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खेतों तक कृषि फीडर स्थापित करने का काम शुरू

धनबाद, हजारीबाग, रामगढ़, रांची व अन्य जिलों के खेतों तक पहुंचेगी बिजली की लाइन

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केंद्र सरकार की एग्रीकल्चर फीडर के तहत हो रहा है काम

Ranchi : झारखंड के खेतों में केंद्रीय योजना के तहत एग्रीकल्चर फीडर स्थापित करने का काम शुरू हो गया है. धनबाद, हजारीबाग, रामगढ़, रांची और अन्य जिलों में किसानों को अब उनके डीजल पंप सेट से मुक्ति दिलाने के लिए पहले चरण का काम शुरू हो गया है. सरकार का मानना है कि बगैर डीजल पंप के ही खेतों तक पर्याप्त मात्रा में सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने के लिए बिजली उपलब्ध करायी जायेगी. दो वर्षों के भीतर राज्य के सभी खेतों में एग्रीकल्चर फीडर स्थापित कर दी जायेगी.

धनबाद के कई गांवों में एग्रीकल्चर फीडर शुरू

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धनबाद के निरसा, टुंडी, तोपचांची के एक सौ गांवों में एग्रीकल्चर फीडर शुरू भी कर दिया गया है. केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने सभी खेतों तक बिजली की सुविधा बहाल करने की घोषणा की थी. इसके अंतर्गत खेतों तक 11 हजार केवीए तक का लाइन पहुंचाया जा रहा है और आवश्यकता के अनुसार 10 केवीए से लेकर 25 केवीए क्षमता तक के ट्रांसफारमर लगाये जा रहे हैं. केंद्र सरकार ने दिसंबर 2019 तक देश भर के सभी खेतों तक एग्रीकल्चर फीडर स्थापित करने का भारी भरकम लक्ष्य तय किया है.

इसके लिए 11,500 करोड़ से अधिक का प्रावधान भी किया गया है. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी हाल ही में घोषणा की थी कि एग्रीकल्चर फीडर से राज्य के किसानों को औसतन छह घंटे बिजली प्रति दिन उपलब्ध करायी जायेगी. इसके लिए बिजली की आधारभूत संरचना को और सुदृढ़ किया जा रहा है. इतना ही नहीं उन्होंने किसानों को भी सब्सिडी युक्त बिजली देने की घोषणा की है.

केइआइ, पोलिकैब, टेक्नो इंडिया, पेस पावर, बजाज और गोदरेज सरीखी कंपनियां दौड़ में

एग्रीकल्चर फीडर स्थापित करने में देश की नामी-गिरामी कंपनियां लगी हुई हैं. झारखंड में केइआइ, पोलिकैब, टेक्नो इंडिया, पेस पावर, बजाज और गोदरेज सरीखी कंपनियां काम कर रही हैं. झारखंड विद्युत संचारण निगम लिमिटेड और झारखंड विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की तरफ से इन कंपनियों को कार्यादेश जारी किया गया है.

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