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World Cancer Day : जमशेदपुर में यहां होती है ब्रेस्ट कैंसर की जांच, 15 मिनट में राई बराबर गांठ को भी पकड़ लेती है ये मशीन

Vishwajeet Bhatt 

Jamshedur  :  इस समय पूरी दुनिया में ब्रेस्ट कैंसर सबसे तैजी से फैल रहा है. खासकर शहरी महिलाओं में. कई तरह के कैंसर में से इसके मरीज सबसे अधिक हैं. विशेषज्ञ बताते हैं कि दुनिया की हर आठ महिलाओं में से एक महिला को यह बीमारी हो रही है, तो भारत की हर 20 में से एक महिला इस रोग से ग्रस्त हो रही है. यही आंकड़ा झारखंड और पूर्वी सिंहभूम जिले का भी है. विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं कि शहरी महिलाओं जिस तेजी से यह बीमारी फैल रही है, आने वाले दिनों में स्थितियां खतरनाक होंगी. लेकिन राहत की बात यह है कि समय रहते इस बीमारी का पता चल जाये, तो यह ठीक हो सकती है और असमय होनेवाली मौतों को कम किया जा सकता है.

झारखंड के लिए यह राहत की खबर है कि पूर्वी भारत में मात्र जमशेदपुर के ब्रह्मानंद नारायणा मल्टी स्पेशियलिटी हाॅस्पिटल में ब्रेस्ट कैंसर जांच की अत्याधुनिक सुविधा उपलब्ध है. यहां इंटेलिजेंट ब्रेस्ट एग्जामिनर (आईबीई) मशीन के जरिए मात्र 15 मिनट में ही राई के दाने के बराबर गांठ की जांच बिल्कुल मुफ्त हो जाती है. सबसे अच्छी बात ये है कि यदि कोई संस्था या संगठन कहीं शिविर लगाकर महिलाओं की जांच करता है, तो टीम वहां जाकर भी महिलाओं की मुफ्त जांच करती है. सुखद बात यह  है कि इस जांच का कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है और न ही रेडिएशन का कोई खतरा. झारखंड के लिए सबसे अच्छी बात है कि यह मशीन उनके लिए उपलब्ध है. इस मशीन से जांच कराने के लिए महिलाएं झारखंड से तो आती ही हैं, पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा और उत्तर प्रदेश से भी आती हैं.

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पूरे पूर्वी भारत में अत्याधुनिक आईबीई मशीन केवल ब्रह्मानंद अस्पताल में है. यहां ब्रेस्ट कैसर की जांच मुफ्त में होती है. कैंप में जाकर भी मुफ्त जांच की जाती है. जिस तेजी से यह बीमारी फैल रही है, वह चिंताजनक है. लेकिन, राहत की बात यह है कि यदि जांच शुरुआत में ही हो जाये, तो मरीज को शत-प्रतिशत ठीक किया जा सकता है.
डाॅ अमित कुमार, कैंसर रोग विशेषज्ञ

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ये हैं बीमारी के तेजी से फैलने के कारण

  • 40 साल की हर महिला को हर महीने खुद से ब्रेस्ट की जांच करनी है, जबकि महिलाएं नहीं करतीं.
  • हर छह माह पर क्लीनिकल ब्रेस्ट एग्जामिनेशन करना है जो नहीं कराया जाता.
  • साल में एक बार मैमोग्राफी करानी है, जो नहीं करायी जाती.

ऐसे बढ़ता है खतरा

गांठ का आकार जैसे जैसे बढ़ता जायेगा, खतरा उतना ही बढ़ेगा. साथ ही जिंदा रहने की संभावना भी कम होती जायेगी. ब्रेस्ट कैंसर की जांच का एक एक विकल्प मैमोग्राफी है, लेकिन इसमें विकिरण का खतरा है. एमआरआई भी एक विकल्प है, लेकिन ये महंगा है. विशेषज्ञ बताते हैं कि शुरुआती अवस्था में ही यदि जांच हो जाये और बीमारी पकड़ में आये तो मरीज को शत-प्रतिशत ठीक किया जा सकता है.

ये हैं लक्षण

  • ब्रेस्ट में गांठ
  • निप्पल से खून या दूसरे तरल पदार्थ का स्राव
  • ब्रेस्ट का एक समान न होना
  • कांख में भी गांठ होना

निवारण या इलाज

  • दवा से गांठ को छोटा करके सर्जरी
  • रेडिएशन
  • हार्मोनल थेरेपी

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