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आश्चर्य : बीसीसीएल से हर रोज हजारों टन कोयले की होती है चोरी,एक भी एफआइआर नहीं

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Dhanbad : धनबाद पुलिस आये दिन दिखावे के लिए ही सही चोरी का कोयला लदा वाहन पकड़ती है. कई हार्डकोक भट्ठे और अवैध ढ़ंग से चलाये जा रहे डीपो पर छापामारी करती है, कोयला पकड़ा जाता है, मुकदमा होता है. आपणो घर रियल इस्टेट प्रोजेक्ट में चोरी के कोयले की अवैध कमाई से सैकड़ों करोड़ निवेश का आयकर विभाग ने दस्तावेजी प्रमाण तक ढूंढ निकाला है. लेकिन सवाल है कि क्या बीसीसीएल कोयला चोरी की शिकायत दर्ज कराती है.  कभी एक भी छंटाक कोयले की चोरी की शिकायत पुलिस में दर्ज करायी. क्या कभी चोरी का कोयला बीसीसीएल की किसी खास कोलियरी या अवैध खनन स्थल का होने का क्लेम किया गया? थाने में जब्त कोयला का क्लेम नहीं होता है. इसीलिए इस कोयले से मेस का चूल्हा जलता है. पकड़े गये कोयले के आक्शन की भी प्रक्रिया बाद में पूरी की जाती है.

अवैध खनन की रिपोर्ट भी नहीं देती

बीसीसीएल अपने क्षेत्र में होनेवाली अवैध खनन की रिपोर्ट भी पुलिस को नहीं देती. न्यू राजपुरा प्रोजेक्ट में अभी कुछ दिन पहले अवैध उत्खनन करते तीन लोगों की मौत हुई. यहां चल रहे अवैध उत्खनन की रिपोर्ट बीसीसीएल ने पुलिस से नहीं की थी. अन्य स्थलों पर भी हुए अवैध कोयला उत्खनन में इस साल कई लोगों की मौत हुई. एक दशक में कोयला का अवैध उत्खनन करते धनबाद और आसपास के क्षेत्रों में मरनेवालों की संख्या 50 से कम नहीं होगी. ऐसे मामले में पहले भी किसी को मौत का जिम्मेवार मान कर किसी को सजा नहीं दी गयी. हालांकि, कुछ दिनों पहले गोमिया में कोयला चोरी का दोषी पाकर विधायक योगेंद्र महतो को तीन साल की सजा सुनाई गयी. ऐसा दूसरा उदाहरण कहीं है क्या. इस सवाल का जवाब शायद ही मिले.

कोयला चोरी क्यों चल रही है

  1. सरकारी तंत्र कोयला चोरी रोकने में विफल है.
  2. कोयला कंपनियां चोरी के प्रति गंभीर नहीं है या अधिकारी ऐसे मामलों की अनदेखी करते हैं.
  3. इलाके की पुलिस और सीआइएसएफ अवैध खनन और कोयला चोरी के प्रति उदासीन हैं.
  4. आला अधिकारियों और सत्तापक्ष के बड़े नेताओं के संरक्षण के कारण कोयले का अवैध उत्खनन और चोरी होती है. इस कारण कोई कार्रवाई नहीं होती.

न्यू राजापुर प्रोजेक्ट के मामले में क्या हुआ

न्यू राजापुर में जहां अवैध उत्खनन करते तीन लोगों की मौत हुई, इस मामले में किसी की गिरफ्तारी अभी तक नहीं हुई है. मामला दीपावली के समय का है. न्यूज विंग के पूछने पर झरिया इंस्पेक्टर रणधीर कुमार ने गुरुवार को बताया कि मामले को लेकर यूडी केस दर्ज किया गया है. और कोई कार्रवाई हुई है? कहा, नहीं. खबर है कि न्यू राजापुर प्रोजेक्ट में जिस जगह पर अवैध उत्खनन हुआ था, उस जगह की डोजरिंग कर दी गयी है. उससे दो सौ गज दूर अवैध खनन चालू किया गया है.

कोयला सचिव चाहते हैं बंद हो कोयले की चोरी !

कोयला सचिव इंद्रजीत सिंह ने बीते दिनों रांची में कोयला चोरी रोकने के लिए गहन मंथन किया. कोयला चोरी में शामिल अधिकारियों और सभी को पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए वरीय आइएएस अनिल पाल्टा के नेतृत्व में एसआइटी बनायी गयी थी. इसमें डीआइजी मनोज सिंह, एसपी मो. अर्शी, टी मुरगन और राजकुमार को शामिल किया गया था. दो महीने में रिपोर्ट मांगी गयी. समय पूरा हो गया है. इधर, कोयलाचोरी को लेकर सीआइडी रिपोर्ट की चर्चा है. अब स्पेशल ब्रांच की रिपोर्ट की भी बात हो रही है. सवाल है एसआइटी की रिपोर्ट कहां है.

यह खनन प्रहरी क्या बला है?

कोयलाचोरी रोकने के लिए केंद्रीय कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने एक एप जारी किया था खनन प्रहरी. इस एप से सेटेलाइट के माध्यम से देश भर के 42 जिलों के 787 कोल ब्लाक पर नजर रखने की बात कही गयी थी. हालांकि, 4 जुलाई 2018 को जब यह एप जारी किया गया था, तो उसी समय इसकी कई खामियां गिनायी गयी. अभी तक खनन प्रहरी एप से कोयला चोरी के एक भी मामले का उद्भेदन की सूचना नहीं है.

पुलिस करे क्या और कैसे, यह भी सवाल

कोयला चोरी और अवैध उत्खनन के मामले में पुलिस कुछ करे तो कैसे.  जिले के आला पुलिस अधिकारी तक कन्फर्म नहीं कि, बीसीसीएल अपने खनन क्षेत्र से किसी भी तरह से होनेवाले अवैध कारोबार या खनन की जानकारी पुलिस को देती है. सीआइएसएफ यह नहीं जानता कि, कोयला चोरी को रोकना कहां से हैं. सीआइएसएफ बीसीसीएल से चोरी कर बाहर निकले कोयले को जब्त करने का यत्न करते यदा-कदा दिखता है. साइकिल से कोयला ढोनेवाले यदा-कदा पकड़े जाते हैं.

सच कहा जाए तो कोयला चोरी रोकने की इतने दिनों के बाद भी कोई मेशेनरी विकसित नहीं की गयी है. हालांकि, कोयला चोरी की विकसित मेशेनरी है. चोरी का कोयला कहां ले जाना है और कैसे फर्जी कागजात बनाकर टपाना है, यह चैनेलाइज्ड है.

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