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World Heart Day: कोरोना संक्रमित मरीजों में बढ़ रहा है हार्ट अटैक का खतरा, देखिये क्या कह रहें एक्सपर्ट

स्ट्रेस और धुम्रपान के कारण चपेट में आ रहे युवा

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Kumar Gaurav

Ranchi: मंगलवार को विश्व हार्ट दिवस मनाया जायेगा. कोविड संक्रमण के इस दौर में हमने कोरोना से हार्ट अटैक के खतरे को जानने की कोशिश की. इसको लेकर रिम्स के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ अंशुल और डॉ प्रशांत से हमने बातचीत की. जिससे यह पता चला कि कोरोना संक्रमित मरीजों में हार्ट अटैक का खतरा नॉर्मल मरीजों की तुलना में अधिक बढ़ गया है.

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डॉ प्रशांत ने बताया कि कोविड-19 किसी भी एज ग्रुप को इंफेक्ट कर सकता है. जिस एज ग्रुप को यह वायरस अटैक करता है, उनमें ब्लड क्लोटिंग की संभावना बढ़ जाती है. जिससे हार्ट अटैक की संभावना बढ़ जाती है.

डॉक्टर प्रशांत ने बताया कि कोविड मरीजों में हार्ट अटैक की संभावना इन तीन कारणों से बढ़ जाती है. पहला कोविड-19 वायरस ऐज टू रिसेप्टर से अटैच होता है. ब्लड वेसल के इंडोथिलियम में गड़बड़ी कराता है. जिससे ब्लड क्लॉट हो जाता है और आगे का ब्लड फ्लो रुक जाता है. जिससे हार्ट अटैक आ जाता है.

इसके अलावा उन्होंने बताया कि कोविड-19 वायरल इंफैक्सन है. यह इंफ्लामेशन (सूजन) कराता है शरीर में. जिस भी बीमारी से अपने आप इंफ्लामेशन होता है. उस बीमारी से हार्ट अटैक की संभावना बढ़ जाती है.  तीसरा कारण स्ट्रेस है. स्ट्रेस से भी हार्ट अटैक या ब्लड क्लॉटिंग की संभावना बढ़ जाती है.

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डॉ प्रशांत ने बताया कि वर्तमान में युवा वर्ग में भी हार्ट अटैक की शिकायत बढ़ गयी है. इसके प्रमुख कारण युवाओं का अधिक धुम्रपान करना है और स्ट्रेस भी एक कारण है.

कैसे बचाया जा सकता है हार्ट अटैक से

जांच में अगर कोरोना पॉजिटिव आते हैं तो उनको डॉक्टरों से तुरंत सलाह लेनी चाहिये. शुरुआती 15 से 20 दिनों के लिए ब्लड को पतला करने के लिए दवा दी जाती है. जिसे एंटी कोवेलेंट कहा जाता है. हॉस्पिटल में एडमिट रहने के दौरान यह इंजेक्शन के रुप में दिया जाता है. डिस्चार्ज के वक्त हमलोग डि डायमर टेस्ट कराते हैं, जिससे पता चलता है कि ब्लड के क्लॉटिंग की संभावना कितनी है. जिसके बाद दो से तीन सप्ताह के लिए ओरल एंटी कोवेलेंट दे देना उचित समझा जाता है जो ब्लड को पतला रखता है. इंफेक्टेड पेशेंट को अगर हार्ट अटैक आता है तो सबसे जरूरी है कि वो समय पर अस्पताल आ जाये. शुरू के छह से आठ घंटे के अंदर अस्पताल में आ जाते हैं तो स्थिति को ध्यान में रखकर एंजियोग्राफी कर लेनी चाहिये.

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रिम्स सीटीवीएस के एचओडी डॉ अंशुल ने बताया कि कोविड के दौरान सप्ताह में दो ओपन हार्ट सर्जरी की जा रही है. फॉलोअप वाले मरीजों को सीटी स्कैन चेस्ट और कोविड जांच करा कर रिपोर्ट के आधार पर प्रोटोकॉल को ध्यान में रखकर ऑपरेशन करते हैं. कोविड में जिन मरीजों को ओपन हार्ट सर्जरी की जरुरत हैं. उनके लिए सबसे जरुरी है कि वे समय पर अपनी दवाईयां लें. डॉक्टरों से समय-समय पर मिलते रहें. जरुरत पड़ने पर तुरंत ऑपरेशन करा लें. मरीज बिना घबराएं डॉक्टरों से सलाह लेते रहें. उन्होंने बताया कि जरूरी केस की स्थिति में ऑपरेशन के लिए उचित इलाज करते हैं और तुरंत सैंपल जांच के लिए भेज देते हैं. दूसरी तरफ ऑपरेशन जारी रखते हैं. कोविड मरीजों के इलाज के बाद हम अपना भी टेस्ट करा लेते हैं. पर, कोशिश करते हैं कि हम इलाज में कोई कोताही न बरतें.

डॉ अंशुल ने बताया कि पिछले अक्टूबर से अबतक 45 ओपन हार्ट केस किये गये हैं. जिसमें सभी मरीज ठीक हैं. वर्तमान में 40 मरीज फॉलोअप में हैं. उन्होंने बताया कि कार्डियक सर्जरी इंटरडिपेंडेंट विभाग हैं. न्यरो, नेफ्रो, जैसे विभागों से हमारे संपर्क हैं. कार्डियक एनिसथेसिया की टीम है.

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