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महिला सुरक्षा के दावे फेल, राजधानी में असुरक्षित है बेटियां !

दुष्कर्म की कीमत महज डेढ़ लाख रुपये लगाई गई.

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Ranchi : महिला सुरक्षा के नाम पर झारखंड की राजधानी रांची की पुलिस बड़े बड़े दावे करती है. हकीकत तो यह है रांची की पुलिस बेटियों की आबरू बचाने में पूरी तरह से विफल है. झारखंड में अब बेटियां सुरक्षित नहीं हैं. आए दिन छेड़खानी, अपहरण एवं दुष्कर्म की घटनाओं के कारण लड़कियां भयभीत हैं.

जहां को दिन पहले दिनदहाड़े सर थाना क्षेत्र के छह साल की बच्ची से हैवानियत हुई ,तो वहीं दूसरी तरफ रातू थाना क्षेत्र के एक दिव्यांग महिला के साथ दुष्कर्म की कीमत महज डेढ़ लाख रुपये लगाई गई. जिसकी जितनी निंदा की जाए वह कम है.

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महिला की सुरक्षा का सच बता रहे हैं, एनसीआरबी के आंकड़े 

अनुसार जनवरी 2018 से लेकर जुलाई 2018 तक यानी 212 दिनों में पूरे राज्य में 846 दुष्कर्म की घटनाएं घटित हुई है. मतलब औसतन हर दिन चार दुष्कर्म की घटनाएं घट रही है. जिसमें राजधानी रांची में सर्वाधिक दुष्कर्म की घटनाएं घटित हुई है. आंकड़े के मुताबिक जुलाई महीने में पूरे राज्य में 134 दुष्कर्म के केस दर्ज हुए. जबकि अकेले राजधानी रांची में 24 दुष्कर्म के मामले शहर के विभिन्न थानों में दर्ज हुए.

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बढ़ रही दुष्कर्म  और हत्या कि घटना

पहली घटना:

राजधानी में बूटी मोड़ के पास रहने वाली इंजीनियरिंग की छात्रा को अकेले पाकर अपराधियों ने सामूहिक दुष्कर्म किया और फिर जिंदा जलाकर मार डाला. इस घठना के बाद बहुत शोर-शराबा हुआ, विपक्ष ने इस मामले में सरकार को घेरा. लोगों ने कैंडच मार्च निाकला, विरोध-प्रदर्शन हुआ. जांच के लिए दर्जनों टास्क फोर्स का गठन किया गया. राज्य का पूरा खुफिया तंत्र लग गया, पर पुलिस अपराधियों का सुराग तक नहीं लगा सकी. विपक्षी दलों एवं जनता के भारी दबाव के बाद इसकी जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को सौंपी तो गई, लेकिन सीबीआई भी अभी हाथ-पैर ही मार रही है.

दूसरी घटना:

राजधानी के ही पुंदाग मोहल्ले की रहने वाली कॉलेज छात्रा अफसाना का जला हुआ शव लोहरदगा जिले से बरामद हुआ. छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद उसे जिंदा जला दिया गया था. अफसाना 6 अप्रैल 2018 से गायब थी.इस मामले में एसआईटी का भी गठन हुआ, पर नतीजा अभी तक नहीं निकला है.

तीसरी घटना:

इसी तरह की एक घटना रांची के ही रातू में हुई. 11 अप्रैल को 12 साल की एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म कर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई. उसका चेहरा बड़ी बेदर्दी से पत्थर से बुरी तरह कुचल दिया गया था.

चौथी घटना:

23 मार्च को जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र में 18 साल की युवती की हत्या सामूहिक दुष्कर्म के बाद कर दी गई थी.

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बदतर विधि-व्यवस्था

पुलिस यह दावा करती है यह कि शहर में विधि-व्यवस्था की स्थिति बेहतर है और महिलाओं को पूरी सुरक्षा दी जा रही है. लेकिन हकीकत इससे उलट है. पुलिस सूत्रों की मानें, तो केवल राजधानी रांची में ही 40 महिला शक्ति कमांडो, 30 पीसीआर और 40 टाईगर मोबाईल तैनात हैं. लेकिन फिर भी ऐसे दुष्कर्मियों के हौसले बुलंद हैं.

आरोपी पीड़िता का परिचित होता है

ऐसे कई मामलों में तो आरोपी पीड़िता के आस-पास का ही होता है. राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, दुष्कर्म के 95 फीसदी मामलों में आरोपी पीड़िता का परिचित होता है. आंकड़े बताते हैं कि इन परिचितों में 27 प्रतिशत पड़ोसी भी शामिल थे, जबकि 22 प्रतिशत मामलों में शादी का वादा करने के बाद आरोपी ने दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया, वहीं नौ प्रतिशत दुष्कर्म के मामलों में परिवार के सदस्य और रिश्तेदार शामिल थे. दुष्कर्म की कुल घटनाओं में दो प्रतिशत लिव इन पार्टनर या पूर्व पति, जबकि 1.6 प्रतिशत घटनाओं में नियोक्ता या सहकर्मी एवं 33 प्रतिशत अन्य परिचित या सहयोगियों द्वारा अंजाम दिए गए थे.

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शक्ति भी हो गई फेल

रांची पुलिस ने महिला सुरक्षा के मद्देनजर शक्ति नाम से एक मोबाइल ऐप भी जारी किया था, जिसमें महिलाएं मुसीबत के समय में पुलिस से मदद मांग सकती है लेकिन एप कामयाब न होने की वजह से शक्ति भी काम नहीं आई और तो और जिन महिलाओं के पास फोन या स्मार्ट फोन नहीं है उनके लिए पुलिस तक पहुंचना और भी मुश्किल है.

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