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मजदूरों का दर्द: 2 की जगह 9 दिन में पहुंच रही श्रमिक ट्रेनें, भूख और प्यास ने एक दिन में ले ली 7 जान

Patna: कोरोना वायरस का प्रकोप पूरे देश में जारी है. इसे लेकर लॉकडाउन लागू है. वहीं लॉकडाउन होने की वजह से दूसरे राज्यों में काम कर रहे मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा है. इसकी वजह से उनके सामने खाना और पैसे की किल्लत हो गयी है.

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भूख और प्यास से मजदूरों की जान न जाये इसलिए वो अपने राज्य लौट रहे हैं. पहले तो ये मजदूर पैदल ही अपने राज्य लौटने लगे जिसमें कितनों की जान चली गयी. फिर इनकी परेशानी देखते हुए सरकार ने इनके लिए श्रमिक ट्रेन की व्यवस्था की ताकि ये सभी अपने घर पहुंच सकें.

लेकिन इन श्रमिक ट्रेनों के चलने के बाद भी मजदूरों को आराम कहां. जिस भूख-प्यास से बचने के लिए वो अपने घर आना चाहते थे अब उसी भूख-प्यास ने ट्रेन में भी उनकी जान ले ली. आखिर कब तक…. पहले तो सड़क दुर्घटनाओं और पटरियों पर लोगों ने दम तोड़े और अब ट्रेन में भी उनकी जान जाने लगी है.

जो ट्रेने प्रवासियों को उनके घर का रास्ता दिखाने वाली थी अब वही ट्रेनें अपना रास्ता भटक जा रही हैं. कहीं से कहीं ये ट्रेनें पहुंच जा रही है. जिसकी वजह से कई-कई दिनों में मजदूर अपने घर पहुंच रहे हैं. सिर्फ इतना ही नहीं इसके कारण कई लोगों ने भूख-प्यास और गर्मी से अपनी जान गंवा दी. इन जान गंवाने वालों में बच्चे, बूढ़े और जवान सभी शामिल हैं. कई के घरों में ईद के मौके पर मातम छा गया. मालूम हो कि श्रमिक ट्रेनों के देर से पहुंचने की वजह से एक दिन में सात लोगों ने अपनी जान गंवा दी है.

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श्रमिक स्पेशल ट्रेनें हो रही लेट

इन दिनों जो मजदूरों के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलायी जा रही हैं उनके लेट होने का सिलसिला जारी है. इनमें से दो ट्रेनें गुजरात के सूरत से 16 मई को बिहार के सीवान के लिए रवाना हुईं थी. लेकिन उनमें से एक ओडिशा के राउरकेल और दूसरी बेंगलुरु पहुंच गयीं. बाद में खोजबीन करने पर इन ट्रेनों का पता चल सका.

जिस ट्रेन को दो दिन के बाद 18 मई को सीवान पहुंचना था वह 9 दिनों के बाद 25 मई को पहुंची. ट्रेन को गोरखपुर के रास्ते सीवान आना था लेकिन वह छपरा होकर 25 मई को सुबह करीब 2.30 बजे पहुंची. वहीं जयपुर-पटना-भागलपुर श्रमिक स्पेशल ट्रेन 24 मई की रात पटना की जगह गया जंक्शन पहुंच गयी.

महाराष्ट्र से लौट रहे मजदूर की आरा में मौत

महाराष्ट्र से एक मजदूर वापस अपने घर जा रहा था. आरा पहुंचने पर जब लोगों नें उसे नींद से उठाना चाहा तो पाया कि उसकी मौत हो गयी है. मृतक की पहचान निसार खान के रूप में हुई है. वह बिहार के गया का रहने वाला था और श्रमिक स्पेशल ट्रेन से अपने घर लौट रहा था.

चार साल के बच्चे की गयी जान

घर पहुंचने की आश में आंखें तो खुली रहीं लेकिन चार साल के इरशाद की जान चली गयी. पश्चिम चंपारण जिला के चनपटिया थाना के तुलाराम घाट का रहने वाला मो पिंटू 23 मई को दिल्ली से पटना के लिए चला था. 24 मई को वह सुबह दानापुर से मुजफ्फरपुर जंक्शन पहुंचा.

लेकिन फिर मुजफ्फरपुर में बेतिया की ट्रेन में चढ़ने के दौरान उसके बेटे इरशाद की मौत हो गयी. पिंटू ने बताया कि भूख-प्यास और गर्मी की वजह से उसके बेजे की जान चली गयी. ईद के दिन उसके घर में खुशी की जगह मातम पसर गया.

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4 दिन से भूखे अनवर की गयी जान

महाराष्ट्र के बांद्रा टर्मिनल से श्रमिक स्पेशल ट्रेन से मो अनवर अपने घर कटिहार लौट रहा था. वह 21 मई को बांद्रा टर्मिनल से ट्रेन से अपने घर लौट रहा था. लेकिन घर पहुंचने से पहले ही बरौनी में उसकी 24 मई की शाम मौत हो गयी.

महिला ने तोड़ा दम

सूरत से श्रमिक स्पेशल ट्रेन से महिला अपने पति के साथ अपने घर जा रही थी. इस दौरान 24 मई को उसने अपने पति से दोपहर 1 बजे सासाराम पहुंचने पर कहा कि उसे भूल लगी है. जिसके बाद उसने नाश्ता किया और पिर कांपने लगी. और देखते ही देखते उसने अपने पति की गोद में दम तोड़ दिया. महिला ओबरा प्रखंड के गौरी गांव की रहने वाली थी.

ट्रेन में तबीयत खराब होने के बाद अस्पताल में तोड़ा दम

महाराष्ट्र से मोतिहारी जिले के कुंडवा-चैनपुर निवासी अपने घर लौट रहा था. उसकी ट्रेन में अचानक तबियत खराब हो गयी. जिसे देखते हुए उसे ट्रेन से उतारकर बिहार के जहानाबाद सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया. लेकिन वहां पहुंचते ही डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

बच्चे के शव के साथ माता-पिता ने किया सफर

महाराष्ट्र से वापस अपने घर सीतामढ़ी लौटने के दौरान एक परिवार को अपने बच्चे के शव के साथ सफर करना पड़ा. तबियत खराब होने पर आगरा में बच्चे का इलाज कराया गया लेकिन कानपुर पहुंचने के बाद बच्चे की मौत हो गयी. दंपती देवेश पंडित सीतामढ़ी के खजूरी सैदपुर थाना क्षेत्र के सोनपुर गांव का रहने वाले हैं.

23 साल की अलविना की ट्रेन में गयी जान

कटिहार की रहने वाली अलविना अपने जीजा इस्लाम खान के साथ अपने घर लौट रही थी. वह अहमदाबाद से अपने घर के लिए निकली थी. लेकिन ट्रेन में ही उसकी जान चली गयी. बताया जा रहा है कि अलविना विक्षिप्त थी और उसका इलाज चल रहा था. वहीं इस घटना के बाद उसके जीजा का रो-रोकर बुरा हाल था.

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