GiridihJharkhand

#JantaCurfew के बीच कोरोना से भयभीत कामगार राजस्थान, गुजरात और यूपी से लौटे गिरिडीह, बगैर जांच के पहुंचे घर

Giridih: कोरोना से सर्तकता और बचाव के साथ जागरुकता अभियान चलाने का दावा गिरिडीह प्रशासन द्वारा किया गया था. खुद डीसी राहुल सिन्हा ने स्वास्थ विभाग के पदाधिकारियों के साथ प्रेसवार्ता कर हर गतिविधियों की जानकारी दी.

लेकिन रविवार को जनता कर्फ्यू के बीच जो तस्वीरें दिखीं, उससे यह समझा जा सकता है कि इस जानलेवा बीमारी के प्रति प्रशासन और स्वास्थ विभाग का रवैया कितना ढीला है.

दूसरे राज्यों में मजदूरी कर लौट रहे लोगों की जांच के लिए कोई व्यवस्था स्वास्थ विभाग द्वारा नहीं की गयी थी. बाहर से आये लोग बिना जांच के लिए घर लौट रहे थे.

इसे भी पढ़ें : कोविड19:  सीएम ने हेमंत सोरेन ने राज्य की 4400 से अधिक पंचायतों में आइसोलेशन सेंटर बनाने आदेश दिया

डीसी बोले-डर लग रहा है तो घर जाकर आइसोलेशन में रहें

मामले की जानकारी जब डीसी को दी गयी तो उन्होंने भी साफ तौर पर कहा कि कोरोना के जांच की कोई खास व्यवस्था नहीं है. ऐसे लोगों को खुद में संक्रमित होने का भय लग रहा है तो वह खुद घर जा कर एकांत में रहकर आइसोलेशन में रह सकते हैं.

गौर करने वाली बात यह भी है कि बीते शनिवार को सिविल सर्जन ने पारसनाथ और सरिया रेलवे स्टेशन में बाहर से आने वाले यात्रियों को जांच की व्यवस्था का दावा किया था लेकिन दूसरे दिन रविवार को स्वास्थ्य विभाग की पोल भी खुलती दिखी.

रविवार को नगर थाना पुलिस के पदाधिकारी व जवान पद्म चौक के पास ड्यूटी पर तैनात थे. इसी दौरान गुजरात, यूपी और राजस्थान से करीब दर्जन भर लोग शहर पहुंचे. यहां से सबों को अपने-अपने घर लौटना था.

दर्जन भर लोग जिन राज्यों से गिरिडीह शहर पहुंचे थे वहां कोरोना का संक्रमण सबसे अधिक फैला हुआ है. ड्यूटी पर तैनात पुलिस जवानों ने यात्रियों से पूछताछ की.

इसे भी पढ़ें : मनरेगा मजदूरी 171 से बढ़ाकर 280 करने की दिशा में हेमंत सरकार, केंद्र से किया अनुरोध

सूरत से लौटे बेंगाबाद के लोग

बेंगाबाद के दामोदरडीह गांव के सिंटू राणा, रिशु राणा, छोटू राणा, संदीप राणा समेत अन्य लोगों का कहना था कि वे लोग सूरत के एक फर्नीचर फैक्ट्री में काम करते थे. इस जानलेवा बीमारी की चपेट में सूरत के कई हिस्सों के लोग आ चुके हैं.

लिहाजा, फैक्ट्री प्रबंधन ने उनलोगों को भुगतान कर वापस जाने को कहा. सूरत से आये इन कामगारों को पुलिस जवानों ने जांच के लिए सदर अस्पताल तो भेज दिया लेकिन अस्पताल में थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था और कोई चिकित्सक नहीं रहने के कारण बेंगाबाद के सारे युवक अस्पताल में दस मिनट के प्रतीक्षा के बाद घर लौट गये.

इस दौरान पत्रकारों ने सिविल सर्जन को पूरे मामले की जानकारी देनी चाहा, तो उनका नंबर भी लगातार नॉट रिचेबल ही आ रहा था.

राजस्थान से लौटे मधुपुर निवासी

इधर राजस्थान के अजमेर से मधुपुर के कामगार मो शादाब, इरशाद और आफताब नामक यात्री उतरे. इनके साथ ही मधपुर के मो इरशाद भी यूपी के कानपुर से पहुंचे थे. लेकिन तमाम बस सेवा और रेल सेवा ठप होने के बाद सभी भटक रहे थे.

इस बीच मधुपुर के पथरौल थाना के कुर्मीडीह गांव निवासी विकास यादव, दिलीप यादव, देवा यादव और बबलू चौधरी भी शहर के रेलवे स्टेशन पहुंचे.  लेकिन घर लौटने की कोई व्यवस्था नहीं रहने के कारण सभी स्टेशन में घूम रहे थे.

बाहर से आएं इन कामगारों के स्वास्थ जांच की कोई व्यवस्था नहीं थी. पत्रकारों द्वारा तस्वीर लेते देख यात्रियों ने भी कहा कि वे लोग भी खुद को जांच कराकर संतुष्ट हो कर घर लौटना चाहते हैं. लेकिन कहां जा कर जांच करायें, यह कर्फ्यू के कारण पता नहीं चल रहा.

इसे भी पढ़ें : पुलिस को बड़ा नुकसान :  छत्तीसगढ़ में नक्सली हमले में 17 जवान शहीद, 14 घायल

One Comment

  1. 418284 597610This kind of publish appears to get yourself a great deal of visitors. How will you acquire traffic to that? It provides a fantastic distinctive twist upon issues. I guess having something traditional or perhaps substantial to give info on could be the central aspect. 708756

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button