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कछुए की चाल से आगे बढ़ रहा स्मार्ट सिटी का काम

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  • सितंबर 2017 में उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने किया था शिलान्यास
  • एचइसी के 656.43 एकड़ में बनना है स्मार्ट सिटी
  • सिर्फ जूपमी का ही काम है तेज
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Deepak

Ranchi: झारखंड सरकार का स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट कछुए की चाल से आगे बढ़ रहा है. एचइसी की 656.43 एकड़ जमीन पर स्मार्ट सिटी बनायी जानी है. झारखंड सरकार ने इसके लिए स्मार्ट सिटी कारपोरेशन लिमिटेड भी गठित किया है. 750 करोड़ से अधिक की परियोजना में झारखंड अरबन डेवलपमेंट प्लानिंग इंस्टीट्यूट (जूपमी), कन्वेंशन सेंटर, अरबन सिविक टावर और मुख्य प्रवेश द्वार बनाया जाना है. जूपमी को छोड़ अन्य किसी भी योजना की प्रगति सही नहीं है. जूपमी का काम एनपीभी प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को मिला हुआ है. अरबन सिविक टावर का काम मुंबई की शापूरजी पालोनजी को दिया गया है. वहीं 391.50 करोड़ की लागत से बननेवाले कन्वेंशन सेंटर का काम एलएनटी ने बीच में ही रोक रखा है. एलएनटी का कहना है कि नींव की खुदाई में पत्थर निकल जाने से दिक्कतें हो रही हैं. स्मार्ट सिटी के मुख्य प्रवेश द्वार के लिए बाबाधाम कंस्ट्रक्शन लिमिटेड को कार्यादेश मिला है. इसमें अब तक 13 से अधिक पेड़ काटे गये हैं. यहां यह बताते चलें कि राजधानी के एक वार्ड के बराबर आकार वाले स्मार्ट सिटी में सभी तरह की अत्याधुनिक सुविधाएं सरकार उपलब्ध करायेगी. इसका शिलान्यास सितंबर 2017 में उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने काफी तामझाम से किया था. 20 फरवरी 2020 तक स्मार्ट सिटी का काम पूरा कर लिया जाना है. जूपमी को छोड़ अन्य संरचनाओं का काम 10 फीसदी भी पूरा नहीं हो पाया है.

क्या है विभिन्न परियोजनाओं की स्थिति

जूपमी भवन निर्माण

जूपमी भवन निर्माण को लेकर विवाद और गहरा गया है. एनपीभी प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को परिसर में आठ अपार्टमेंट बनाने थे. इसमें से दो भवन ही बनाये गये हैं. 107.75 करोड़ की परियोजना का काम नवंबर 2019 तक पूरा करना है. इसमें मुख्य प्रशासनिक भवन जी प्लस-6 स्तर का है. जबकि सेंट्रल डायनिंग रूम तीन मंजिला होगा. प्रशासनिक भवन का निर्माण कार्य समय से पूरा होने की संभावना है.

कन्वेंशन सेंटर का काम बंद

एलएनटी की ओर से बनाये जानेवाले कन्वेंशन सेंटर का काम फरवरी 2020 तक पूरा कर लिया जाना है. इस सेंटर का निर्माण कार्य चट्टान मिलने के कारण रोक दिया गया है. अभी फाउंडेशन की खुदाई ही चल रही है.

अरबन सिविक टावर

स्मार्ट सिटी का यह महत्वपूर्ण अंग है. जी प्लस 15 स्तरीय बहुमंजिली इमारत के निर्माण को लेकर भारतीय विमान प्राधिकरण (एएआइ) ने आपत्ति की है. अब सरकार इस इमारत की ऊंचाई कम करने में लगी हुई है. इसके बेसमेंट के लिए 13 हजार क्यूबिक मीटर की खुदाई कर ली गयी है. इसकी मिट्टी दूसरी जगह जमा कर दी गयी है. अरबन सिविक टावर का निर्माण शापुरजी पालोनजी को दिया गया है. इस कंपनी ने सरकार से मोबीलाइजेशन एडवांस की राशि मांगी है. सरकार की तरफ से इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया है. ऐसे में 20 फरवरी 2020 तक टावर का निर्माण कैसे होगा कि यह चिंता का विषय है.

176 करोड़ में बहाल होगी बिजली व्यवस्था

स्मार्ट सिटी में 176 करोड़ की लागत से बिजली व्यवस्था बहाल की जायेगी. सरकार की तरफ से हाल ही में हाई टेंशन तार हटाने के लिए निविदा आमंत्रित की गयी थी.

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