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विश्व कप 2019: मैनेजमेंट का एक फैसला किंग कोहली पर पड़ सकता है भारी

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Abinash Mishra

Ranchi: आइपीएल खत्म होते ही विश्व कप 2019 की चर्चा और तेज हो गयी है. टीम इंडिया के खिलाड़ी भी आइपीएल की थकान को भूल कर विश्व कप के लिए बेताब होंगे. 30 मई से क्रिकेट महाकुंभ की शुरुआत होगी. तो वक्त कम है और विराट कोहली को सुनिश्चित करना है कि खिलाड़ी फिट रहें और फ्रेश भी. 2015 से अब तक भारत का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है. इस दौरान भारत एक दर्जन से ज्यादा सीरीज में अजय रहा है. फिर चाहे वो घरेलू सीरीज हो या फिर विदेशी दौरा. प्रदर्शन शानदार होने की वजह से टीम इंडिया की दावेदारी भी मजबूत मानी जा रही है. लेकिन सबकुछ ठीक है ऐसा नजर नहीं आ रहा. 2015 विश्वकप के बाद हुए बड़ी और महत्वपूर्ण सीरीज पर गौर किया जाये तो कुछ सवाल ऐसे हैं जिनका जवाब कोहली को अब भी नहीं मिला है.

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बल्लेबाजी में नंबर चार पर कौन

बल्लेबाजी में नंबर चार के लिए किस पर भरोसा किया जाये इसे लेकर टीम अब भी असमंजस में है. हालांकि मैंनजमेंट ने साफ कहा है कि ऑलराउंडर विजय शंकर ही पहली पसंद हैं. शंकर ने भारत के लिए 9 वनडे खेले हैं जिसमें 33 की औसत से 165 रन बनाये हैं और दो विकेट चटकाये हैं. किस्मत की ही बात है की विश्व कप के लिए शंकर चुने भी गये और खेलना भी तय है. बैटिंग में मध्यक्रम में धौनी को छोड़ कोई भी ऐसा नहीं है, जिसमें पूरे 50 ओवर बैटिंग करने का दम हो. चार नंबर पर बीते तीन साल में 10 से भी ज्यादा बल्लेबाज ट्राई किये गये हैं. जिनमें युवराज सिंह, सुरेश रैना, लोकेश राहुल, अंबाती रायडू, विजय शंकर, केदार जाधव के नाम शामिल हैं. टेस्ट मैच के उपकप्तान अजिंक्य रहाणे को भी मौका मिला, मगर 25 परियों में 37 की औसत मैनेजमेंट को प्रभावित नहीं कर सके. हालांकि राहुल बैकअप ओपनर के रूप में और शंकर बतौर ऑलराउंडर इंग्लैंड जायेंगे. रोहित शर्मा, शिखर धवन और कोहली के बाद नंबर चार एक कमजोर कड़ी है, जिसपर विरोधियों की नजरें होंगीं. धौनी भी निचले क्रम में पहले की तरह के बल्लेबाज नहीं हैं. लिहाजा उनको नंबर चार पर आजमाने को लेकर क्यों नहीं विचार किया जाता है, ये भी एक सवाल है, जो एक्सपर्ट पूछते रहते हैं. नंबर चार पर ऐसे बल्लेबाज की जरूरत है जो स्पिन खेले और स्ट्राइक रोटेट भी करे. साल भर पहले हुए वेस्टंडीज दोरे के बाद कोहली अंबाती रायडू से करीब-करीब आश्वस्त दिखे थे और कहा था की नम्बर चार की तलाश रायडू पर आके खत्म हो गयी है. उस सीरीज में रायडू ने विंडीज के खिलाफ 72 की औसत से 213 रन ठोंके थे. जिसमें एक शतक और एक अर्द्धशतक भी शामिल है. लेकिन उसके बाद कोहली के विश्वास और रायडू के प्रदर्शन दोनों में गिरावट आयी, जिसका खामियाजा रायडू को उठाना पड़ा. तब विजय शकंर की एंट्री हुई. चीफ सलेक्टर एमएसके प्रसाद को भरोसा है की शंकर तीनों विभाग में योगदान करेंगे. ऐसा इसलिए, क्योंकि रायडू को अंतिम 15 में भी शामिल नहीं किया गया. यदि शंकर नहीं चले तो लोकेश राहुल, दिनेश कार्तिक ही विकल्प हैं जिन्हें नंबर चार पर बहुत कम मौके मिले हैं. इसमें लोकेश राहुल एक ओपनर हैं और दिनेश कार्तिक ने इस नंबर पर कुछ ज्यादा कमाल नहीं किया है. साथ ही धौनी के बैकअप कीपर भी हैं तो वो भरोसा जो बाकी पोजिशन पर दिखता है वो इस नंबर पर नजर नहीं आता.

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2017-18 में इंग्लैंड दौरे पर गयी टीम इंडिया वन डे सीरीज 2-1 से हार गयी थी और आइपीएल से ठीक पहले घरेलू सीरीज में ऑस्ट्रेलिया से 3-2 से हार गयी. दोनों हार में मध्यक्रम फ्लॉप था. तो अगर बड़ा लक्ष्य सेट करना हो या फिर चेज करना तो फिर शुरुआती तीन बल्लेबाज और धौनी पर ही सारी जिम्मदारी रहेगी. मतलब यह मान कर चलना होगा की नंबर चार पर खेलनेवाला बल्लेबाज यदि चलता है, तो टीम इंडिया के लिए यह बोनस ही होगा. हां ये जरूर है कि नंबर चार पर जिस खिलाड़ी ने भरोसा दिखाया, वो लंबे समय तक टीम इंडिया के लिए खेलेगा.

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