं है.
  • भ्रष्टाचार का मामला आया सामने : एसीबी ने कार्रवाई कर रांची नगर निगम के कर्मी को घूस लेते पकड़ा. निगम के लिए यह घटना काफी शर्मसार करनेवाली रही.
  • नगर आयुक्त– अधिकारी विवाद : कार्य आवंटन को लेकर नगर आयुक्त और स्वास्थ्य पदाधिकारी के बीच विवाद भी सामने आया. न्यूज विंग ने भी इस खबर को प्रमुखता दी. विवाद का कारण अनुबंध में रखे सिटी मैनेजर को कार्यभार देना था.
  • पार्किंग पॉलिसी हुई फेल : मेयर आशा लकड़ा की अध्यक्षता में हुई स्टैंडिंग कमिटी की बैठक में पार्किंग दर 50 प्रतिशत कम करने की घोषणा हुई. कहा गया कि पार्किंग दर नियमावली में संशोधन के लिए निगम सरकार को पत्र भेजेगा. मामला अभी तक लंबित है.
  • ई-रिक्शा विवाद : शहर में चल रहे अवैध ई-रिक्शा को रोकने में भी निगम असफल ही रहा. कुछ चालकों पर जुर्माना भी वसूला गया. इसके विरोध में कई बार चालकों ने निगम कार्यालय का घेराव किया. सिटी मैनेजरों पर अवैध वसूली का आरोप भी मीडिया में छाया रहा.
  • बोर्ड बैठक की कार्यवाही से जुड़े मुद्दे : निगम बोर्ड की बैठक भी विवाद से पीछे नहीं रही. एक तो मीडिया को इससे बाहर रखने का निर्णय हुआ. इससे पत्रकारों ने अधिकारियों पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप तक लगाया. वेतन बढ़ोतरी, मुस्लिम पार्षदों को कमिटी में स्थान नहीं देना भी चर्चा में रहा.

2019 में राजधानीवासियों को मिलेंगी कई सुविधाएं : संजीव विजयवर्गीय

डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय भी स्वीकार करते हैं कि उक्त मुद्दों पर निगम सफल– असफल रहा है. उनके मुताबिक निगम के पास संसाधन कम हैं. इसके बावजूद निगम अपने स्तर पर कई प्रयासों को जारी रखेगा, ताकि 2019 में लोगों को सुविधाएं मिलें. वे सुविधाएं ये हैं-

  • सफाई कार्य के लिए नयी व्यवस्था बनाना.
  • सीवरेज-ड्रेनेज योजना कार्य की प्रगति का आकलन करना.
  • निगम क्षेत्र में नये पार्कों का निर्माण होना. पार्क एचईसी, हरमू, बरियातू, मेयर्स रोड में प्रस्तावित है.
  • होल्डिंग टैक्स में आ रही समस्याओं के लिए सॉफ्टेवयर सेल का निर्माण करना.
  • इंजीनियरिंग सेल को ऑनलाइन करना.
  • रातू रोड स्थित देवकमल हॉस्पिटल को निगम का ओपीडी बनाना.
  • विज्ञापन के लिए होर्डिंग आकार को एक जैसा बनाना.

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