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रमणिका गुप्ता की मृत्यु प्रगतिशील जन संस्कृति की आपूरणीय क्षतिः जसम

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Ranchi: जानी-मानी प्रगतिशील लेखिका और एक्टिविस्ट रमणिका गुप्ता का आज दिन के तीन बजे नई दिल्ली में निधन हो गया. वामपंथी मजदूर आंदोलन संगठित करने लेकर प्रगतिशील सांस्कृतिक आंदोलन में अगुआ रहने वाली रमणिका ने सांस्कृतिक-रचनाकर संगठक की भूमिका निभाते हुए विशेषकर आदिवासी-दलित समुदायों के साहित्यिक स्वर को मुखरता के साथ अभिव्यक्त किया. नारी मुक्ति के साथ-साथ झारखंड समेत देश के आदिवासी साहित्यिक स्वर को व्यापक समाज में लाने के उनके विशिष्ट योगदान को भुलाया नहीं जा सकता.

रमणिका गुप्ता सीपीआईएम की राज्य कमेटी की सदस्य के साथ-साथ सीटू से संबंधित कोयला यूनियन की मुख्य संरक्षिका भी थी. मांडू से 1977 में विधायक भी चुनी गयी थीं. इससे पूर्व एमएलसी सदस्य रहीं. चुनावी राजनीति से अलग होने के बाद भी मजदूर यूनियन से जुड़ी रहीं. रमणिका गुप्ता की मौत पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि देश की प्रगतिशील जन सांस्कृतिक व देशज सांस्कृतिक धारा के लिए अपूरणीय क्षति है.

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रमणिका गुप्ता की मुख्य कृतियां

कविता संग्रह- भीड़ सतर में चलने लगी है, तुम कौन, तिल-तिल नूतन, मैं आजाद हुई हूं, अब मूरख नहीं बनेंगे हम, भला मैं कैसे मरती, आदम से आदमी तक, विज्ञापन बनते कवि, कैसे करोगे बंटवारा इतिहास का, निज घरे परदेसी, प्रकृति युध्दरत है,पूर्वांचल: एक कविता यात्रा, आम आदमी के लिए, खूंटे, अब और तब, गीत – अगीत

उपन्यास- सीता मौसी

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मृतक की पहचान लापुंग थाना के गोपालपुर गांव के रहने वाले  कलंतुस बारला के रूप में हुई है.

कहानी संग्रह- बहू जुठाई

गद्य पुस्तकें- कलम और कुदाल के बहाने, दलित हस्तक्षेप, सांप्रदायिकता के बदलते चेहरे, दलित चेतना- साहित्यिक और सामाजिक सरोकार, दक्षिण- वाम के कठघरे और दलित साहित्य, असम नरसंहार- एक रपट, राष्ट्रीय एकता, विघटन के बीज.

इन्होंने शोक व्यक्त किया 

रमणिका गुप्ता की मौत पर शोक व्यक्त करने वाले सस्कृतिकर्मी में जसम के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार रविभूषण, उपाध्यक्ष कवि शंभू बादल, वरिष्ठ कवि विद्याभूषण, जसम के ज़ेवियर कुजूर, आदिवासी भाषा शोधर्थी सोनी तिरिया, सानिका मुंडा, गौतम सिंह मुंडा,  जावेद इस्लाम, साहित्यकार प्रो. बलभद्र, युवा आलोचक प्रो. रविरंजन, लालदीप गोप, जैबीर हंसदा समेत कई संस्कृतिकर्मियों रहे.

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