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पीएम को पत्र लिख कहा: आरटीआई कानून के तहत बीमा कंपनी ने दी गलत जानकारी, हर्जाना दिलायें

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Ranchi: भारतीय जीवन बीमा निगम अपने ग्राहकों को सूचना के अधिकार से मांगी गई जानकारी गलत देकर गुमराह कर रही है. इस तरह की आपबीती लिखते हुए रांची अशोक नगर निवासी संजय रत्‍ना ने प्रधानमंत्री को एक चिट्ठी लिखा है और कहा है कि जब इस पर सख्‍ती से जीवन बीमा के खिलाफ आवाज उठाई तो अब उनके बैंक के खाते में रकम वापस कर दी गई. इसके पहले बीमा कंपनी ने कई सालों तक बीमा की रकम के लिए दौडाया और परेशान किया. उन्‍होंने प्रधानमंत्री को लिखे चिट्ठी में बीमा कंपनी के खिलाफ जिम्‍मेवारी तय करते हुए कार्रवाई की मांग की है और हर्जाने की मांग की है.

अपने पत्र में उन्‍होंने कहा है कि साल 2007 में उन्‍होंने भारतीय जीवन बीमा निगम की दो पॉलिसी खरीदी थी. पॉलिसी के तीन साल तक वार्षिक प्रीमियम जमा जमा होने के बाद उन्‍होंने पत्‍नी के ईलाज के लिए दोनों पॉलिसी को सरेंडर करने के लिए अपने बीमा एजेंट को कहा. तब एजेंट ने बताया कि पॉलिशी को सरेंडर नहीं किया जा सकता है.

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सब तरफ से निराश होने के बाद साल 2015 में सूचना के अधिकार कानून के तहत एलआईसी पटना-2 से जानकारी मांगी. इसके तहत 22 जुलाई 2015 को मिली जानकारी में बताया गया कि दोनों पॉलिसी कालातीत अवस्‍था में है. इसलिए दोनों पॉलिसी का समर्थित मूल्‍य देय नहीं है. इस बीच ईलाज के दौरान पत्‍नी की निधन भी हो गई.

संजय रत्‍ना ने पत्र में है कहा कि एलआईसी पटना से मिली जानकारी से असंतुष्‍ट होने के बाद केंद्रीय सूचना आयोग के पास मामले को रखा. यहां पर भी जीवन बीमा कंपनी द्वारा दी गई जानकारी को सही माना गया.

कुछ दिन पहले 26 जून 2018 को भारतीय जीवन बीमा निगम के खाते से संजय रत्‍ना के बैंक खाते में 16 हजार 25 रुपये और 41,859 रूपये ट्रांसफर हुए हैं. अब संजय रत्‍ना पीएम को लिखे पत्र में कहा है कि आरटीआई द्वारा गलत जानकारी और मानसिक तौर पर प्रताडना के मामले में एलआईसी पटना की जिम्‍मेवारी तय करते हुए हर्जाना दिया जाय.

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इधर भारतीय जीवन बीमा निगम पटना-2 के प्रशासनिक अधिकारी ललन कुमार ने बताया कि संजय रत्‍ना के दोनों पॉलिसी के चेक डिजऑनर हो गये थे. जमशेदपुर में चेक जमा किया था. पहला प्रीमियम और तीसरे पीमियम के बीच वाला प्रीमियम का डिजऑनर हो गया था. उसके बाद आखिरी वाला पेमेंट अनक्‍लेम्‍ट के रूप में चला गया. पांच साल से ज्‍यादा होने के बाद नये नियम के तहत वह अमाउंट वापस किया गया है.

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