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राफेल पर लोकसभा में राहुल गांधी और निर्मला सीतारमण के बीच तीखी बहस

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New Delhi: लोकसभा में राफेल डील (Rafale Deal) कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण के बीच तीखी बहस हुई. विपक्ष द्वारा लगातार यह बात उठाई जा रही थी कि रक्षा विभाग से संबंधित राफेल के मुद्दे पर रक्षामंत्री क्यों कुछ नहीं बोल रहीं. राहुल गांधी ने शुक्रवार को भी लोकसभा शुरू होने से पहले डील पर कुछ सवाल उठाए थे और कहा था कि वह चाहेंगे कि पीएम मोदी की जगह सीतारमण आज इन सवालों के जवाब दें.

राहुल ने पूछे कई तीखे सवाल

चर्चा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों ले लिया. उन्‍होंने कहा कि वह सीधे पीएम पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं. कांग्रेस अध्यक्ष आगे बोले- केंद्र बताए कि आखिर अनिल अंबानी को इस डील में कौन लेकर आया?

सदन में राहुल बोले कि मैं मानता हूं कि मैंने गलतियां कीं. हां, मैक्रॉ वहां के मौजूदा राष्ट्रपति हैं. वह पूर्व राष्ट्रपति नहीं है. राफेल के दाम गोपनीयता का हिस्सा नहीं हैं. मेरा प्रश्न है कि आखिर अनिल अंबानी को इस कॉन्ट्रैक्ट में कौन लेकर आया. आखिर कौन था, जिसने अनिल अंबानी के नाम पर फैसला लिया?

निर्मला सीतारमण ने किया पलटवार

तीखी बहस के दौरान रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने कांग्रेस पर बड़ा पलटवार किया. निर्मला ने विपक्षी दल पर झूठे प्रचार करने और 2014 से पहले दशकों सत्ता में रहने पर सुरक्षा की अनदेखी का आरोप लगाया. रक्षामंत्री ने कहा कि कांग्रेस को राफेल डील पर आरोप लगाने से पहले ‘होमवर्क’ करना चाहिए.

यूपीए सरकार के दौरान हुई राफेल डील की मौजूदा सरकार के दौरान हुए सौदे को लेकर विस्तारपूर्वक तुलना करते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ झूठे प्रचार किए गए क्योंकि पिछले चार वर्षों के दौरान उन्होंने साफ सुथरी सरकार चलाई है.

लोकसभा में राफेल पर बहस के दौरान जवाब देते हुए निर्मला ने कहा- “मुझे यह कहते हुए घृणा हो रही है. मैं बोफोर्स की तुलना नहीं करना चाहती हूं. क्योंकि, बोफोर्स एक घोटाला था जो कांग्रेस को सत्ता से नीचे लाया. राफेल मोदी को वापस लाएगा ताकि न्यू इंडिया बनाया जा सके.”

सीतारमण ने कहा कहा कि कांग्रेस की नेतृत्ववाली पिछली सरकार को लेकर आरोप ये हैं कि वे लड़कू विमानों के ‘खरीदने की उनमें इच्छा नहीं थी.’ उन्होंने आगे कहा- ‘राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में था और इसकी उसे कोई चिंता नहीं थी। सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण था.’

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