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सरायकेला ग्लास फैक्ट्री का नामांतरण रुकवाने की मुहिम में जुटे श्रमिक और परिजन, मुख्यमंत्री से रजिस्ट्री रद्द करने की मांग

श्रमिकों ने कहा-  60 वर्षों से रहते आ रहे हैं, पहला अधिकार हमारा, बिजली-पानी-वोटर कार्ड सब हमारे नाम पर

Durga Rao
Kandra :   एशिया की पहली ग्लास फैक्ट्री सरायकेला ग्लास वर्क्स, कांड्रा अब इतिहास बनकर पन्नों में सिमट गयी है. वर्ष 1940 में कंपनी के संस्थापक स्वर्गीय हरिचंद वार्ष्णेय ने कांड्रा में एशिया की इस पहली ग्लास फैक्ट्री की स्थापना की थी. आंतरिक कलह की वजह से यह कारखाना 1993 में बंद हो गया. यहां काम करनेवाले किसी कर्मचारी को तीन साल के वेतन के साथ फुल सेटेलमेंट नहीं दिया गया. उस समय मजदूर दाने-दाने के लिए मोहताज थे. काफी कठिनाइयों झेलने के बाद मजदूरों ने किसी तरह खुद को और परिवार को संभाला, कितनों के ही बेटे-बेटियां पढ़ाई बीच में छोड़ कर रोजगार की तलाश में भटके. ये मजदूर और इनका परिवार अभी भी कंपनी द्वारा आवंटित घरों में रहते आ रहे हैं. 7 दिसंबर, 1999 को कारखाने को ‘बीमार’ घोषित किया गया था. कंपनी के लेनदार इसका मामला कोलकाता उच्च न्यायालय में  ले गये. 16 अगस्त 2012 को कोलकाता उच्च न्यायालय ने कंपनी की 42. 59 एकड़ अचल संपत्ति की बिक्री की सूचना जारी की. 11 जनवरी 2013 को उच्च न्यायालय कोलकाता ने नवनीत मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड को 9.21 करोड़ रुपया अचल संपत्ति बेचने की अनुमति दी.

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करोड़ों की संपत्ति को गलत तरीके से लेने का आरोप

सरायकेला ग्लास फैक्ट्री के श्रमिकों का तर्क है कि करोड़ों की संपत्ति को गलत तरीके से नवनीत मार्केटिंग द्वारा सस्ते दाम में खरीदा गया. अब श्रमिकों ने नवनीत मार्केटिंग का नामांतरण और खजाना पर रोक लगाने हेतु कोल्हान आयुक्त ,सरायकेला-खरसावां के उपायुक्त, गम्हरिया अंचल अधिकारी, झारखंड  के मुख्यमंत्री और भू राजस्व मंत्री को पत्र लिखकर रजिस्ट्री रद्द करने की मांग की है. उनका कहना है कि कंपनी का आवासीय परिसर राज्य सरकार की भूमि है. उसे भी गलत तरीके से नवनीत मार्केटिंग लेने की तैयारी कर रहा है. अंचल कार्यालय द्वारा बीते कुछ महीने पूर्व मापी करने आये कर्मचारियों का कॉलोनी वासियों ने विरोध किया. कॉलोनीवासियों ने सरकार से आग्रह किया है कि इस जमीन की बंदोबस्ती उनके नाम करते हुए जमाबंदी की जाये. साथ ही उच्चस्तरीय जांच कमेटी बनाकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करायी जाये और दोषी पदाधिकारियों पर कार्रवाई की जाये.

सरायकेला के राजा और बिहार सरकार ने लीज पर दी थी जमीन 

बता गें कि सरायकेला ग्लास फैक्ट्री की कुल जमीन 55.73 एकड़ है. सरायकेला के राजा द्वारा 18 जनवरी 1942 को 20 एकड़ जमीन कंपनी के लिए दी गयी थी. राजा ने 17 सितंबर 1946 को 6.31 एकड़ स्कूल भवन, अस्पताल एवं मैदान के लिए दी गयी. 1.68 एकड़ भूमि बांध और डेयरी फार्म के लिए, 2 एकड़ जमीन रेल लाइन बनाने के लिए  99 वर्षों के लिए लीज पर दी. वहीं आवासीय भवन के लिए बिहार सरकार ने 20. जुलाई 1955 को 1.43 एकड़ जमीन 30 वर्षों के लिए लीज पर दी थी.  बाकी जमीन पर सरायकेला ग्लास फैक्ट्री द्वारा अवैध कब्जा किया गया था.

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