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विश्व हाथी दिवसः 22 सालों में गजराज ने 1700 लोगों की ली जान,1.90 लाख लोग हुए प्रभावित

Ranchi: झारखंड में हाथी-मानव द्वंद लगातार जारी है, जिसे वन विभाग अब तक रोक नहीं पाया है. राज्य गठन के बाद से लेकर पिछले 22 सालों में गजराज ने अब तक लगभग 1700 से अधिक लोगों की जानें लील ली है. वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक हाथी और जंगली जानवरों से एक लाख 90 हजार 800 लोग प्रभावित हो चुके हैं जिसमें फसलों का नुकसान, पशुओं का नुकसान, मकानों का नुकसान और अनाज का नुकसान शामिल है.

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13 करोड़ रुपये मुआवजा बांट चुका है वन विभाग

जंगली जानवरों के शिकार (मौत) हो चुके लोगों पर इसके एवज में वन विभाग 13 करोड़ रुपये मुआवजा बांट चुका है. 1900 लोग घायल हो चुके हैं, इसके एवज में 3.50 करोड़ रुपये मुआवजा बांटा गया है. 109500 लोगों के फसल का नुकसान, पशु का नुकसान, मकान का नुकसान और अनाज का नुकसान हुआ. इसके एवज में 32 करोड़ रुपये मुआवजा बांटा जा चुका है.

Sanjeevani

झारखंड में बढ़ी है हाथियों की संख्या
देश के अन्य राज्यों में गजराज की संख्या में भले ही कमी आयी है, लेकिन झारखंड में हाथियों की संख्या में इजाफा हुआ है. वर्ष 2019 में दलमा में हाथियों की संख्या 67 थी जो वर्ष 2022 में बढ़कर 104 हो चुकी है. यानी, दो सालों में हाथियों की संख्या में 37 बढ़ गये हैं. वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो हाथियों को दलमा पसंद आ रहा है.
कॉरिडोर अब तक नहीं बन पाया
हाथियों के भ्रमण के लिये कॉरिडोर (एक प्राकृतिक स्थल से दूसरे प्राकृतिक स्थल तक) तैयार किया जाना था, इसके लिये जीआइएस मैपिंग भी हुई, लेकिन यह कॉरिडोर अब तक नहीं बन पाया है. राज्य के अंदर पूर्वी सिंहभूम, प.सिंहभूम, गिरिडीह और दुमका में कॉरिडोर बनाना था. वहीं अंतरराज्यीय कॉरिडोर उड़ीसा-चाईबासा, उड़ीसा- सारंडा, पूर्णिया-दलमा और सरायकेला- बंगाल में बनाया जाना था. लेकिन यह योजना भी धरी की धरी रह गई.

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एलिफेंट रेसक्यू सेंटर भी केवल कागज पर ही

राज्य गठन के बाद से हाथियों के लिये एलिफेंट रेसक्यू सेंटर भी बनाया जाना था पर वह भी नहीं बन पाया. धनबाद के वन क्षेत्र और दलमा में रेसक्यू सेंटर बनाने का प्रस्ताव था. वन विभाग के अनुसार, एक हाथी दो से पांच वर्ग किलोमीटर में भ्रमण करता है. इस हिसाब से धनबाद का वन क्षेत्र रेसक्यू सेंटर के लिये उचित नहीं है.

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