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महिला सशक्तीकरण : सखी बास्केट मोबाइल एप से गांवों में शुरू हुई राशन की होम डिलिवरी

Ranchi : महिलाएं एसएचजी के जरिये अपनी आमदनी बढ़ा सकें इसके लिए नयी पहल शुरू हुई है. दीदियां हाइटेक होने लगी हैं. खूंटी में सखी बॉस्केट मोबाइल एप्प के जरिये राशन की होम-डिलिवरी का काम शुरू किया गया है. ग्राहक ऑनलाइन ऑर्डर कर जरूरत की चीजें मंगवा सकते हैं. उसी प्रकार आजीविका फॉर्म फ्रेश के जरिये रांची में लोग घर बैठे सब्जियां मंगा रहे हैं. कोरोना संकट में घरों से निकलने से लोग बच रहे हैं. ऐसे में घर बैठे ऑनलाइन तरीके से एसएचजी द्वारा राशन औऱ सब्जियां उपलबध कराने का कंसेप्ट लोग खूब पसंद करने लगे हैं. इधर राज्य सरकार भी आनेवाले समय में एसएचजी के सभी प्रोडक्ट्स को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध कराने की योजना पर लग गयी है.

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चार महीने में 5 लाख का कारोबार

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कोरोना काल में अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाना एसएचजी के लिए चैलेंज रहा है. ऐसे में खूंटी के सदर प्रखंड के अनिगड़ा ग्राम की दो सखी मंडल सहेली और गुलाब मंडल ने राशन की होम-डिलिवरी करने की योजना बनायी. पहले तो सखी बास्केट एप तैयार कराया गया. इसके बाद मिले ऑनलाइन ऑर्डर के जरिये ग्राहकों तक राशन सामग्री पहुंचाने का काम शुरू किया गया. पिछले चार महीने में सखी बास्केट ने 1500 से ज्यादा लोगों तक अपनी सेवाएं दी हैं. अप्रैल से लेकर अब तक इसके जरिये 4 लाख 72 हज़ार रुपये का लेन-देन किया जा चुका है. इसी तरह रांची में जेएसएलपीएस द्वारा गठित एसएचजी समूह आजीविका फॉर्म फ्रेश का संचालन करने लगा है. इस मोबाइल एप के जरिये सब्जी की डिलिवरी की जा रही है. पिछले दो महीने में करीब 4000 से ज्यादा घरों तक सब्जियां पहुंचायी गयी हैं.

मोबाइल एप पर 35,000 का खर्च

गुलाब महिला मंडल की सदस्य ललिता देवी के बेटे रोशन नाथ गंझू ने सखी बास्केट के लिए एक एप्लीकेशन (एप) बनाने का सुझाव रखा था. होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी कर चुके रोशन की पहल से दिल्ली की एक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कंपनी की मदद मिली. एप बनाने के लिए एसएचजी के खाते से 35,000 रुपये लिये गये. एप को गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध करवाया गया.

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कोरोना संक्रमण से बचाव

खूंटी शहर के मुख्य चौक नेताजी चौक के 4 किलोमीटर के दायरे में सखी बास्केट के जरिये सेवाएं दी जा रही हैं. एप के जरिये 250 रुपये से अधिक ऑर्डर करने पर पर मुफ्त डिलिवरी की जाती है. इससे कम पर ग्राहक को 20 रुपये की अतिरिक्त राशि डिलिवरी शुल्क के तौर पर देनी होती है. ऑर्डर मिलने के बाद दीदियां सामान पैक करने के लिए मास्क व ग्लब्स का इस्तेमाल करती हैं. डिलिवरी से पहले और बाद में बास्केट (टोकरी) को सैनिटाइज़ किया जाता है. डिलिवरी बॉय को मास्क व ग्लब्स लगाना अनिवार्य है. कोरोना संक्रमण को कम से कम करने को डिलिवरी बास्केट पर ही बार-कोड लगाया गया है. कैश नहीं होने की स्थिति में ग्राहक ऑनलाइन भुगतान अंकित खाते में कर सकते हैं.

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का होगा उपयोग

राज्यभर में लगभग 2.50 लाख सखी मंडल हैं. इससे 30 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं. सखी मंडल की बहनों को आजीविका मिशन के जरिए तकनीक का उपयोग करने को प्रेरित किया जा रहा है. ग्रामीण विकास विभाग ने आनेवाले दिनों में सखी मंडल की दीदियों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने की योजना बनायी है. इसके जरिए उनके विभिन्न उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री भी की जायेगी.

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