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समाज को जोड़ने का काम करता है साहित्य : नामधारी

दो दिवसीय हिंदी साहित्य सम्मेलन शुरू

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Palamu : साहित्यिक संस्था ‘परिमल प्रवाह’ के तत्वावधान में मेदिनीनगर सदर प्रखंड के जीजीपीएस जमुने के सभागार में दो दिवसीय हिंदी साहित्य समागम की शुरुआत की गयी. पूर्व विधानसभा अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी, मुख्य अतिथि आरक्षी उपमहानिरीक्षक पलामू प्रमंडल विपुल शुक्ल व पलामू प्रमंडल वन संरक्षक मनीष अरविंद ने दीप प्रज्ज्वलित कर समागम का उद्घाटन किया. स्वागत भाषण प्रोफेसर सुभाषचंद्र मिश्र, संचालन परिमल प्रवाह के अध्यक्ष विजय प्रसाद शुक्ल, श्रीधर प्रसाद द्विवेदी और धन्यवाद ज्ञापन परशुराम तिवारी ने किया. जीजीपीएस की छात्राओं ने स्वागत गान प्रस्तुत किया.

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जहां का साहित्य कमजोर होगा, वह समाज भी कमजोर होगा

उद्घाटनकर्त्ता पूर्व स्‍पीकर ने समागम के आयोजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि साहित्य को समृद्ध व समाज को जागृत बनाने में ऐसे समागम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. जिस देश व समाज में साहित्य नहीं होता, वहां अंधकार होता है. जहां का साहित्य कमजोर होगा, वह समाज भी कमजोर होगा. गुलामी के बाद भी यदि देश बचा रहा तो उसके पीछे हमारा समृद्ध साहित्य ही है. उन्होंने कहा कि साहित्य का काम समाज को जोड़ना है.

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बच्चों में भी अच्छी किताबें पढ़ने की आदत डालनी चाहिए

मुख्य अतिथि डीआइजी विपुल शुक्ल ने कहा कि साहित्य की जड़ों को मजबूत करना हमारा ध्येय होना चाहिए. ऐसा लगता है कि लोगों में पढ़ने की प्रवृत्ति घट रही है, यह अच्छी बात नहीं है. हमें बच्चों में भी अच्छी किताबें पढ़ने की आदत डालनी चाहिए. यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि बच्चे घर में क्या पढ़ते हैं?  उन्होंने कहा कि अच्छा साहित्य समाज का सही मार्गदर्शन करता है.

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साहित्य की गुणवत्ता को फोकस करना चाहिए

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कर रहे वन संरक्षक मनीष अरविंद ने कहा कि जब-जब साहित्य को हाशिये पर डालने की कोशिश हुयी है, तब तब इसके दुष्परिणाम सामने आये हैं. हमें संख्या पर जोर देने के बजाय साहित्य की गुणवत्ता को फोकस करना चाहिए. उन्होंने वन संरक्षण, वायु प्रदूषण, मिट्टी प्रदूषण व जल प्रदूषण की चर्चा करते हुये कहा कि साहित्य में इन विषयों को प्रमुखता मिले. वस्तुतः इसमें मानव जाति का कल्याण सन्निहित है. इसकी अनदेखी कर हम अपनी जड़ें खोद रहे हैं.

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कई साहित्‍यकारों ने दी अपनी प्रस्‍तुति

प्रोफेसर सुभाषचंद्र मिश्र ने अतिथियों का स्वागत करते हुये कहा कि एक साहित्यकार व्यष्टि होकर भी साहित्य के माध्यम से व्यष्टि की सेवा करता है. समागम के दूसरे सत्र में आधुनिक हिंदी काव्यों में राष्ट्रीय चेतना विषय पर परिचर्चा का आयोजन हुआ.

समाचार लिखे जाने तक नेपाल की श्वेता दीप्ति, जबलपुर के संजीव वर्मा सलिल, केंद्रीय विवि रांची की पूजा शुक्ला और पलामू के राजेश्वर पांडेय व प्रोफेसर सुभाषचंद्र मिश्र प्रभावपूर्ण प्रस्तुति दे चुके थे. परिचर्चा के बाद सायंकाल में कवि गोष्ठी का आयोजन होगा. आयोजन को सफल बनाने में संस्था सचिव उमेश पाठक ‘रेणु’, उपाध्यक्ष सत्यनारायण तिवारी, रमेश सिंह, खलील मिर्जा बेग, विजय मिश्र, सत्यनारायण पाण्डेय, केडी शरण, सुनील गांधी, रमेश विद्यानाथ व कमलनाथ तिवारी सक्रिय हैं. समागम में प्रोफेसर केके मिश्र, विजयानंद सरस्वती, अशोक तिवारी, श्यामकिशोर पाठक व हरिहर सिंह समेत कई गणमान्य व साहित्य प्रेमी उपस्थित थे.

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